मोर का शिकार ण्ंव पका कर खाने वाले तीन अभियुक्तो  में प्रत्येक को तीन वर्ष का सश्रम कारावास

मयंक शर्मा
खंडवा  २३ दिसंबर ;अभी तक;  न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पुनासा की अदालत ने  जाहिद पिता
मुस्ताक, उम्र 48 वर्ष, कोमल पिता शोभाराम, उम्र 59 वर्ष, द्वय निवासी
मदनी, एवं गोपाल पिता मदनसिंह, उम्र 42 वर्ष, निवासी पुरनी को वन जीव
संरक्षण अधिनियम की धारा 9 / 51 का दोषी पाते  हुये प्रत्येक को  3 वर्ष
का सश्रम कारावास एवं 10,000-रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। फेसला
गुरूवार  को सुनाया गया।
लोक अभियोजन अधिकारी  धीरेन्द्रसिंह चैहान ने बताया कि  18 जनवरी 2013
को मुखबिर द्वारा जंगल में शिकार होने की सूचना पर वन परिक्षेत्र मूंदी
के बीट धारीकोटला वन कक्ष क्रमांक 111 में वन तथा  नर्मदानगर थाने के
पुलिस स्टॉफ द्वारा  कक्ष के काकडराय क्षेत्र में 6 व्यक्ति आग जलाकर
खाना बनाते हुये दिखे । घेराबंदी कर पास पहुंचने पर मौके पर 3 आरोपी पकडे
गये ।  3 आरोपी फरार होने में सफल हो गये।  मौके परं पका हुआ मांस रखा
मिला ।
घटना स्थल पर राष्ट्रीय पक्षी मोर के अधजले पंख, सिर, गले की थैली, मोर
के दो पैर जो घुटने के पास से कटे हुये ताजे पाये गये। इसके साथ ही घटना
स्थल पर शिकार हेतु उपयोग में ली गई सामग्री एवं अन्य सामग्री भी पायी
गयी थी। सभी सामग्री  मोर के अवशेष एवं शिकार की सामग्री विधिवत जप्त की
गई ।
मौके पर पकड़े गये तीन आरोपियों ने पूछताछ की गयी। तीन आरोपी फरार होने
में सफल हो गये थे उनके नाम चंदर पिता रणछोड़, इदरीश पिता जीमल, फिरोज
पिता याकूब होना बताया था ।
मौके पर 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर इनके विरूद्ध वन अपराध कायम कर
अनुसंधान पयचात अथियोग पत्र न्यायालय मंे पेश किया था। जप्त मांस व शव
परीक्षण तथा पशु चिकित्सक की सलाह पर एकत्रित मांस जांच हेतु सीनियर
साईटिस भारतीय वन प्रणाली संस्थान देहरादून भिजवाया गया। जहां पर
जप्तशुदा मांस मोर का ही है इसकी पुष्टि फॉरेशिंक जांच रिपोर्ट में की गई
थी।