विधायक सिसोदिया के सुझाव को मुख्यमंत्री ने स्वीकारा ,मुख्यमंत्री बाल पेंशन योजना का नाम बदलेगा

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ३१ मई ;अभी तक;  सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने प्रदेश भर में कोरोना की स्थिति को लेकर वीसी के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ चर्चा की जिसमें मंदसौर के वरिष्ठ विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने कोरोना में अनाथ हुए बच्चों को सहायता देने के लिए प्रारम्भ की गई मुख्यमंत्री बाल पेंशन योजना का नाम परिवर्तित करने का सुझाव दिया जिसे सीएम ने तत्काल स्वीकारा और आश्वस्त किया कि यह सुझाव महत्वपूर्ण है इस पर विचार कर योजना का नाम बदला जाऐगा।
        वीसी में लोकप्रिय वरिष्ठ विधायक श्री सिसोदिया ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने मुख्यमंत्री बाल पेंशन योजना को प्रारम्भ किया है । यह महत्वपूर्ण योजना पूरे देश में एक माॅडल बनी है और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसकी सराहना की है। परन्तु जो बच्चें अपने माता-पिता को कोरोना में खोकर अनाथ हो चूके है वे मानसिक रूप से भी टूट चूके है उन्हें संबल की आवश्यकता है ऐसे में उन्हें बचपन से पेंशन के नाम से सहायता देने से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचेगी इसलिए इस योजना का नाम बदलकर ऐसा किया जाऐ ताकी बच्चें का बाल मन आहत ना हो।
           श्री सिसोदिया ने यह भी कहा कि योजना का नाम वात्सल्य, ममतामई या इस तरह का कोई और भी नाम हो सकता है ताकी बच्चों को बाल्यकाल में ऐसा ना लगे कि अब उनका कोई नहीं है इसलिए सरकार से उन्हें पेंशन मिल रहीं है। सरकार ने इस योजना को अनाथ हुए बच्चों के अभिभावक बनकर लागु की है इस योजना से लाभांवित होने वाले बच्चें अनाथ नहीं है बल्कि प्रदेश की सरकार उनकी अभिभावक है, सरकार उनकी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही उनके अध्ययन ओर आजीविका तक की चिंता करेगी।
            श्री सिसोदिया के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने इसकी सहमती दी और स्पष्ट कहा कि इस महत्वपूर्ण सुझाव पर विचार कर योजना का नाम बदला जाऐगा। उल्लेखनिय है कि बिते दिनों श्री सिसोदिया ने अनाथ हुए बच्चों की सहायता के नाम पर होने वाली फोटोग्राफी को भी आपदा प्रबंधन समिति में निर्णय कराकर बंद कराया था । उन्होंने आव्हान किया था कि इन बच्चों की भरपूर मदद की जाऐ लेकिन उस मदद की फोटोग्रामी कर बच्चों के मन को आहत ना किया जाऐ।