माई की रसोई के 9 वर्ष पूरे, यहां हर भूखे को मिलती है रोटी लॉकडाउन में भी यहां से भूखा न गया कोई

11:12 pm or December 28, 2021

मंडला संवाददाता

मंडला २८ दिसंबर ;अभी तक;  नगर के रपटा घाट में एक ऐसी रसोई है जहां बीते 9 सालों में न कभी ताला लगा और न ही कभी यहाँ से कोई जरूर मंद या भूखा निराश वापस गया। कोरोना कॉल का लॉक डाउन हो या फिर होली दीवाली की छुट्टी, देश व्यापी बन्द का समय या फिर हड़ताल का दौर, हमेशा यहां आने वालों को भरपेट भोजन कराया गया। 28 दिसंबर 2021 को जब इस रसोई ने 9 वर्ष पूरे किए तो इस अवसर पर रपटा घाट स्थित श्री हनुमान लाला को चोला अर्पण किया गया। दोपहर भव्य संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन सुन्दर काण्ड भजन मण्डली देवदरा द्वारा किया गया।

कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन के समय तो इस रसोई के सदस्यों द्वारा किये गए कार्यों को लोगों ने खूब सराहा और जरूरतमंदों ने दिल से दुआएं दी क्योंकि जब सारे ठिकाने बंद थे तब यह गरीबों और भूखों के भरपेट भोजन का सबसे बड़ा सहारा थी और वो भी बिना किसी सरकारी या निजी सहायता के। पूरी तरह से नि:शुल्क सेवा की मिसाल ।

रपटा घाट पर रहने वाले गरीबों की जरूरत को देखते हुए नर्मदा जन कल्याण समिति के सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से माई की रसोई की शुरुआत 28 दिसंबर 2012 को की गई थी प्रतिदिन 60 से 70 लोगों को खिचड़ी तैयार कर परोसकर भरपूर भोजन कराया जा रहा है। यह क्रम साल के 365 दिन जारी रहता है माई की रसोई में प्रतिदिन तैयार होने वाली खिचड़ी 17 प्रकार के अनाज से बनती है। खिचड़ी तैयार कर सदस्य शाम को रपटा घाट में नर्मदा की पूजा अर्चना करते हैं यहां जरूरतमंद के साथ अन्य लोग भी बैठकर भोजन करते हैं। रात को कोई भी बेसहारा भूखा ना सोए इसके लिए माई की रसोई मददगार बनी हुई है।