*रेल्वे फाटक पर सेल्फी लेने वाले अभियुक्तगण की जमानत निरस्त*

महावीर अग्रवाल
मंदसौर / उज्जैन  ८ अक्टूबर ;अभी तक;  न्यायालय श्रीमान राजेश नामदेव, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला उज्जैन के न्यायालय द्वारा अभियुक्तगण 01. दीपक पिता बालकिशन, 02. जीतू उर्फ जितेन्द्र पिता मनोहर 03. मोनू पिता ओमप्रकाश, 04 देवेन्द्र पिता प्रकाश, निवासीगण- उज्जैन का जमानत आवेदन निरस्त किया गया।
                       अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी/पैरवीकर्ता श्री मुकेश कुमार कुन्हारे ने बताया कि फरियादी धनंजय कुमार पिता लालबिहारी ने थाना चिमनगंजमण्डी पर रिपोर्ट लेखबद्ध कराई कि मैं रेल्वे लेवल क्रॉसिंग 32 उण्डासा माधवपुर उज्जैन में गेटमेन के पद पर कार्यरत् हूॅ, आज दिनांक 04.10.2020 को मैं रेल्वे लेवल क्रॉसिंग 32 उंडासा माधवपुर पर मेरी ड्यूटी थी, मुझे स्टेशन मास्टर ने गेट बंद करने की सूचना दी तो मैने शाम 04ः28 बजे क्रॉसिंग का रेल्वे गेट बंद कर दिया था। फिर शाम करीबन 04ः35 बजे चार व्यक्ति आये व आपस में अपने नाम दीपक, मोनू, जीतू व एक अपना नाम नहीं बता रहा था। फाटक पर चढने लगे और बोले की हमे सेल्फी लेना ह,ै तो मैने उन्हें फाटक पर चढ़ने से मना किया और कहा कि फाटक टूट जायेगा। इसी बात पर सभी ने मुझे मॉ-बहन की नंगी-नंगी अश्लील गालियां दी और मेरे साथ झूमाझटकी की। मैं केबिन में जाकर घटना की सूचना स्टेशन मास्टर पिंग्लेश्वर एस.आर कनोजिया को करने गया तो ये लोग केबिन में अंदर आ गये, वहां पर केबिन में झूमाझटकी की और टेलीफोन व डिब्बा तोड़ दिया, जिससे संचार व्यवस्था बंद हो गई। इन लोगों द्वारा मेरे शासकीय ड्यूटी के दौरान मेरे साथ गालिया देकर और झूमाझटकी कर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की गई और टेलीफोन तोडकर नुकसान किया। घटना की जानकारी राजकिशोर व अरूण कुमार को भी मालूम है, इन लोगों ने बीच-बचाव किया, तब अभियुक्तगण जाते-जाते बोले की आईन्दा रेल्वे फाटक पर चढ़ने से मना किया तो जान खत्म कर देगे।
                     पुलिस थाना चिमनगंजमण्डी द्वारा फरियादी की रिपोर्ट पर प्रथम सूचना रिपोर्ट  लेखबद्ध की गई व अभियुक्तगण को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था।
                     अभियुक्तगण द्वारा न्यायालय में जमानत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया। न्यायालय में अभियोजन की ओर तर्क किये कि अभियुक्तगण द्वारा रेल्वे फाटक पर सेल्फी ली जा रही थी, इस प्रकार स्वंय की एवं आमजन की जान जोखिम में डाल रहे थे। न्यायालय द्वारा अभियोजन के तर्को से सहमत होकर अभियुक्तगण का जमानत आवेदन निरस्त किया गया।

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