रंगए सौन्दयर् का अहंकार न करे. साध्वी श्री मोक्षज्योति श्रीजी

7:07 pm or September 25, 2021
रंगए सौन्दयर् का अहंकार न करे. साध्वी श्री मोक्षज्योति श्रीजी
महावीर अग्रवाल
मंदसौर 25 सितम्बर ; अभीतक ;  बाल्यवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हमारे रंगएरूप व सौन्दयर् में कई बार परिवर्तन आता है अथार्त जिस रंग रूप सौन्दयर् की हम सबसे ज्यादा चिंता करते है वह आवश्वत है अस्थायी है जीवन में रंग रूप मिला है उसे वृद्धावस्था के कारण समाप्त होना ही है तो क्यो इसका अभिमान कर अपने को श्रेष्ठ समझते है।
                  उक्त उदगार परम पूज्य जैन साध्वी श्री मोक्षज्योतिश्रीजी मसा ने चैधरी काॅलोनी में स्थित रूपचाॅद आराधना भवन में आयोजित धमर्सभा में कहे। आपने शनिवार को यहाॅ आयोजित धमर्सभा में कहा कि रंग रूप किसी दुघर्टना के कारण खराब हो सकता है बिमारी में शरीर कमजोर लाचार हो सकता है। इसलिये रंग रूप के पीछे पागल मत बनो करना है तो रंग रूप की नही आत्मा के कल्याण की चिंता करो। जैन आगामो में रंग रूप की तुलना वषार् के समय चमकने वाली बिजली व संध्या के समय निकलने वाले इंन्द्रधनुष से की गयी है दोनो कभी भी परमानेट नही होते कुछ समय के लिये होते है और विलुप्त हो जाते है उसी प्रकार रंग रूप सौन्दयर् भी नष्ठ हो जाता है।
              धमर्सभा में साध्वी  आशयज्योतिश्रीजी मसा तीथर्कर भगवानो के नामो का पुरा वृतान्त भी श्रवण करा रहे है। कल उन्होने विमलनाथजी धमर्नाथजी प्रभु का नाम वृतान्त भी श्रवण कराया। धमर्सभा के पूवर् भक्ताम्बर का पाठ किया गया। धमर्सभा के अंत में श्रावक श्राविकाओं ने एकासने उपवास आयम्बिल आदि प्रत्याखान भी लिये धमर्सभा में बडी संख्या में धमार्लुजन उपस्थित थे।