राम जानकी विवाह के प्रसंग को श्रवण कर भाव विभोर हुए धमार्लुजन

6:59 pm or January 7, 2022
महावीर अग्रवाल
मंदसौर ७ जनवरी ;अभी तक;  संजय गांधी उघान नई आबादी में श्री सुयश रामायण मण्डल के द्वारा श्री रामकथा का आयोजन किया जा रहा  है। परम पूज्य श्री दशरथ भाईजी व्यासपीठ पर विराजित होकर धमार्लुजनो को संगीतमय श्रीराम कथा श्रवण करा रहे है। कल शुक्रवार को पं श्री दशरथभाईजी ने राम जानकी विवाह का प्रसंग श्रवण कराया साथ ही प्रभु रामजी के द्वारा महषिर् गौतम ऋषि के आश्रम मे देवी अहिल्या के उद्वार रामजी का जनकपुर में प्रवेश जनकपुर की पुष्प वाटिका में राम जानकी का प्रवेश एवं सीताजी की जनकपुर के बिदाई का प्रसंग श्रवण कराया। श्रीराम कथा में जैसे ही प्रभु राम व माता सीता के विवाह का प्रसंग पूणर् हुआ । कथा मे राम सीता के जयकारे गुज उठे। पं दशरथभाईजी ने सीता स्वयंवर पर प्रत्यन्शा चडाना कोई सरल कायर् नही था। राम ने जनकपुर  के स्वयंवर में अपनी अदभुत वीरता दिखायी और जिस धनुष को राजा महाराजा हिला नही सकें उस धनुष को उठाकर रामजी ने सीता से विवाह किया। माता सीता ने रामजी के गले में वरमाला डालकर उन्हे पति के रूप में स्वीकार किया। रामकथा में सीता की बिदाई हुई तक उनके का वृतान्त श्रवण कराते हुए कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की बिदाई हुई तब उनके माता पिता ने उन्हे ससुराल में कैसे रहना है इसकी सिखदी प्रत्येक माता पिता को अपनी पुत्री के विवाह के समय ऐसी ही सिख देनी चाहिए। कन्या को ऐसा कोई जिससे ससुराल व मायका होनेके कुल कांलकित हो। माता सीता ने पुरे जीवन अपने माता पिता की सिखा का पालन किया ओर जीवन में कष्ठ सहन करते हुए भी कोई अनुचित कायर् नही किया।
व्यभिचार से बचे.पं दशरथ भाईजी ने कहा कि महषिर् गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या की सुंदरता को देख इन्द्र ने अपना वेश बदलकर व्यभियार किया। इन्द्र के इस कत्य का रामकथा में उल्लेख में मिलता है इस कृत्य के कारण इद्र का सम्मान कम हुआ प्रभु रामजी ने विश्वामित्र की प्रेरणा से गौतम ़ऋषि के आश्रम मं पहुॅचकर शीला बनीदेवी अहिल्या का उ़द्धार किया।
विवाह प्रसंग को श्रवण कर आंनदित हुये धमार्लुजन. पं दशरथभाईजी नेराम जानकी विवाह के समय हुए राजा दशरथ के तीनो अन्य पुत्रो लक्ष्मण भरतए शत्रुधन के विवाह का भी श्रवण कराया। राजा दशरथ के चारो पुत्र संस्कारी थे। कुल की श्रेष्ठता एवं चारो के संस्कारो से राजा जनक जो सीता सहित चार पुत्रियो के पिता थे उन्होने उमिर्ला माण्डवी एवं श्रुमकितीर् का विवाह क्रमश लक्ष्मण भरतए शत्रुधन से किया। अथार्त जो लोग कुल एवं संस्कारो में श्रेष्ठ होते है उनके विवाह में ज्यादा बाधा नही आती है। पुत्री का सुख चाहनेवाले माता पिता स्वयं ऐसे कुल एवं संस्कारवान परिवारो का चयन करते है इसलिये जीवन में श्रेष्ठ आचरण करे।
श्री कृष्णानंदजी का हुआ आगमन. रामकथा के छटे दिवस माॅ बगलामुखी शक्तिपीठ खाचरोद के पीठाधीश्वर श्री कृष्णानंदजी महाराज का आगमन हुआ। उन्होने रामकथा श्रवण की। उसके बाद उहोने धमार्लुजनो को रामकथा के विषय में उदबोधन देते हुए कहा कि राम कथा श्रवण करने वाले धमार्लुजन अपने जीवन में राम कथा से प्रेरणा ले। आपने इस अवसर पर यह भी कहा कि हनुमान चालीसा या संुदर काण्ड का पाठ ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहा प्रभु राम या हनुमान का मंदिर हो हर किसी जगह धमर् उपासना करना लाभकारी नही होता है।
विधायक श्री सिसौदिया ने अपने जन्मदिवस पर संतो से लिया आशीवार्द. राम कथा के छटे दिवस के समापन पर मंदसौर विधायक श्री यशपालसिंह सिसौदिया ने सपत्निक पहुॅचकर राम कथा श्रवण की । शुक्रवार को अपने जन्मदिवस के इस अवसर पर उन्होने  खाचरोद से पधारे श्रीकृष्णनंदजी महाराज व व्यासपीठ से रामकथा का वाचन करने वाले पं दशरथ भाईजी का आशीवार्द प्राप्त किया। इस अवसर पर श्री सुयश रामायण मण्डल के सदस्यो ने विधायक श्री सिसौदिया का माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर रामकथा में भाजपा नेता मुकेश कालाए समाजसेवी नाहरू भाई मेव इंजीए पटवारीगण महेश पाटीदारए प्रवीण व्यासए विकास आचायर्ए समाजसेवी भूपेन्द्र सोनीए पुष्पेन्द्र भावसारए अंबालाल चैहानए गुजर्र गोड ब्राहमण समाज के अखिलेश शमार्ए भगवती प्रसाद शमार्ए अनिल शमार् आदि ने भी पं दशरथ भाई का स्वागत करते हुए रामकथा श्रवण की।
इन्होने लिया पौथी का लाभ. रामकथा के छटे दिवस शुक्रवार को कथा  प्रारंभ के अवसर पर प्रेस क्लब अध्यक्ष ब्रजेश जोशी, श्रमजीवी पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष डाॅ प्रितीपालसिंह राणा, उपाध्यक्ष संजय भाटी, लोकेश पालीवाल, ब्रजेश आयर्, सुरेश भावसार, धमर्वीर रत्नावत आदि ने पौथी पूजन किया। जिला धामिर्क उत्सव समिति द्वारा पौथी पूजन एवं गुरूदेव का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विनोद मेहता ,कन्हैयालाल सोनगरा ,ब्रजेश जोशी, प्रमोद पारिख, रूपनारायण मोदी, राजेन्द्र चाष्ठा  ब्रजेश आयर् रमा माथुर सरोज माथुरए नंदकिशोर राठौर,  राजाराम तंवर, सुभाष गुप्ता , सुरेन्द्र कुमावत, श्रीमती अचर्ना गुप्ता ,आदि ने भी पौथी पूजन का लाभ लिया।