राम व शिव एक दूसरे के पर्याय  है. पं दशरथ भाईजी

6:30 pm or January 4, 2022
महावीर अग्रवाल
मंदसौर ४ जनवरी ;अभी तक;  श्री सुयश रामायण मण्डल जनता काॅलोनी के द्वारा नई आबादी स्थित संजय गांधी उघान में दिनांक 2 जनवरी से
श्री रामकथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन दोपहर 12ण्30 से सांय 5 बजे तक पं श्री दशरथ भाईजी व्यासपीठ पर विराजित होकर धमार्लुजनो श्री रामकथा को श्रवण करा रहे है। राम कथा श्रवण  का धमर्लाभ प्राप्त कर रहे है। मंगलवार को श्रीराम कथा के तृतीय दिवस श्री दशरथभाई ने राम व शिव के परस्पर संबंधो  शिव  पावर्ति विवाह के बाद हुए देव दानव युद्ध व ताराकासुर के वध की कथा को विस्तार से श्रवण कराया। रामकथा में पं दशरथभाईजी ने प्रभु श्री राम व भगवान शिव को एक दूसरे का पुरक बताते हुएकहा कि शिव व राम एक दूसरे के प्रयार्य है जो शिव भक्त राम की उपासना करता है या जो राम भक्त शिव की उपासना करता है तो उसे दोनो की ही कृपा प्राप्त होती है। रावण से युद्ध के पूवर् लंका जाते समय प्रभु श्रीराम ने रामेश्वर में शिवलिंग कथापित कर उसकी पूजा की शिव के आशीवार्द से ही राम ने बलशाली वैभवशाली लंका नरेश रावण को पराजित किया। जो व्यक्ति दोनो को अलग अलग मानकर दोनो में से एक की निंदा व दूसरे की स्तुती करता है वही कभी भी दोनो मेसे किसी एक ही कृपा का पात्र नही बन जाता है। शिव पावर्ति को विवाह के पूवर् भगवान विष्णु से संवादा किया और जगत के कल्याण के लिये पार्वती संग विवाह किया।
माता पिता गुरू एवं प्रभु की आज्ञा मानो. पं दशरथ भाईजी ने रामकथा में कहा कि माता पिता गुरू व प्रभु की आज्ञा का पालन करने में सदैव शुभ ही होता है। क्योकि ये सभी आपका कल्याण एवं मंगल चाहते है। इसलिये जो भी आज्ञा इन चारो से मिले उस पर ज्यादा विचार करने की जरूरत नही है। उस आज्ञा का पालन करना ही चाहिए।
कठिन तप से ही प्रभु कृपा मिलती है.पं दशरथभाई जी ने कहा कि पावर्ति के मन में जब शिव से विवाह की इच्छा जग्रत हुई तो शिव ने पावर्ति की कठिन परिक्षाये ली। पावर्ति ने कई वषोर् तक अन्न का त्याग किया और केवल शिव उपासना में ध्यान लगाया तब जाकर शिव प्रसन्न हुये और पावर्ति की शिव के रूप में पति की प्राप्ति हुई अथार्त कठिन तप से ही प्रभु कृपा मिलती है। इसलिये कठिन तपक रने से नही घबराये नही।
भगवान कुल नही समपर्ण देखते है. पं दशरथजी ने कहा कि श्रीराम कथा में तुलसीदासजी ने केवट सबरी विभिषण सहित कई ऐसे पात्रो का वणर्न किया है जहा का कुल श्रेष्ठ नही था । केवट गंगा नदी में नाव चलाने वाला व्यक्ति था। शबरी वन में रहनेवाली साधारण स्त्री थी विभिषण असुर कुल में जन्मा रावण का भाई था। लेकिन राम ने सभी से मित्रवर व्यवहार किया। राम ने वनगमन मेंयह उनके सामथ्र को बढाने वाले पात्र बने अथार्त कुल की श्रेष्ठता आपने नही रखती है केवल प्रभु के प्रति समपर्ण महत्व रखता है।इसलिये आप अपने को प्रभु भक्ति में समपिर्त करे। श्रीकृष्ण ने भी दुयोर्धन के 56 प्रकार के पकवानो का त्याग कर विदुर के आतिथ्य को स्वीकार किया था।
इन्होने लिया पौथी का लाभ. रामकथा के तृतीय दिवस पूवर् जिला भाजपा नेता अध्यक्ष मदनलाल राठौर  मप्र कांग्रेस कमेटी महासचिव महेन्द्रसिंह गुजर्र,  जिला कांग्रेस महामंत्री मनजीतसिंह मनी, मण्डी व्यापारी जय कुमावत ,समाजसेवी दिनेश सेठिया, लक्ष्मीनारायण कोठारी ,भवरसिंह ठाकुर, राकेश आचायर् मुकेश सोलंकी जावद , बालकृष्ण दवे, सुरजमल अग्रवाल चाचाजी ,मनीष भावसार, मांगीलाल श्यामसुंदर पुरोहित सेमलियाहिरा दिनेश अध्यापक आदि ने रामचरित मानस की पौथी का पूजन किया।