लोक सम्पदा के उत्सव मड़ई आज भाई दूज के साथ शुरू पर कोरोना ने परोसी सन्नाटे जैसी दृश्याबली

7:52 pm or November 16, 2020
लोक सम्पदा के उत्सव मड़ई आज भाई दूज के साथ शुरू पर कोरोना ने परोसा सन्नाटे जैसी दृश्याबली
मंडला से सलिल राय
मण्डला १६ नवंबर ;अभी तक;  मध्यप्रदेश के जनजाति बहुलता की सरज़मी मण्डला में लोक संस्कृति की परम्परा में तीज तेव्हार मेला मड़ई के प्रति समाज के हर वर्ग इसे मनाने में गहरी रुचि रखता हैं मण्डला जिले में दिवाली पर्व के दूसरे दिन भाई दूज पर्व से मण्डला मुख्यालय में मड़ई भरने या लगने की शुरआत होती जो लगभग होली पर्व तक मड़ई मेला के रूप में जिले के रहवासियों के लिए जबरजस्त आकर्षण का रुझान जिले में देखने को मिलता रहा हैं।पर इस बीच आज मण्डला में कोरोना संक्रमण के बचाब के मद्देनजर प्रशासन की गाइड लाइन ने जिले में सांकेतिक मड़ई भरने या लगाने की व्यवस्था ने मण्डला मड़ई लगी राजराजेश्वरी मंदिर के मैदान में जहां चंडी स्थापित तो हुई पर न बड़ी दुकाने लगी न खेल तमासे न अन्य मनोरंजन के पंडाल लगे ।
मड़ई मेला में अहीर समाज की सहभागिता मड़ई की जान कहि जाती हैं ग्वाल वंश अपनी पारम्परिक भेषभूषा जब धारण कर विभिन्न वाद्य यंत्रों सुर ताल में जब थिरक उठते है तो देखने वालों के चेहरे खिल उठते है रंगबिरंगी पोषक जिसमे कौंडियो को गाय की पूंछ के बालों से गूंथ कर सुंदर आकृति दी जाती हैं वही पैरों में पहने आभूषण हाथ मे बांसुरी तो कोई लाठी तो कोई फरसा धारण कर जब ये नृत्य करते तब देखने वाले बड़े गर्व से इनका आत्मिक अभिवादन करते वही ग्वाल अपनी टोली के साथ उस परिवार के लिए सुख सम्रद्धि की कामना करते हुये अपना आशीर्वाद देते है यह परम्परा अनादी काल से चल रही हैं पर इस बीच कोरोना महामारी ने अपनी छाप से मड़ई उत्सव पर ब्रेक लगा दिया हैं।
मण्डला जिले की इस सांस्कृतिक परम्परा का एक पहलू यह भी हैं वह यह हैं कि वनवासी गांवो के रहवासियों में उनके गांव या अन्य स्थानों में लगने वाली मड़ई भरने के समय मे रोजगार के लिए प्रवास में गये प्रवासियों में मड़ई घूमने का इतना आकर्षण रहता है कि वह जहाँ काम करता वह उसे छोड़कर अपने घर गांव पहुचकर मड़ई घूमने की बिलकुल चूक नही करता चाहे जैसी स्थिति परिस्थिति क्यो न हो मड़ई घूमने आता ही हैं। यही नही जिस गांव में मड़ई भरती हैं उस गांव के घरों में खूब मेहमान आते है ।
गांवो के घरों को इस मौके में विशेष साफ सफाई और  पकवानों की थाली परिवार और मेहमानो को परोसी जाती हैं।
वही इन मड़ई में लघु व्यपारियो को अच्छा खासा व्यपार करने का मौका मिलता हैं वही खेल तमासे झूला वालो के रोजगार को इस बार कोविड 19 ने ब्रेक लगा दिया हैं जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसबार असर है।
मड़ई में चंडी स्थापना का बड़ा महत्व हैं चूंकि मण्डला जिले में मण्डला मड़ई जिले की पहली मड़ई होती हैं इस मड़ई में जो चंडी लाई जाती हैं वह बांस से बनाई जाती हैं इसके बारे चंडी स्थापित करने वाले परिवार के बुजुर्ग मुखिया घनश्याम पंडा ने चंडी के बारे में बतलाया कि यह चंडी जो बांस के सहारे बनाई जाती इसकी आकृति मीनार जैसी होती हैं इसे बनाने के लिए नदी के जल के अंदर से एक विशेष कन्द निकाला जाता जिसे बदुआ कन्द कहा जाता हैं इसे छीलकर चंडी के बांसों में लगाया जाता हैं साथ ही गेंदा पुष्प के साथ चंडी के ऊपरी सिरा में मोर पंख लगाकर सजाया जाता हैं चंडी में माता चंडी का वास रहता हैं साथ ही गांगो दाई की शक्ति इसमें विराजित होने की मान्यता के चलते  यह भी आस्था मड़ई घूमने वालो के एक बहुत बड़े वर्ग की यह रहती हैं कि चावल के दानों से चण्डी की यदि परिक्रमा की जाती हैं तो परिक्रमा करने वाले परिवार को अदृश्य हानि पहुचाने वाली शक्तियों से परिवार आने वाली आपदाओं से बचाव होता हैं।
जैसा कि जाना गया हैं कि अहीर नर्तक दल अपने गांवो से जब नृत्य गायन करते मड़ई में चण्डी की परिक्रमा करते है।इसके बाद वे अपने परिचितो के घर आँगन में जाकर उस परिवार को अपने आशीष वचन से परिवार की कुशल छेम का आशीर्वाद देते है।
मण्डला मड़ई समय परिस्थितियों के चलते स्थान परिवर्तन में आज भी चल रही हैं।जो दो साल पीछे स्टेडियम में लगती थी वह अब राजराजेश्वरी मंदिर में स्थान पाई हैं।
वार्ड पार्षद रशिम नेकेश्वर ने इस मड़ई भरने वाले स्थान में रुचि लेकर निर्धारित कोरोना बचाब उपायो के साथ अच्छा प्रबंधन किया वही मड़ई स्थान परिवर्तन से अनभिग्य लोग स्टेडियम में मड़ई को तलाशते रहे।
कोरोना संकट के मद्देनजर जिला प्रशासन ने जिले में मड़ई लगाने के लिए जारी गाइड लाइन में जो कहा गया हैं वह इस तरह हैं।
कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए मड़ई मेलों का आयोजन सांकेतिक रूप से किया जाएगा। मड़ई मेलों में झूला एवं सर्कस प्रतिबंधित रहेंगे।
इस संबंध में अपर कलेक्टर मीना मसराम ने बताया कि त्यौहार एवं मड़ई मेले के संबंध में जिला स्तरीय संकट प्रबंधन समूह की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार इस वर्ष मड़ई मेले का आयोजन सांकेतिक रूप से ही किया जाएगा। मड़ई मेला स्थलों पर झूला, सर्कस सहित अन्य भीड़ बढ़ाने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। उन्होंने बताया कि मड़ई मेले में बाहर से नृतक दल एवं अन्य व्यक्तियों को मनोरंजक कार्यक्रमों के लिए नहीं बुलाया जा सकेगा। मड़ई मेले में मॉस्क लगाना एवं सोशल डिस्टेसिंग का पालन किया जाना आवश्यक होगा। त्यौहार में जिले से बाहर गए व्यक्ति दीपावली त्यौहार मनाने वापस घर आएंगे जिससे संक्रमण की स्थिति बढ़ने की आशंका है। इस संबंध में बाहर से आए व्यक्तियों का कोविड सेम्पल लेने एवं नतीजा आने तक घर में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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