महिला कैदियों के हाथों से बनी इको फेंण्डली गणेश प्रतिमायें घर में हुई विराजित

2:47 pm or September 10, 2021
महिला कैदियों के हाथों से बनी इको फेंण्डली गणेश प्रतिमायें घर में हुई विराजित
मयंक शर्मा
खंडवा १० सितम्बर ;अभी तक;  कला और कल्पना किसी जेल की दीवारों में बंध नहीं सकते। इनको तो बस
हौसले का साथ चाहिए। फिर  इनको पंख ही लग जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ खण्डवा में।
खण्डवा जेल की महिला कैदियों के हुनर को जेल प्रशासन और अभिजीत सोशल
वेलफेयर सोसाइटी के हौसले के हाथों का साथ मिला और चार दीवारों में बन्द
उन महिलाओं के हुनर ने हौसले के पंख लगाकर ईको फ्रेंडली मिट्टी युक्त
गणेश प्रतिमाओं को बनाकर सबको चकित कर दिया।
एसपी विवेकसिंह ने बताया कि महिला कैदियों के द्वारा बिना किसी औजार या
उपकरण के  प्रयोग के बिना इन मूर्तियों का निर्माण किया गया है। महिला
कैदियों द्वारा निर्मित मूर्तियों का प्रदर्शन एवं विक्रय भी किया गया।
विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग कैदियों के उत्थान के लिए किया जायेगा।
प्रदर्शनी का उद्घाटन गुरूवार को पुलिस लाइन ग्राउंड में रखा गया।
संगीत ललित कला केन्द्र की शबनम शाह एवं उनकी टीम द्वारा मिट्टी की
प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण दिया था। कैदी महिलाओं ने अपने हुनर का
परिचय देते हुए मिट्टी की प्रतिमाएं अलग-अलग मुद्राओं में बनाई । जिला
जेल की महिला कैदियों द्वारा अपने हाथों से निर्मित मिट्टी की श्री गणेश
प्रतिमाओं की प्रदर्शनी गुरूवार को लगी।
जिसमें मुख्य रूप से शिवलिंग में गणेश, नाव में गणेश, मूषक पर गणेश
विराजमान मूर्तियां शामिल है।
निर्मित प्रतिमाओं की प्रदर्शनी पुलिस लाइन ग्राउंड पर गुरूवार को लगाई
गई। जहां लोगों ने पहुंचकर मूर्तियों को निहारा। कार्यक्रम में अतिथि के
रूप में शामिल हुए विधायक देवेन्द्र वर्मा ने कहा कि पर्यावरण एवं
धार्मिक भावनाओं की आस्था को बरकरार रखने के लिए अभिजीत सोशल वेलफेयर
सोसायटी एवं जिला जेल के सहयोग से संगीत कला केन्द्र के शिक्षकों द्वारा
महिला कैदियों को प्रशिक्षण दिया गया जो एक सराहनीय कदम है। महिला
कैदियों ने अलग-अलग रूपों में गणेश जी की प्रतिमाओं का निर्माण किया
है।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक विवेकसिंह ने प्रदर्शनी की तारीफ करते हुए
कहा कि  कला छुपाने की नहीं बल्कि प्रदर्शित करने की है। महिला कैदियों
द्वारा मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्हें
बनाना एक सराहनीय कदम है। इसी प्रकार के आयोजनों से कैदियों के मन में
बदलाव आता है और उनके जीवन में नया परिवर्तन आएगा जिससे वे अपराध की
दुनिया से दूर रहेंगे। सोसायटी की अध्यक्ष शर्मिष्ठा तोमर एवं शबनम शाह
ने बताया कि अपराधियों में कला के प्रति रचनात्मकता एवं उनके जीवन मे
व्याप्त अंधकार को कला के माध्यम से दूर करते हुए भविष्य में उनकी
आजीविका का साधन भी बने, इन्ही उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए ये
कार्यक्रम आयोजित किया गया।