राईस मिलर्स को पाक साफ बताने के लिये आपूर्ति निगम के आला अफसरों की टीम जुटी

आनंद ताम्रकार
बालाघाट ११ नवंबर ;अभी तक; बालाघाट और मण्डला जिले में भण्डारित कस्टम मिंलिग से उपार्जित चांवल की केन्द्र सरकार के खादय मंत्रालय में उपायुक्त श्री विश्वजीत हलघर ने जांच की थी जिसमें प्रदाय किये गये चांवल की क्वालिटी पशु आहार तुल्य पाई गई। भण्डारित चांवल के नमूनों की जांच में प्रदाय किया गया चांवल मानव उपभोग के काबिल नही पाया गया।
                   बालाघाट जिले में की गई जांच में वारासिवनी,बैहर और बालाघाट के 18 राईस मिलर्स द्वारा प्रदाय किये गये चांवल की क्वालिटी पीएफए फीड1 श्रेणी की पाई गई। उसे खादय मंत्रालय के उपायुक्त द्वारा अमानक पाये जाने पर उसको प्रदाय ना किये जाने के निर्देश जारी हुये थे।लेकिन उक्त चांवल प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम के आदेश से राईस मिलर्स को वापस कर दिया गया और उसे 15 दिन के अंदर अपग्रेड करने के आदेश दिये गये।
               18 राईस मिलर्स द्वारा प्रदाय किये गये चंावल जिसे नान इषुबल पाया गया था उसे भी जारी कर दिया चूकी राईस मिलर्स द्वारा एक तयषुदा कमीशन देकर चांवल प्रदाय किया था इस गरज से नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की संलिप्तता होने से राईस मिलर्स पर उनकी मेहरबानी के चलते ना तो कोई कार्यवाही की और उल्टा जो चांवल वापस हुआ उसे अपग्रेड किये बिना ही एक गोदाम से निकालकर दुसरे गोदामों में पहुंचाया गया और कागजों में ही अपग्रेड होना दर्षा दिया गया। जो चांवल मानव उपभोग के काबिल नही था उक्त पशु आहार तुल्य चांवल रेलवे की रेंक में भरकर जिले के बाहर भी भिजवा दिया गया ताकी यह कारगुजारी उजागर ना हो सके।
               वारासिवनी और कटंगी में इस तरह की कारगुजारियां की जा रही है इसके चलते जो चांवल पशु आहार तुल्य पाया गया उसको अपग्रेड किये बिना ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित किये जाने हेतु भेज दिया गया है।
इन विसंगतियों के चलते केन्द्रीय खादय मंत्रालय के उपायुक्त द्वारा की गई कार्यवाही ठंडे बस्ते में डाल दी गई और राईस मिलर्स को पाक साफ बताने के लिये आपूर्ति निगम के आला अफसरों की टीम जुट गई है।
अंततः उपभोक्ताओं को वहीं अन्य किया हुआ पशु आहार तुल्य चांवल का उपभोग करना पडेगा।
अकेला बालाघाट जिले में 47 करोड रूपये का घटिया चांवल पाया गया लगभग 5 हजार लाट चांवल उपार्जित किया गया जिसके लिये प्रति लाट 5 से 7 हजार रूपये का कमीशन अधिकारियों ने वसूला करोड़ों रूपये की यह रकम जिले से लेकर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुचाई गई।
कमीशन का यह खेल अमान्य किये गये चांवल को कागज़ों मे ही अपग्रेड करने की आड में धडल्ले से किया जा रहा है।

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