मिर्ची बाबा कांग्रेस के सिर्फ पेढ वर्कर है-मिथुन वप्ता

5:56 pm or October 16, 2020
मिर्ची बाबा कांग्रेस के सिर्फ पेढ वर्कर है-मिथुन वप्ता
महावीर अग्रवाल
मंदसौर- १६ अक्टूबर ;अभी तक; संत समाज का आईना होता है,जिसका अनुसरण कर समाज सही दिशा में जाता है,पर यदि संत ही पाखंड,झूट फरेब पर आ जाये तो उसका अनुसरण करना तो दूर समाज उसे अस्वीकार कर देता है।ऐसे ही एक पाखंडी व अपने आप को संतो का हितेषी बताने वाला मिर्ची बाबा कमलनाथ की भक्ति दिखाने व सुर्खियों में बने रहने हेतु अनाप शनाप बयानबाजी कर रहा है।ये वही संत है जिसने पिछले उपचुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह को जिताने के लिए प्रण लिया था कि अगर दिग्विजयसिंह चुनाव हार जाते है तो में जीते जी समाधि ले लूंगा।परंतु दिग्विजयसिंह के चुनाव हारने के बाद ये पाखंडी बाबा पलट गया।तो क्या ये कसम राजनीति चाहत व चाटूकारिता तक ही सीमित रह गयी?
              उक्त आरोप भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री मिथुन वप्ता ने कांग्रेसी नेता मिर्ची बाबा पर लगाए है। मिथुन वप्ता ने कहा कि अपने आप को संतो का हितेषी बताने वाले मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेता मिर्ची बाबा पहले अपने गिरेबान में झांके की वो वास्तविक में संतो के हितैषी है कि नही?यदि संतो के हितैषी होते तो अभी तक क्यो पालघर में हुई साधुओं की हत्या पर मौन रहे।राजस्थान में इन्ही की कांग्रेस सरकार में एक पुजारी को जलाकर मार दिया जाता है तब भी संतो के हितैषी मिर्ची बाबा मौन रहे।ये संत होकर भी क्यो चुप रहे जब इनके ही कांग्रेस के नेता उदित राज द्वारा हाल ही में कुम्भ मेले को बंद करने की बात कही गयी।

यदि संतो की बात करते है तो उनके लिए खुद की कांग्रेस सरकार से सवाल क्यों नही करते?मिथुन वप्ता ने कहा कि मिर्ची बाबा कांग्रेस के पेढ वर्कर की भांति कार्य कर रहे है।उन्हें सिर्फ अपने आका कमलनाथ को खुश करना है और अपनी जमीन बचानी है, इसलिये वे उटपटांग बयान बाजी करते रहते है और सुर्खियों में बने रहना चाहते है।भाजपा को हिंदुओ के नाम पर पाखंडी बताने वाले मिर्ची बाबा भूल गए कि भाजपा के राज में ही राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हुआ है।कश्मीर में हिंदुओं की पुनर्स्थापना का कार्य प्रारंभ हुआ है।अगर मिर्ची बाबा को हिंदुत्व की इतनी चिंता है तो क्यो हिन्दू विरोधी कांग्रेस का पलड़ा पकड़े राजनीति कर रहे हो।हिन्दू धर्म की चिंता करते हो तो कही जाकर मंदिर में पूजा अर्चना क्यो नही करते।

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