शासकिय उपक्रमो को बेचने की आंच मंदसौर संसदीय क्षेत्र तक पहुंची-श्री भाटी

महावीर अग्रवाल 

मंदसौर ८ सितम्बर ;अभी तक; प्रत्येक लोकसभा चुनाव मेें नयागांव स्थित सीसीआई सीमेन्ट फेक्टी को पुनः चालु करने एवं रोजगार देने का मामला प्रमुखता से राजनैतिक अभियान एवं चुनाव प्रचार का माध्यम रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने इसे घोषणा पत्र में लेते हुये फैक्टी को चालु करने का दावा किया था किन्तु देश में शासकिय उपक्रमो को बेचने की आंच अब मंदसौर संसदीय क्षेत्र में भी महसुस हो रही है। सीसीआई फैक्टी को बेचने की प्रकिया शुरू हो गयी है, वर्तमान में लगभग एक हजार करोड से अधिक मूल्य की फैक्टी को मात्र दौ सो करोड में बेचने की तैयारी में केन्द्र सरकार है किन्तु उसके बावजुद मंदसौर संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री सुधीर गुप्ता एवं मंत्री श्री ओमप्रकाश सकलेचा पुरे मामले में मौन धारण किये हुये है।

यह बात जिला कांग्रेस प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष श्री सुरेश भाटी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही। उन्होनें नीमच जिला इंटक अध्यक्ष श्री भगत वर्मा द्वारा उठाये गये मामले पर प्रकाश डालते हुये कहा कि सूचना के अधिकार द्वारा प्राप्त जानकारी जो कि दशपुर एक्सप्रेस नीमच के संस्करण में प्रकाशित खबर के अनुसार 26 शासकिय उपक्रमो को मोदी सरकार बेचना चाहती है। नीमच की सीसीआई ( सीमेन्ट काॅपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड) भी इसमें शामिल है। सीसीआई को बेचने के लिये 2 मार्च 2019 को दशपुर एक्सप्रेस में विज्ञप्ति प्रकाशित हुई थी। पुनः 7 सितम्बर 2020 के नीमच से प्रकाशित दशपुर एक्सप्रेस में बेचे जाने वाले उघोगो में सीसीआई का नाम शामिल है।
श्री भाटी ने सीसीआई को बेचने के लिये की गयी प्रक्रिया पर गंभीर बताते हुये कहा कि सन 1976 में निर्मित इस फैक्टी की लागत लगभग 460 करोड के आसपास थी। सन 1990 में इस फैक्टी को वीपीसिंह सरकार के समय बंद कर दिया गया। इसके उपरांत फैक्टी को लेकर के विभिन्न स्तरो पर प्रयास हुये किन्तु संसदीय क्षेत्र में लंबे समय से भाजपा जनप्रतिनिधियो के रहने के चलते पुनः फैक्टी चालु नही हो पायी। इस फैक्टी की लगभग 400 हेक्टेयर जमीन नयागांव एवं 160 हेक्टेयर जमीन गांव खेडा राठौर में है। स्थानीय स्तर पर जमीन से निकलने वाला पत्थर एशिया में सवश्रेष्ठ माना जाता है जिससे बेहतरिन किस्म की सीमेन्ट तैयार होती है। बडी मात्रा में अंचल संपत्ति एवं अन्य परिस्थितियो के चलते इस फैक्टी की लागत ही वर्तमान में एक हजार करोड से अधिक की है किन्तु उसके बावजुद सरकार निजी उघोगपतियो से हाथ मिलाकर मात्र इसे 200 करोड में बेचना चाहती है।
श्री भाटी ने कहा कि सरकार उन ही उपक्रमो को बेचने में अधिक रूचि ले रही है जिस पर उघोगपतियो की नजर है और जिनकी कृपा भाजपा पर लगातार बनी हुई है। सरकार एवं उनके जनप्रतिनिधि उघोगपतियो के हाथो की कठपुतली बनते जा रहे है जिसके प्रत्यक्ष उदाहरण क्षेत्रीय सांसद एवं जावद क्षेत्र के मंत्री है। उन्होेनें इस पुरे मामले से पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथजी एवं पूर्व सांसद सुश्री नटराजन को अवगत कराते हुये सीसीआई बचाने के लिये पहल करने का आग्रह किया है

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