महाराजपुर संगम में शुरू हुआ प्रवासी पक्षियों की दस्तक, घाट पर कर रहे अठखेलियां सर्दियां आते ही प्रवासी मेहमनों की हुई आमद

7:16 pm or December 23, 2021

जिला मंडला के विकासखंड नारायणगंज से प्रहलाद कछवाहा

मंडला २३ दिसंबर ;अभी तक;  सर्दियों का मौसम आते ही जिले में प्रवासी पक्षियों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। ये पक्षी जिला मुख्यालय के महाराजपुर संगम घाट समेत अन्य जल स्त्रोतों में नजर आ रहे है। प्रतिवर्ष संगम घाट में इन प्रवासी पक्षियों का ठिकाना होता है। यहां बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रजाति के प्रवासी पक्षी अपनी आमद देते है। संगम घाट में इन प्रवासी पक्षियों के कारण आकर्षक बन जाता है। वहीं संगम पर इन पक्षियों को देखने जहां स्थानीय समेत अन्य पक्षी प्रेमी पहुंच रहे हैं, वहीं कुछ उनके लिए दाना लेकर भी जाते हैं।

                   नर्मदा नदी के संगम घाट में पक्षियों की इन अटखेलियों को देखने के लिए जहां बहुत लोग पहुंचते हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो भोजन के रूप में उन्हें कुछ खाने के सामान यहां डाल रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो ये इन पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। पक्षियों का प्राकृतिक भोजन वे स्वयं ढूंढ लेते हैं वह पानी या इसके आसपास कीड़े मकोड़े के रूप में होता है। लेकिन यहां आने वाले लोग संगम घाट में पॉलीथिन, थर्माकोल समेत अन्य खाद सामग्री डाल देते हैं इससे न केवल प्रदूषण का खतरा है बल्कि इन पक्षियों के लिए भी ये खतरे का सबब बन सकता है।

जिले में रहता है करीब पांच महिने का प्रवास :

                       जिला मुख्यालय के नर्मदा और बंजर के संगम में विगत कई वर्षो से प्रवासी पक्षियों का डेरा है। सर्दियों की दस्तक के साथ  मंडला के संगम में हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी अक्टूबर से फरवरी तक आते हैं। अत्यधिक ठंड के कारण साइबेरियाई पक्षी हिमालय की ऊंचाई को पार कर मध्यप्रदेश और भारत के अन्य इलाको  में पहुंचते हैं।  जिसमें मंडला जिला भी शामिल है।  ये अक्टूबर से दिसंबर तक हजारोंं प्रवासी पक्षी जिले में आते हैं और उनमें से अधिकांश अत्यधिक ठंड के कारण मीलो दूर से प्रजनन, उपयुक्त आवास, भोजन की तलाश में आते हैं।  ये पक्षी मंडला के संगम घाट में लगभग पांच महीने तक रहते हैं।  चार से पांच महीने के बाद वे अपने मूल स्थान में  लौट जाते  हैं।

संरक्षित करने होना चाहिए प्रयास:

                     पक्षी प्रेमियों का कहना है कि थर्माकोल पत्तल का चलन चलने के साथ पॉलिथीन का भी ज्यादा ही उपयोग नर्मदा घाटों में किया जाता है। जिला प्रशासन को नर्मदा घाटों में दोना पत्तल के विनिष्टीकरण के लिए सुव्यवस्थित स्थान बनाना चाहिए। जिससे प्रवासी पक्षियों को पॉलिथीन और थर्माकोल से कोई असुविधा ना हो। इसके साथ ही नर्मदा नदी में नाव चलाने वाले नाव चालक को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। जिससे आने वाले पर्यटक और लोगों को पक्षियों को करीब से दिखा सके और इन प्रवासी पक्षियों को बचाने में सहयोग कर सके। पक्षियों के प्रति और उत्साह व जानकारी को सभी से साझा करने के लिए हमें ऐसे जगह पर बर्ड फेस्टिवल का भी आयोजन  करना चाहिये।

इनका कहना है

देशी परिंदों के साथ विदेशी परिंदों ने जिले की खूबसूरती पर चार चाँद लगा दिए है, ठण्ड के मौसम में अलग अलग प्रजाति के विदेशी मेंहमानों ने संगम घाट की रौनक बढ़ा दी है। प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन अधिकारियों के साथ युवा और आम नागरिक को इनके संरक्षण के लिए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
सत्यसोभनदास, एफईएस, टीम लीडर

परास्थितिक तंत्र में हर एक जीव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, यदि इस तंत्र में कुछ बदलाव होता है तो उनका असर सभी जीवों पर पड़ता है और पक्षियां भी इससे अछूते नहीं है, खासकर प्रवासी पक्षी पर जो आवास और भोजन के लिए बहुत ही सिलेक्टिव होते है, इनकी हेल्दी पापुलेशन को बनाए रखना एक चुनौती है।
मनोहर पवार, इकोलॉजिस्ट, एफईएस

मंडला जिले के संगम घाट और अन्य स्थानों में प्रवासी पक्षियों को देखने के बहुत से स्थान है। इन क्षेत्रों ेमें पक्षियों को सुरक्षित माहौल देने के साथ इन स्थानों को पॉलीथिन मुक्त करना भी जरूरी है। इन स्थानों पर बर्ड फेस्टिबल का भी आयोजन करना चाहिए, जिससे बच्चे और युवा में इन पक्षियों को बचाने में संवेदनशील हो।
संध्या यादव, पक्षी प्रेमी