मांधाता सीट पर 8 में से एक का भविष्य  मंगलमय बनाने के लिये 1.96 लाख मतदाता  मंगलवार को करेगे मतदान

मयंक शर्मा

खंडवा २ नवंबर ;अभी तक; जिले के  एक मात्र अनारक्षित व रिक्त   मांधाता सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिये मंगलवार 3 नवम्बर को मतदान होगा। चुनाव मैदान के 8 उमीदवारो के भाग्य का फैसले के लिये करीब  1.96 लाख मतदाता मतदान करेगे। प्रदेश कीी सबसे अधिक सम्पन्न (मालदार) सीट पर कब्जा जमाने के लिये भाजपा कांग्रेस सहित 8 उम्मीदवार मैदान में है।

कलेक्टर व निर्वाचन अधिकारी अनय द्विवेदी ने बताय कि मतददान के लिये सभी तैयाारियो पूर्ण कर ली गयी है।सोमवार को सभी मतदान केंद्रों के लिए पीठासीन अधिकारी और मतदान अधिकारियों के दल गठित  हैं।  मतदान के लिये  इवीएम एवं वीवीपैट के साथ-साथ कोरोना सुरक्षा किट सहित मतदान सामग्री लेकर दल नियत स्थानो के लिये निकल गये हैं। 263 मतदान केंद्र और 30 सहायक मतदान केंद्र सहित कुल 293 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मांधाता में 72 संवेदनशील मतदान केंद्र हैं। इन मतदान केंद्रों के दस फीसदी संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वीडियोग्राफी व दस फीसदी केंद्रों पर सीसीटीवी वेबकास्टिंग की जाएगी। श्री  द्विवेदी ने बताया कि कोरोना रोग से बचाव हेतु सुरक्षा सामग्री के रूप में फेसमास्क, सैनिटाइजर, ग्लब्स के उपयोग के लिए स्वास्थ्यकर्मी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी मतदान केंद्रों पर लगाई गई है।

उधर ग्राम भेटखेडा में बुनियादी सुविधाओ की मांग को लेकर  चुनाव के बहिष्कार की खबर है। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार विधानसभा का सबसे दूरस्थ और सबसे कम मतदाता वाला केंद्र भेटखेड़ा है। यहां 52 मतदाता दर्ज हैं।

जिले के अंतिम छोर में नर्मदा के उत्तर तट पर यह ग्राम स्थित है। पामाखेड़ी ग्राम पंचायत का ग्राम भेटखेड़ा विंध्याचल पर्वत की पहाड़ियों के बीच घने जंगल में बसा वनग्राम है। यहां के ग्रामीण आजादी के 70 वर्षों के बाद भी बिजली व शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित है।
विधानसभा का सबसे दूरस्थ और सबसे कम मतदाता वाला केंद्र भेटखेड़ा है। यहां 52 मतदाता दर्ज हैं। यह गांव जंगल के बीच होने से यहां सड़क व बिजली जैसी सुविधाओं का अभाव है। ग्राम के ही शिवप्रसाद ने बताया कि ं पूर्व विधायक लोकेंद्रसिंह तोमर और 2018 के विधानसभा आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह तोमर आए थे। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद नहीं आते है।यह गांव जंगल के बीच होने से यहां से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर देवास जिले की बागली तहसील के ग्राम प्रेमगढ़ है। वहां 20 बिजली के पोल खड़े कर बिजली सुविधा ग्रामीणों को दी जा सकती है लेकिन राजनैतिक इच्छा शक्ति केवन कोरे वायदे कर वोट हथियाने तक रही है।

एक नजर मे ——
मूांधाता विस उपचुनाव ‘ मतदान 3 नव मंगलवार
-मतदान केंद्र- 293

कुल मतदाता- 196306
पुरुष- 101772
महिला- 94529
अन्य-03
मिलिट्री वोटर्स-31
दिव्यांग- 1626
क्रिटिकल मतदान केंद्र-73
संवेदनशील-53दूसरे जिलों की सीमा से लगे मतदान केंद्र संख्या -69
संपर्क विहीन केन्द्र -02

0 चुनावी उंट किस करवट
राजनैतिक पंडितो का कहना है कि माधाता सहित प्रदेश की 28 सीटों के लिए होने जा रहा उप चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों की दशा व दिशा तय करने वाला साबित होगा । इस चुनाव के जरिए यह भी साफ हो जाएगा कि कमलनाथ और शिवराजसिंह चैहान में से प्रदेश की जनता किसे सिकंदर का ताज देती है । जां तक जिले की मान्धाता सीट का  सवाल है  यू तो कांग्रेस और भाजपा दोनों के ही हाथों में सत्ता की चाबी थमाती रही है । 2019 के चुनाव में भी मतदाताओं ने कांग्रेस के नारायण पटेल के सिर जीत का सेहरा बांधा था मगर 15 माह में ही वे पाला बदल गए । विधायक पद से इस्तीफा देकर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया । इस  घटनाक्रम के चलते मान्धाता सीट पर उपचुनाव हो रहा है । भाजपा ने नारायण पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है तो वही कांग्रेस ने पूर्व विधायक ठाकुर राजनारायण सिंह के पुत्र उत्तम पाल सिंह पर भरोसा जताया है । नारायण पटेल के पास सत्ता और संगठन की मुख्य ताकत है । पूर्व विधायक ठाकुर राजनारायण सिंह का 35 साल का गहन राजनैतिक अनुभव व युवा मतदाता के बीच उत्तम पाल सिंह की लगातार सक्रियता  मजबूती दिये है।

चुनाव  कशमकश भरा है और परिणाम का पूर्वानुमान मुश्किल भरा है। जहां तक जातिवाद की छाया लिये मांधाता सीट पर अपवाद रूवस्प ही गैर क्ष्ाित्रय जीत पाता है।इस मायने में पिछले चुनाव के जीत के गुर्जर विधायक नारायण पटेल को पुन मैदान में उम्मीदवारी देना भाजपा के पर्दे के पीछे कर बेबसी थी वहीं कांग्रेस ने भूल सुधारकर राजपूत प्रत्याशी के  पाले में गेंद डाली है जिसे तारणहार होने पर जातिगत वोटो का बडा विश्वास है तो नारायण पटेल को इस्तीफा देने के बाद पुन जीत दिलाना प्रत्याशी के अपेक्षाकृत सीएम सहित भाजपा की सत्ता व संगठन की जबाबदेही अधिक है। ं ।इस सबके बीच मतदाता अभी मौन है । सट्टा बाजार में भी भाव उपर नीचे हो रहे है।

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