मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने मुरिया दरबार में खोला सौगातों का पिटारा

राजेंद्र तिवारी

जगदलपुर, 28 अक्टूबर ;अभी तक; मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में सौगातों का पिटारा खोला। उन्होंने यहां बस्तर दशहरा के आयोजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मांझी-चालकी सहित विभिन्न पदाधिकारियों के मानदेय को बढ़ाने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष  दीपक बैज द्वारा उठाई गई मांगों पर 20 घोषणाएं कीं। उन्होंने सभी मांझी चालकियों से वन अधिकार पट्टे के लिए आवेदन लेकर उन्हें 6 माह के भीतर पट्टा देने की घोषणा की। इसी प्रकार मांझियों का मानदेय 1350 से बढ़ाकर 2000 रूपए प्रतिमाह, चालकियों का मानदेय 675 रूपए से बढ़ाकर एक हजार रूपए, कार्यकारिणी मेम्बरीन का मानदेय एक हजार से बढ़ाकर 11 सौ रूपए, और साधारण मेम्बरिनों को 15 सौ रूपए वार्षिक मानदेय, 21 पुजारियों का मानदेय 3 हजार से बढ़कार 3500 रूपए, गुरूमाय और भंडारदेवी पुजारी, मुण्डा बाजा वादक, मोहरी बाजा वादक और पूजा करने वाले सात सदस्यों को 1500 वार्षिक मानदेय, जोगी बिठाई करने वाले लोगों को 11 हजार रूपए, रथ निर्माण करने वाले दल को 21 हजार रूपए के मान से कुल 42 हजार रूपए की राशि देने  की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि विश्व का सबसे लंबा पर्व मनाने का कीर्तिमान बस्तर के पास है। प्रतिवर्ष ढाई महीने तक मनाया जाने वाला यह पर्व इस वर्ष साढ़े तीन माह तक मनाया गया। बस्तर दशहरा हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया में सबसे अधिक समय तक चलने वाला पर्व है।

उन्होंने बस्तर को आजादी पसंद बताते हुए कहा कि 1857 में आजादी की लड़ाई से काफी पहले यहां राजा गैंदसिंह को 1824 में फांसी दी गई थी। वर्ष 1857 में विद्रोह की ज्वाला बस्तर से निकली’।

छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीरनारायण सिंह सहित सभी सपूतों को नमन करते हुए कहा कि बस्तर ने देश की आजादी में विशेष भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरिया दरबार में आकर उन्हें काफी प्रसन्नता हो रही है। इस आयोजन में दंतेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, कोण्डागांव और कांकेर से आदिवासी समाज के लोग शामिल होने आते हैं। मुरिया दरबार में समारोह के अलावा समाज की उन्नति पर भी विचार विमर्श होता है ,यह सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने अपने गरीब, आदिवासी एवं किसान हितैषी नीतियों के बारे में बताते हुए कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद किसानों की ऋण माफी और 25 सौ रूपए में धान खरीदी जैसी योजनाएं लागू की। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए धान, मक्का, और गन्ना फसल के लिए किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की राशि दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोहण्डीगुड़ा में हमने 1700 आदिवासी किसानों की 42 सौ एकड़ जमीन वापस की है। छत्तीसगढ़ हिन्दूस्तान में तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रति बोरा 400 रूपए की राशि दी जा रही है। वनवासियों को सतत रूप से आय सुनिश्चित करने के लिए समर्थन मूल्य पर 7 की जगह 31 लघु वनोंपजों की खरीदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन में जब सब कुछ बंद था ऐसे कठिन समय में राज्य सरकार ने स्वसहायता समूहों के माध्यम से लघुवनोपज की खरीदी की व्यवस्था की। जिस समय लोग एक-एक पैसे के लिए मोहताज थे हमारी सरकार ने मनरेगा में प्रतिदिन 26 लाख लोगों को रोजगार देने का काम किया।

मुख्यमंत्री ने सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष  दीपक बैज की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष का दायित्व भली भांति निभाया। उन्होंने इस पर्व के आयोजन में शामिल विभिन्न समुदायों की हर छोटी-बड़ी समस्याओं की जानकारी ली और उनका समाधान किया। म  इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण एवं बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री डाॅ प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं उद्योग मंत्री  कवासी लखमा ने भी उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया।
झंडा मांझी के छायाचित्र का लोकार्पण

इस अवसर पर बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी  कमलचंद भंजदेव, संसदीय सचिव एवं जगदलपुर विधायक  रेखचंद जैन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं नारायणपुर विधायक  चंदन कश्यप, क्रेडा अध्यक्ष  मिथिलेश स्वर्णकार, मत्स्य बोर्ड के अध्यक्ष  एमआर निषाद, महापौर श्रीमती सफीरा साहू, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, पुलिस महानिरीक्षक  पी सुंदरराज, कलेक्टर  रजत बंसल, पुलिस अधीक्षक  दीपक झा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

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