मप्र में भाजपा डेमोक्रेसी को समाप्त कर ब्यूरोक्रेसी थौंपना चाहती है-जोकचन्द्र

महावीर अग्रवाल

मन्दसौर  ८ जनवरी ;अभी तक;  पिपलिया स्टेशन । भाजपा की सरकार पंचायती राज का मखौल उड़ा रही है, रोज नए-नए आदेश निकालकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। चुनाव नही कराए जा रहे है, पहले सरपंचों को अधिकार देने का आदेश दिया, बाद में फिर निरस्त कर दिया। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री श्यामलाल जोकचन्द्र ने कहा कि  पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संविधान में संशोधन कर देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू कर ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को सत्ता में भागीदार बनाया था, लेकिन भाजपा की सरकार पंचायती राज को समाप्त करना चाहती है। वह डेमाक्रेसी को समाप्त कर ब्यूरोक्रेसी थौंपना चाहती है।

                      उन्होंने कहा कि  मप्र में 23 हजार सरपंचों, लाखों पंचों, जनपद व जिला पंचायत अध्यक्षों, सदस्यों को हटा दिया और संस्थाओं के अधिकार, अधिकारियों को सौंप दिए। इससे पूर्व भी नगरीय निकाय के अध्यक्षों व पार्षदों को हटाकर अधिकारियों को प्रभार दे दिया, यह सरासर चुने हुए जनप्रतिनिधियां का अपमान है, पंचायती राज अधिनियम में दिए गए अधिकारों का हनन है। भाजपा ऐसा कर लोकतंत्र को समाप्त कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। जोकचन्द्र ने आगे बताया प्रदेश के मुख्यमंत्री की नियत में शुरु से ही खोट है, पहले सीएम ने पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को समाप्त करने का प्रयास किया। पंचायत चुनाव में रोस्टर प्रणाली को धत्ता बताते हुए 2014 का आरक्षण थौंपा गया। बाद में साजिश कर पिछड़ा वर्ग का आरक्षण ही समाप्त कर सरकार ने संविधान की धज्जियां उड़ा दी।         श्री जोकचन्द ने कहा कि ततत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथजी द्वारा 2019 में रोस्टर प्रणाली से किए गए आरक्षण को शिवराज सरकार ने अध्यादेश के जरीए पलटते हुए 2014 का आरक्षण थौंपकर अवैधानिक तरीके से चुनाव कराने का एलान कर दिया था, अन्ततः न्यायालय में इस प्रक्रिया ने दम तोड़ दिया। शिवराज सरकार ने शर्मशार होते हुए अध्यादेश को वापस लिया और चुनाव आयोग को आचार संहिता निरस्ती की घोषणा करना पड़ी। इसके बाद पंचायत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने तत्कालीन सरपंचों को ही चार्ज देकर वाहवाही लूटी, लेकिन दूसरे दिन ही इस आदेश को पुनः निरस्त कर दिया। जोकचन्द्र ने बताया लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी को मिलकर भाजपा सरकार के खिलाफ एकमत होकर विरोध करना होगा, तभी संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा हो पाएगी।