मेडिकल कॉलेज : कुछ मुद्दे  आखिर मेडिकल कॉलेज क शिलान्यास हो गया, मंदसौर की जनता ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी, परिणाम मिल गया

5:30 pm or May 10, 2022
महावीर अग्रवाल
मंदसौर १० मई ;अभी तक;  पूर्व मंत्री एव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री नरेन्द्र नाहटा ने कहा की मुझे लगता है सांसद सुधीर गुप्ता ने इससे जुडी कुछ बातों का  उल्लेख  शिलान्यास कार्यक्रम में  जरूर किया होगा।  परन्तु अखबार में उसकी चर्चा नहीं होने से लगता है वे शायद भूल गये हो इसलिए लिख रहा हूँ।
                        श्री नहटा ने कहा कि  केंद्र सरकार द्वारा जारी एक योजना के तहत मंदसौर में  मेडिकल कॉलेज की संभावना बलवती हुई, तभी नीमच में बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया।  सारा जिला बंद रहा।   राज्य सरकार की सहमति के बगैर दोनों मेडिकल कॉलेज संभव नहीं थे।   विधायकजी तो पहले ही कह चुके थे कि अब रतलाम में मेडिकल कॉलेज खुल गया है इसलिए मंदसौर  में नहीं हो सकता है।  तब नीमच कैसे होता।  सांसदजी का मुझे फोन आया।  उनने विश्वास दिलाया कि वे इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाएंगे, राजनैतिक श्रेय नहीं लेंगे।  मैंने दिग्विजय सिंह जी से बात की । दिग्विजय सिंह जी ने कमल नाथ जी से।  कमल नाथ जी ने दोनों कॉलेज की सहमति दी।  तब दोनों मेडिकल कॉलेज  इस संसदीय क्षेत्र को मिले।  मै आशा करता हूँ कि  शिलान्यास के अवसर पर दिग्विजय सिंह जी और कमल नाथ जी को धन्यवाद अवश्य दिया गया होगा।  उन दो महानुभावों को भी जिनने इस उपलब्धि में बड़ी भूमिका निभाई।  एक सुरेंद्र लोढ़ा जी और दूसरे सुनील बंसल जी जिनने पोस्ट कार्ड अभियान चलाया। जनता को भी धन्यवाद जिसकी सोच के बगैर शायद यह संभव नहीं होता।
पर वही जनता आज चुप क्यों है जब मेडिकल कॉलेज तीन टुकड़ो में बन रहा है।  ऐसी क्या मजबूरी है।
                       मै तत्कालीन कलेक्टर श्री मनोज पुष्प  से तब मिला था जब कुछ स्थानीय नेताओं ने MIT  से लगी 15 एकड़ भूमि प्रस्तावित की थी।  मैंने कहा था कि भविष्य में विस्तार के लिए यह आवश्यक होगा कि यह परिसर यदि 100 एकड़ नहीं तो कम से कम 50 एकड़ का हो।  उनने मुझसे सहमति व्यक्त की थी।  फिर पता नहीं क्या हुआ।  पता नहीं कितनी भूमि उपलब्ध कराई जा रही है और तीन टुकड़ो में क्यों जैसा कि समाचार पत्र कह रहे है। यदि टुकड़ों में ही बनाना है तो यह बेहतर होगा कि वर्तमान जिला चिकित्सालय परिसर में ही चिकित्सालय के लिए नया आधुनिक  भवन बना दिया जाए।  मंदसौर जिले की जनता के लिए यह अत्यंत सुविधाजनक होगा । महाविद्यालय  प्रस्तावित परिसर पर बने।  केंद्र शासन की नीति इसकी अनुमति देती है।   भविष्य की सारी  सम्भावनाओ को  जिंदा रखिए ,मारिये मत ।
एक चिंता और।  रतलाम मेडिकल कॉलेज की घोषणा 2008  के चुनाव के ठीक पहले हुई।  अंतिम बजट में 100/- का प्रावधान किया गया।  2013 में चुनाव आते आते बात कुछ आगे बढ़ी पर जमीन पर कॉलेज 5  साल बाद भी नहीं था।  2018  के चुनाव के ठीक पहले उसका उद्घाटन हुआ।  पूरे  10  साल का इन्तजार।  मेरा विश्वास है कि ऐसा मंदसौर और नीमच मेडिकल कॉलेज के साथ नहीं होगा।  यह तब संभव है जब कि  राज्य सरकार अपना अंशदान भी केंद्र के साथ जारी करे और किसे ठेका मिले इसमें किसी की दिलचस्पी नहीं हो।    इस बार राज्य सरकार ने कितना अंशदान जारी किया है  , मुझे जानकारी नहीं  है।
श्री नाहटा ने कहा कि मुख्य मंत्री जी ने शिवना के शुद्धिकरण की घोषणा की है।  नगर पालिका पिछले 30  साल से और सरकार  पिछले 15 साल से यही घोषणा कर रही  है। मुख्य मंत्रीजी से निवेदन है की इन वर्षों में शिवना  नाला बन कर रह गई है , गन्दा नाला।  इस बार की घोषणा पूरी हो जाए।  भगवान् पशुपति नाथ से यही प्रार्थना है।
                         विधायक जी का धन्यवाद कि उनने मंदसौर शहर और रेवास देवड़ा के नागरिकों का MIT चौराहे पर आ रही  तकलीफ़ का जिक्र किया।  फ्लाई ओवर बने।  ख़ुशी की बात है।  पर विधायक जी को याद होगा , 2011 के आसपास मैंने उन्हें पत्र लिख कर आग्रह किया था कि बाय पास पर निकलने वाले उस स्थान को जिसे बुलगडी नाले के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है  वर्ष के चार महीने छोड़ कर छोटे ट्रैफिक के आवागमन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हम कर लेते तो अनेक दुर्घटनाओं को टाला जा सकता था ।छोटे मोटे  लोग  भी कभी कभी बेहतर सुझाव दे देते है , हमें उन्हें सुनना चाहिए।
शासकीय महाविद्यालय से फार्मेसी से  MIT से यूनिवर्सिटी होते हुए हम मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गए है । अब  हम अब सोचे मंदसौर शिक्षा का बड़ा केंद्र कैसे बने।