रतलाम के विकास के लिए जब भी जरूरत पड़ेगी, तब पूरा सहयोग दुंगा – राज्यपाल श्री गेहलोत

2:15 pm or September 30, 2021
रतलाम के विकास के लिए जब भी जरूरत पड़ेगी, तब पूरा सहयोग दुंगा - महामहिम राज्यपाल श्री गेहलोत
अरुण त्रिपाठी
रतलाम 30 सितम्बर ;अभी तक;  जीवन में जो भी दायित्व मिले, उसे पुरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वाह किया जाता है, तो तरक्की अवश्य मिलती है। रतलाम में मेरा जो सम्मान हुआ है, उससे मुझे प्रेरणा मिली है कि और अच्छा काम करता रहुं। मैं स्वयं को रतलाम जिले का ऋणी मानता हॅूं। जिले के विकास के लिए जो भी जरूरी होगा, उसमें पुरा सहयोग करूंगा।
               यह उदगार कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल श्री थावरचंद गेहलोत ने व्यक्त किए। बुधवार रात श्री गेहलोत का जेएमडी पैलेस में रतलाम की 25 से अधिक संस्थाओं ने महामहिम राज्यपाल माननीय श्री थावरचंद गेहलोत अभिनंदन समारोह समिति द्वारा आयोजित समारोह में शॉल-श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह आदि भेंट कर सार्वजनिक अभिनंदन किया। समारोह में सांसद गुमानसिंह डामोर, समिति अध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप, विधायक, डॉ. राजेन्द्र पांडेय दिलीप मकवाना, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्रसिह लुनेरा एवं स्वागताध्यक्ष पद्मश्री डॉ. लीला जोशी तथा पूर्व विधायक जितेंद्रसिंह गेहलोत मंचासीन रहे।
                 महामहिम राज्यपाल श्री गेहलोत ने अपने बचपन से लेकर राजनीतिक जीवन एवं उच्चतम स्तर पर सेवा के अवसर प्राप्त होने के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि उन्हें जो भी दायित्व मिला, उसे उन्होंने पुरी कर्तव्य निष्ठा एवं ईमानदारी से निभाया। इससे वे लगातार आगे बढ़ते गए। श्री गेहलोत ने कहा कि देश और दुनिया में आज पर्यावरण, आतंकवाद एवं कोरोना महामारी जैसी कई समस्याएं है, वहीं असमानता का वातावरण बढ़ रहा है। इन सबसे उबरने के लिए समरसता की महती आवश्यकता है। इस दौर में पुरा विश्व भारत से अपेक्षा कर रहा है, क्योंकि हमारे ऋषि-मुनियों ने ‘वासुदेव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिन, सर्वे संतु निरामया’, ‘जियो औ जीने दो’ तथा ‘अहिंसा परमो धर्म’ जैसे प्रेरक उपदेश दिए है। आज ये सारे उपदेश विश्व शांति के लिए जरूरी है। श्री गेहलोत ने आमजन से सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि हमारे संविधान में समता का अधिकार है, पर इससे समरसता नहीं आती। समरसता के लिए अपनत्व और प्रेम की जरूरत है, इसलिए विश्व शांति के लिए सभी अपना-अपना योगदान दें।
                 समिति अध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने समरसता का जो भाव दिया था, उसे भारत की मूल भावना के रूप में महामहिम राज्यपाल श्री गेहलोत ने साकार किया है। श्री गेहलोत के राजनीतिक जीवन की उत्कृष्ट उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए श्री काश्यप ने कहा कि पद के दायित्व का निर्वहन कैसे करना है, इसकी प्रेरणा श्री गेहलोत का जीवन देता है। श्री गेहलोत ने विकलांगों को दिव्यांग नाम देकर जो सम्मान दिया है, भारत के इतिहास में कोई मंत्री ऐसा नहीं कर पाया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के रूप में निःशक्तजन के 10 हजार शिविर लगाकर 20 लाख उपकरणों का वितरण करवाया और गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया है। श्री गेहलोत ने सेवा के क्षेत्र में जो प्रतिमान स्थापित किए है, वे प्रेरणादायी है। कर्नाटक भाग्यशाली है कि उन्हें उनके जैसा व्यक्ति महामहिम राज्यपाल के रूप में मिला है। उनके माध्यम से वहां के शासन को नई दिशा मिलेगी। श्री काश्यप ने कहा कि आज का समारोह उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने देश के सर्वोच्च पद पर सुशोभित होने की शुभकामनाएं दी।
               सांसद श्री गुमानसिंह डामोर ने कहा कि यह पहला अवसर है, कि हम हमारी मिट्टी के लाल को राज्यपाल के रूप में देख रहे है। श्री डामोर ने लोकसभा राज्यसभा में श्री गेहलोत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में अनुशासन देखना और सीखना हो तो श्री गेहलोत से सीखा जा सकता है। वे प्रभु से प्रार्थना करते है कि श्री गेहलोत आज राज्यपाल बने है और भविष्य में देश के सर्वोच्च पद को प्राप्त करें।
              पूर्व गृहमंत्री श्री हिम्मत कोठारी ने कहा कि श्री गेहलोत का राज्यपाल बनना रतलाम ही नहीं पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। वे मजदूर राजनीति से शुरूआत कर शुन्य से शिखर तक पहुंचे है। श्री कोठारी ने स्व. कुशाभाऊ ठाकरे से जुड़ी स्मृतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधायक, मंत्री, सांसद, केन्द्रीय संसदीय बोर्ड आदि कई रूपों में श्री गेहलोत ने कार्य कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उनका जीवन काम करते रहने की प्रेरणा देने वाला है।
              जावरा विधायक डा.श्री राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि जीवन में सभी कुछ ना कुछ करने प्रयास करते है, लेकिन ऐसे लोग विरले ही होते है, जो कुछ प्राप्त करते है। श्री गेहलोत ने चैरेवेति-चैरेवेति के मूल मंत्र को ग्रहण कर घोर परिश्रम किया और विपरीत स्थितियों में भी अपने मूल मंत्र को नहीं छोड़कर हर स्तर पर सफलता प्राप्त की है।
            ग्रामीण विधायक श्री दिलीप मकवाना ने कहा कि महामंत्री राज्यपाल के पद को सुशोभित करने वाले श्री गेहलोत का जीवन प्रेरणादायी है।
             भाजपा जिलाध्यक्ष श्री राजेन्द्रसिंह लुनेरा ने कहा कि पार्टी के जिलाध्यक्ष से लेकर विधायक, मंत्री, सांसद, केन्द्रीय मंत्री और अब राज्यपाल बनकर श्री गेहलोत ने पूरे अंचल का गौरव बढ़ाया है।
                आरंभ में स्वागत भाषण स्वागताध्यक्ष पद्मश्री डॉ. लीला जोशी ने दिया। इस अवसर पर मानव सेवा समिति द्वारा अध्यक्ष मोहन मुरलीवाला, भारतीय जनता पार्टी द्वारा जिलाध्यक्ष राजेन्द्रसिंह लुनेरा, भारतीय मजदूर संघ ने अध्यक्ष चन्द्रशेखर शर्मा, श्री सनातन धर्मसभा ने अध्यक्ष कन्हैयालाल मौर्य, सकल जैन श्रीसंघ द्वारा प्रकाश मूणत, सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा पं. नरेंद्र जोशी, श्री राजपुत समाज द्वारा राजेन्द्रसिंह गोयल, दाउदी बोहरा समाज ने मुल्ला इब्राहिम भाई हांडा, श्री गुरू सिंघ सभा द्वारा गुरनामसिंह डंग, भारतीय सिंधु सभा ने अध्यक्ष आनंद कृष्णानी, बेरवा समाज ने अध्यक्ष प्रेम एन. वासन, मुस्लिम समाज ने शहर काजी अहमद अली, रोटरी क्लब ने अध्यक्ष विमल छाजेड़, लायंस क्लब ने अध्यक्ष विक्की जैन, रतलाम प्रेस क्लब ने अध्यक्ष राजेश जैन, जिला अभिभाषक संघ ने अध्यक्ष अभय शर्मा, चार्टर्ड अकाउण्टेंट एसोसिएशन ने चेयरमेन दीपेन्द्र चौपड़ा, इंडियन एसोसिएशन ने अध्यक्ष डा. विपिन माहेश्वरी, संभागीय उद्योग संघ ने अध्यक्ष आशीष जैन, थोक किराना एवं संयुक्त व्यापारी संघ द्वारा अध्यक्ष मनोज झालानी, सराफा एसोसिएशन ने विनोद मूणत, द ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट एसोसिएशन ने अध्यक्ष सुरेन्द्र चत्तर, क्लाथ मर्चेन्ट एसोसिएशन ने बाबूलाल बोहरा, सज्जन मिल संघर्ष समिति ने अर्जुनलाल नेमावत, क्रीड़ा भारती ने अनुज शर्मा, लघु उद्योग भारती ने मंगल अग्रवाल, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा एवं भाजपा मण्डल अध्यक्ष निलेश गांधी, मयुर पुरोहित, आदित्य डागा, कृष्ण कुमार सोनी, करण धीर्य बड़गोत्या ने श्री गेहलोत का अभिनंदन किया।
               महामहिम राज्यपाल माननीय श्री थावरचंद गेहलोत अभिनंदन समारोह समिति के अभिनंदन पत्र का वाचन डा. मुरलीधर चांदनीवाला ने किया। अध्यक्ष चेतन्य कुमार काश्यप, स्वागताध्यक्ष पद्मश्री डा. लीला जोशी, सदस्य टेम्पटन अंकलेसरिया, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, प्रमोद कुमार व्यास, माधव काकानी, राजेन्द्रसिंह लुनेरा, शैलेन्द्र डागा, बजरंग पुरोहित, प्रेम उपाध्याय, निर्मल लुनिया, मुकेश जैन, केदार अग्रवाल, गुरनामसिंह डंग, डॉ. विपिन माहेश्वरी, राजेश जैन, अभय शर्मा, विनोद मूणत, मनोज झालानी, सुरेन्द्र चत्तर, प्रेम एन. वासन आदि ने श्री गेहलोत का अभिनंदन किया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। आभार समिति सदस्य  निर्मल लुनिया ने माना।