वन्य प्राणियों के लिए जंगल में ही होगा पेयजल का इंतजाम

 महावीर अग्रवाल
 मन्दसौर ५ अक्टूबर ;अभी तक;  मंदसौर के वरिष्ठ विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया की पहल पर मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने वन्य क्षेत्र में वन्य प्राणियों के लिए नरेगा के तहत तालाब निर्माण कराए जाने की योजना को हरी झंडी दे दी है। अब कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसकी अनुमति देगी और तत्काल पंचायत के माध्यम से मनरेगा के तहत निर्माण कराया जा सकेगा ।
             दरअसल  2 सितंबर को भोपाल में आयोजित याचिका समिति की बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित साक्ष्य हेतु  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव आए थे । उन्हें बैठक के बाद वरिष्ठ विधायक श्री सिसोदिया ने अनौपचारिक चर्चा के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय की ओर ध्यान दिलाया ।
               इस पर उन्होंने वन विभाग की अनुमति की बाध्यता बताई और तत्काल ही इस महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया और वन विभाग के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल के संयुक्त हस्ताक्षर से आज इसके आदेश भी प्रसारित करते हुए सभी जिलों के कलेक्टर , वन विभाग समेत नरेगा के अधिकारियों को भी अवगत कराया। जिसके तहत अब वन्य क्षेत्रों में निवास करने वाले पशु,पक्षियों के लिए अब मनरेगा के तहत जंगल में ही पेयजल हेतु तालाबों का निर्माण किया जाएगा ताकि वन्य प्राणियों को पेयजल की तलाश में इधर-उधर ना भटकना पड़े। क्योंकि अभी  जंगल क्षेत्रों में निवास करने वाले वन्यजीवों को जंगल में पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते अब आए दिन जंगली पशु पानी की तलाश में आबादी क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं जिसके कारण मानव जीवन को भी खतरा उत्पन्न हो रहा है।  इसीलिए विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने जंगल मे पशु,पक्षियों के लिये तालाब निर्माण करवाए जाने की  पहल की, जिसमे अब वन्य क्षेत्रों में पशु पक्षियों के लिए जल संरचनाओं का निर्माण होगा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा के तहत यह निर्माण कर आएगा।
                श्री सिसोदिया के अनुरोध पर शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टर अधिकारियों तथा मनरेगा के अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए कहां की क्षेत्रों में महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों का चयन स्थानीय आवश्यकता के साथ-साथ वन मंडल की कार्य योजना के प्रावधानों को ध्यान में रखकर वन विभाग के समन्वय से रिज टू दिल्ली के वैज्ञानिक सिद्धांत के आधार पर जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा कार्यों के चयन हेतु परंपरागत तकनीकी सर्वेक्षण के साथ-साथ रिमोट सेंसिंग डाटा और जीआईएस रखने का अनिवार्यता का उपयोग किया जाएगा इसके लिए वन विभाग की अनुमति का इंतजार नहीं करना होगा बल्कि कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित की गई जिला स्तरीय समिति वन्य क्षेत्रों में मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधन निर्माण किए जाने की अनुमति प्रदान कर सकेगी।
                श्री सिसोदिया ने कहा कि मंदसौर विधानसभा क्षेत्र के रेवास देवड़ा के वन्य क्षेत्र हैं जहां वन्य जीव भी निवास करते हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद वन परिक्षेत्र में  प्राकृतिक जल संसाधनों का निर्माण किए जाने की अनुमति दिए जाने के बाद इन क्षेत्रों में भी मनरेगा के तहत वन्यजीवों के लिए जंगल में ही जल संरचनाएं तालाब निर्माण किए जा सकेंगे।
श्री सिसोदिया ने बताया कि जहां एक और वन क्षेत्र में तालाबों के निर्माण से वन्य प्राणियों को पेयजल भी मिलेगा, वही तालाबों के निर्माण से वाटर लेवल भी बढ़ेगा और उस जलस्तर के बढ़ने से किसानों के कुआं में तथा ट्यूबवेलों में पानी का जलस्तर भी बढ़ पाएगा।