मुरम की गांवो में बन रही सड़को की बिना गुणवत्ता प्रमाण पत्र के हो रहे भुगतान की हो जांच 

   (  महावीर अग्रवाल )
 मन्दसौर १० सितम्बर ;अभी तक;  मंदसौर जिले की पंचायतों में मनरेगा के तहत कोई 60 करोड़ रुपए लागत से अधिक की मुरम की कोई 400 से अधिक सड़कों पर काम चल रहा है 15लाख रु से लेकर 24 व 28लाख रुपए लागत तक कि ये सड़कें बन रही है। काम चूंकि कि मनरेगा के तहत हो रहा है। इसलिए इन सड़कों की लागत के लिए भी कोई टेंडर की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है बल्कि इंजीनियर के द्वारा एक टीएस का सहारा लिया जाता है। जिसके द्वारा इन सड़कों की लागत तय की जाती है। अब वह बात अलग है कि लंबाई- चौड़ाई के हिसाब से इन सड़कों की लागत अलग- अलग कैसे आ रही है । यह तकनीकी जांच ही समझ सकती है। इन सड़कों के निर्माण में भुगतान के पूर्व गुणवत्ता का प्रमाण पत्र बहुत जरूरी होता है।  एक गुणवत्ता का प्रमाण पत्र इन सड़कों का भाग्य लिख देता है लेकिन कई सड़कों का भुगतान तो इन प्रमाणपत्रों के बिना ही कर दिया। क्यों। एक जांच का विषय है ।यह सब। कुछ मामलो में जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि सही क्या है । गांवो मैं हो रहे इस महत्वपूर्ण कार्य से जनप्रतिनिधि भी कितने अवगत है यह यहां इस खबर के बाद ही पता चल सकेगा की कितने और राजनीतिक दलों के कार्यकर्त व नेता  गांव में हो रहे इस महत्वपूर्ण कार्य की और ध्यान दे रहे है। अगर गुणवत्ता पूर्ण कार्य की ओर ध्यान दिया गया तो ठीक नहीं तो गांवो के तेजी से विकास में यह सड़के कितनी सर दर्द साबित होगी यह बाद में पता चल सकेगा। मल्हारगढ़ जनपद में गांवो में बन रही इन सड़कों के मामलों में बहुत धांधली  बे खोफ कैसे है यह आश्चर्य है क्योंकि इस विधान सभा क्षेत्र के विधायक श्री जगदीश देवड़ा है प्रदेश मंत्री मंडल में वित्त मंत्री होकर वे एक वरिष्ठ मंत्री भी है।
                 जानकार बताते हैं कि पंचायतों में चल रहे कोई 400 मोहर्रम की सड़कों के काम भी चार प्रकार से हो रहे हैं। जिले में चल रही मुर्रम कि ये सड़कें सुदूर ,खेत व एप्रोच सड़क तथा सांसद, विधायक, पंच परमेश्वर ,पवित्रा व 15 वे वित्त आयोग योजना के तहत सीसी रोड की सड़कें बन रही है ।मुर्रम की सड़कें 700-800 मीटर से लेकर एक –  डेढ़ व 2 किलोमीटर तक की बन रही है। इन इन सड़कों की लागत भी इंजीनियर के द्वारा टी एस से 15लाख रुपए से लेकर 24 – 28 लाख रुपए तक की बन रही है। इन सड़कों के मध्य प्रदेश के सीएसआर के अनुसार कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं बल्कि इंजीनियर द्वारा लंबाई -चौड़ाई सब कुछ टी एस के माध्यम से तय कर बनाई जा रही है।
               जानकारी अभी बताते हैं कि सीसी रोड की  सड़के तो शायद गांव में भरमार हो तो कोई आश्चर्य नहीं ।यह सडके कुछ गांवो में तो 4 – 5 से लेकर 10 से भी अधिक बन रही है। उदाहरण के लिए बालागुड़ा बरुजना ग्राम में 10  -10 व बर्डिया अमरा में 16 सीसी रोड की सड़कों पर काम चल रहा है ।यह कार्य पूर्ण होने को है। कुछ गांव में सात सौ -आठ सौ मीटर की सड़कें भी बन रही है जबकि एक से डेढ़- दो किलोमीटर तक की सडके भी कुछ गांव में बन रही है ।पागा पंचायत में डेढ़ किलोमीटर सड़क सुदूर योजना के तहत बन रही है जबकि एक गांव में खेत सड़क योजना के तहत बन रही सड़क को गांव वालों ने इसलिए पूरी नहीं बनने दी कि उनके खेत बीच मे आ रहे हैं इसलिए वहां केवल 400-500 मीटर की सड़क ही बनी है।
              उदाहरण के तौर पर बताते हैं कि ग्राम रतन पिपलिया, बागपुर, दोरवाड़ा, बड़ा हिंगोरिया देसी गांव की सड़कों की गुणवत्ता रिपोर्ट के बाद भुगतान हो भी गया लेकिन कई गांव में बनी मोहर्रम की सड़कों की गुणवत्ता की रिपोर्ट नहीं है लेकिन भुगतान हो गया मल्हारगढ़ जनपद में तो बताते हैं कि कई सड़कों की स्थिति ऐसी है कि उनकी गुणवत्ता की रिपोर्ट के बिना उनका भुगतान हो गया । सड़कों की लागत से लेकर बिना गुणवत्ता की रिपोर्ट  पर भुगतान हो कैसे गया, इसकी जांच होकर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में गांव में बन रही मुर्रम की सड़कों की स्थिति गुणवत्तापूर्ण हो सके।
                मनरेगा की विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपए की मुरम की सड़के गांव में गांव में बन रही है। सड़कों की लागत से लेकर उनको बनाने में जो तरीका अपनाया जा रहा है वह भी एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच का विषय हो सकता है ।जांच की रिपोर्ट भी जनता की टेबल पर रखी जाना चाहिए ताकि गांव में मनमानी लागत और मनमाने तौर तरीकों से सड़कों जैसे महत्वपूर्ण कार्य को बिना गुणवत्ता जे पूरा नहीं किया जा सके। इन सड़कों पर पानी का छिड़काव रोलिग भी किया गया है या नहीं यह भी जांच का विषय है या नीति नियम में ऐसा है ही नहीं ।यदि इसी बारिश में गांव की सड़कों पर काम हो रहा है तो क्या उस पर रोलर चलाया जा सकता है। मल्हारगढ़ जनपद में तुरंत देखा जाना चाहिए की कितनी सड़कों की स्थिति के गुणवत्तापूर्ण है या नहीं। रिपोर्ट के बिना भुगतान यदि हुआ है तो किन नियमों के तहत हुआ है और नहीं हुआ है तो क्या सडके गुणवत्तापूर्ण बनी है । इस की प्रशासन को शीघ्र जांच कर जांच में यदि कोई दोषी पाया जाए तो सख्त कदम उठाए जाने चाहिए ताकि गांव में निर्माण कार्य सही और गुणवत्ता पूर्ण हो सके।