महाशिवरात्रि: नीमच के श्री किलेश्वर का सजा दरबार,काशी विश्वनाथ जैसा चमत्कारिक है मंदिर

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर / नीमच १० मार्च ;अभी तक;  नीमच के काशी विश्वनाथ के नाम से प्रसिद्ध श्री किलेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। नीमच के राजा का दरबार फूलो से सजा दिया गया है। सूर्योदय से ही मंदिर में हवन शुरू हो जाएगा, दिनभर धार्मिक आयोजन होंगे और शाम को छप्पन भोग का आयोजन रखा गया है और इसके बाद महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा। श्री किलेश्वर मंदिर में स्थित शिवलिंग चमत्कारिक है। मान्यता है कि शिवरात्रि पर भोलेनाथ भक्तों पर खूब कृपा बरसाते है। उनकी आराधना और दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर होते है, मनोकामनाएं पूर्ण होती है और लक्ष्मीजी की प्राप्ति होती है।
                   गुरूवार को महाशिवरात्रि श्री किलेश्वर महादेव मंदिर पर भक्तों का सैलाब उमडेगा। महाशिवरात्रि पर पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया है। सुबह पांच बजे से जलाभिषेक शुरू हो जाएगा, जो दोपहर दो बजे तक चलेगा। चमत्कारिक शिवलिंग का फूलों से आकर्षक श्रृंगार मंदसौर के कलाकार करेंगे। शाम पांच बजे छप्पन भोग का आयोजन रखा गया है और इसके बाद महाआरती होगी। देवी देवताओं के आव्हान, स्थापन, अग्नि पूजन यजमानों द्वारा नीमच के विद्वान ब्राहृमणों के सानिध्न में संपन्न् होगा। 12 मार्च को यज्ञ की पूर्णाहूति होगी। देर रात तक भक्त भोले के दर्शन करते रहेंगे। मंदिर समिति द्वारा कोरोना काल के दौरान भक्तों की सुरक्षा के खास इंतजाम किए है। हेंडवॉश और सेनेटाईजर की व्यवस्था की गई है।
                      वनस्पति औषधियों का बगीचा रखता है सेहत को तंदुरूस्थ, मन हो उठता है आनंदित—
मंदिर परिसर में पूज्यनीय बाबूजी स्वर्गीय कश्मीरीलालजी गंगानगर वाले की पुण्य स्मृति में अशोक गंगानगर द्वारा विशाल वनस्पति औषधियां का बगीचा का निर्माण किया गया है, जिसमें भक्तों को बैठने के लिए कुर्सियां,मनोहारी फव्वारे, घास,विद्युत साज सज्जा आदि शामिल है। बगीचे की विशेषता यह है कि प्रवेश करते ही भक्तों का मन आत्मविभोर हो जाता है और मन आनंदित हो उठता है। आनंदो संस्था द्वारा बगीचे में प्रतिदिन योगा करवाया जाता है। सूर्योदय के वक्त यहां पर कई सज्जन शारीरिक दुर्बलता दूर करने के लिए पहुंचते है।
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मंदिर परिसर में मौजूद है शिव की मंडली—
                     सीआरपीएफ से सटे हुए क्षेत्र में नीमच के काशी विश्वनाथ मंदिर के नाम ख्यात श्री किलेश्वर महादेव मंदिर की ख्याति दूर—दूर तक फैली हुई है। महाशिवरात्रि पर शिव की लीला और भक्ति् की बयार छाई रहेगी। मंदिर परिसर में शिव परिवार गणेशजी, पार्वतीजी, नंदीजी और शिवजी की चमत्कारिक प्रतिमाएं विराजमान है। बजरंगबली की प्रतिमा स्थित है, जिसमें बजरंगबली लंका पार करते समय अपने पैरो से राक्षसणी को दबाए हुए है। मां संतोषी, दुर्गाजी, काल भैरव, लाल भैरव की प्रतिमाएं स्थित है। त्याग और तपस्वी सदानंजी महाराज की समाधि बनी हुई है। मंदिर का उत्थान उन्हीं के द्वारा किया गया था। वे भूतकाल, भविष्यकाल और वर्तमान तीनों काल के ज्ञाता थे। 4 वेदों के ज्ञाता और 18 पुराणों के मर्मयज्ञ जानकार,त्रिकाल दर्शी संत श्री 1008 श्री गजानंदजी सरस्वती दंडी स्वामीका आश्रम में कदम रखते से भक्तों को सुखद अनूभूति होती है।
देश के कोने—कोने में है भोले के भक्त—
                   श्री किलेश्वर महादेव प्राचीनतम मंदिर करीब 168 वर्ष पुराना है।  सीआरपीएफ की वादियो में स्थित यह मंदिर साधना, तपस्या और आत्मशांति, सुख—समृद्दि का प्रतिक माना जाता है। भोलेनाथ के अन्नय भक्तजन है। कई बार मणिपुर, नागालेंड सहित कई देश के कोने से डाक द्वारा चढावा प्राप्त् होता है। इसमें पता चलता है कि भोले के भक्त कोने—कोने में फैले हुए है।

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