राशन के साथ आयुष्मान कार्ड का प्रयास विफल

 भिंड से डॉक्टर रवि शर्मा
 भिंड ८ जून ;अभी तक; गरीबों के इलाके में केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना कब शुरू की पर इसे गंभीरता से काम नहीं हो पा रहा है नतीजा यह है कई बार अभियान चलाने के बाद ही कार्ड बनाने का आंकड़ा एक तिहाई से भी कम रह जाता है हैरानी की बात तो यह है कि प्रशासन ने मुफ्त राशन बांटने के साथ साथ इन कार्डों को बनवाने का प्रयास किया पर वह भी सफल नहीं हो सका । अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों के अभियान में जिले भर में 500 कार्ड भी नहीं बन पा जिले में करीबन 8 1000 गंभीर बीमारी के लिए आयुष्मान कार्ड की पात्रता है परंतु डॉक्टरों का कहना है और चिकित्सा अधिकारियों का कहना है आसमान कार्ड धारक का कोई इलाज नहीं होता हम सरकारी लोग इलाज नहीं करते पूनम दवाइयां दिलवा सकते यह कहना है वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी पैकेज के पीए का जिला चिकित्सालय भिंड के सिविल सर्जन अनिल गोयल के पीएम ने तो यह एक पैकेज आयुष्मान के तहत दिया गया है परंतु रोगी कल्याण समिति में पैसे ही नहीं इलाज के लिए पैसा दे सकें यह साफ तौर पर अनिल जैन जो सिविल सर्जन की अकाउंट शाखा देखते हैं और पूरा जिले का रोगी कल्याण समिति का पैसा एकत्रित का जमा कराते हैं आयुष्मान और प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के आदेशों को दिखाया गया तो उन्होंने साफ तौर पर कह दिया रोगी कल्याण समिति पर पैसा नहीं है भीख मांगने के लिए भी आप तो रेट को उससे कलेक्टर से दिखा लाओ वह रेड क्रॉस से कोई साथ दिलवा देंगे रोगी कल्याण समिति तो कंगाल हो गई है भिंड की जब आए तब सही कहा कि प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया हेल्थ मिनिस्टर ऑफ इंडिया चीफ मिनिस्टर ऑफ मध्य प्रदेश प्रिंसिपल हेल्थ सेक्रेट्री स्थानीय सांसद स्थानीय विधायक के पत्रों को बलाए ताक पर रखते हुए कह रहे हैं अनिल गोयल का कहना है मेरे पास पैसा नहीं है जिन नेताओं के लेटर पैड पर रोगी का उपचार करा सकें बताओ इतनी हिम्मत है एक सिविल सर्जन सेकंड क्लास ऑफिसर एनेस्थीसिया जो गली गली नर्सिंग होम के चक्कर लगाता है सिर्फ ₹1000 के लिए एक कॉल पर नर्सिंग होम में उपस्थित हो जाता है उस व्यक्ति को यह नहीं पता कि सिविल सर्जन के कितने पावर होते हैं मैं तो यह जानते हैं की ऑपरेशन के दौरान भी उसी का इंजेक्शन लगाने के लिए रीड की हड्डी में इंजेक्शन लगाना है लगाया हजार रुपए जेब में डाले और चलते बने हो गया काम ऐसे ही 10 बार 12 केस मिल जाते हैं प्रतिदिन नर्सिंग होम ओर से ऐसी मठाधीश में वोट डाल दिया गया है जो उस पद की एबीसीडी नहीं जान देश के प्रधानमंत्री प्रदेश के मुख्यमंत्री देश के स्वास्थ्य मंत्री प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री क्षेत्रीय सांसद क्षेत्रीय विधायक एक मरीज का उपचार कराने के लिए लिख रहा है 1 साल हुए परंतु उपलब्ध नहीं हो पाएगी हां कायाकल्प के दौरान इन महाशय ने करोड़ों रुपए साज-सज्जा में खर्च कर दिए परंतु नतीजा निकला मिल पहला स्थान पाने के लिए करोड़ों में लगाई आग श्री वीरा जिला चिकित्सालय भिंड फिसड्डी ओपीडी का तो यह हाल है सभी डॉक्टर्स के चेंबर दिखाई देती है क तो सिर्फ कुर्सी खाली डॉक्टर भाई जिला चिकित्सालय खुला मरीज परिसर में ढूंढते हैं व्हाट्सएप कहां है कह दिया जाता है उसी में होंगे साहब के पास बैठे होंगे एयरटेल रहे होंगेरा सकें