लोकायुक्त टीम ने संभागीय कार्यपालन यंत्री पीयूष अग्रवाल को रिश्वत लेते हुए पकड़ा

2:28 pm or August 6, 2022
मयंक शर्मा
खंडवा ६ अगस्त ;अभी तक;   लोकायुक्त टीम ने यहां पीआईयू के संभागीय कार्यपालन यंत्री पीयूष अग्रवाल को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। रिश्वतखोर अफसर ने ऑफिस पहुंचते ही ठेकेदार से अटके भुगतान बिलों को पास कराने के एवज में 50 हजार रुपए ले
लिए। जैसे ही ठेकेदार पीआईयू ऑफिस से बाहर निकला तो लोकायुक्त टीम ने दबिश दे दी। अफसर की जेब में हाथ डाले तो रिश्वत के 50 हजार रुपए निकले।
                 लोकायुक्त डीएसपी प्रवीण कुमार बघेल ने बताया कि गुरूवार को दी गयी  सफल दविश के बाद आरोपी अफसर को रेस्ट हाउस लेकर गये  जहां कार्रवाई विािवत पूरी की। गयी।उन्होने बताया  कि खंडवा निवासी नितिन मिश्रा ने पीडब्ल्यूडी से संबंधित पीआईयू (परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी) के संभागीय कार्यपालन यंत्री पीयूष अग्रवाल की शिकायत की थी। इंदौर लोकायुक्त कार्यालय पर 3 अगस्त को हुई शिकायत में आवेदक नितिन मिश्रा ने बताया उसकी कंसल्टेंसी फर्म है। पीआईयू का कंसल्टेंसी, डीपीआर तथा सुपरविज़न कार्य किया था, जिसका विभाग के पास 5 लाख का बिल पेंडिंग था, जिसके लिए आरोपी बिल का भुगतान नहीं कर रहा था।
                   शिकायतकर्ता ठेकेदार नितिन मिश्रा का आरोप  है कि उसकी कंसल्टेंसी है, पीआईयू पर करीब 5 लाख रुपए का बकाया है। जिसकी राशि के भुगतान के लिए मेरे से 50 हजार रुपए रिश्वत मांगी गई। वैसे तो हम लोग 2 फीसदी: कमीशन देते ही है।, मुख्य अधिकारी को 2ःफीसदी कमीशन देने का रिश्वती नियम ठेकेदारों द्वारा बनाया गया है।  जिसकी शिकायत लोकायुक्त
में की थी।
               शिकायत आधार पर  श्री बधेल व उनकी  टीम  4 अगस्त को लोकायुक्त खंडवा पहुंची। आवेदक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह कन्फर्म हुआ कि संबंधित अफसर द्वारा रिश्वत की डिमांड की गई है। 5 अगस्त को आवेदक नितिन मिश्रा ने 50 हजार रुपए रिश्वत पीआईयू ऑफिस में आरोपी  पीयूष अग्रवाल को दी,  उसे रंगे हाथें दबोच  लिया। अफसर की पेंट के जेब में हाथ डालकर रिश्वत के रुपए निकाले, पूरी राशि 50 हजार रुपए थी। पुलिस लाइन स्थित पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस में लोकायुक्त ने कार्रवाई पूरी की।
               पीयूष अग्रवाल परियोजना क्रियान्वयन ईकाई में संभागीय कार्यपालन यंत्री है। यह संस्था लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी के अधीन रहती है। जिसके बाद सरकारी ईमारतों के निर्माण का जिम्मा है। लोक निर्माण विभाग के किसी सीनियर इंजीनियर को ही पीआईयू का सुप्रीडेंट बनाया जाता है। पीयूष अग्रवाल का दो साल बाद उनका रिटायरमेंट होने वाला था।

 

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