शास्त्रों के अनुसार संतान प्राप्ति के बाद ही सद्गति मिलती है -चैतन्यानन्दगिरीजी

7:42 pm or July 19, 2022

महावीर अग्रवाल

मंदसौर १९ जुलाई ;अभी तक;  नगर के खानपुरा स्थित श्री केशव सत्संग भवन में संत श्री चैतन्यानन्दगिरीजी मसा का दिव्य चातुर्मास चल रहा है। इस हेतु प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से 10.00 बजे तक प्रवचन हो रहे है। प्रवचनों में संत श्री द्वारा श्रीमद् देवी भवगती महापुराण का वाचन किया जा रहा है जिसका श्रवण करने के लिए लिए बडी संख्या में श्रद्धालु सत्संग भवन पहुंच रहे है।

                      19 जुलाई मंगलवार को धर्मसभा में चैतन्यानन्दगिरीजी महाराज साहब ने देवी भगवती महापुराण का वाचन करते हुए बताया कि हिन्दू सनातनी धर्म के सभी पुराणों और ग्रंथों में संतान उत्तपत्ति के बाद ही मनुष्य की मृत्यु उपरांत सद्गति को प्राप्त होना बताया। संत श्री ने कहा कि कोई भी मनुष्य तभी परलोक की प्राप्ति कर सकता है जब उसकी संतान हो। ऐसा ही एक वृतांत श्रीमद देवी भगवती महापुराण में आता है। धर्मसभा में चैतन्यानन्दगिरीजी महाराज साहब ने बताया कि वेदव्यास जी जो 18 पुराणों के रचयिता थे उन्हें यह भय सताने लगा कि उनकी कोई संतान नहीं है कोई पुत्र नहीं है तो फिर वे कैसे परलोक की प्राप्ति करगे कैसे सद्गति में जायेगे क्योंकि शास्त्रों में लिखा है जिसकी संतान नहीं होती वह दुर्गति को प्राप्त होता है। इसी वजह से महान ऋषि वेदव्यास जी दुखी और चिंतित रहने लगे। ऐसे में एक दिन महा़़ऋषि नारद जी उनके पास पहुंचते है और पूछते है कि वेदव्यास जी आप ऋषि है फिर इतने चिंतित क्यों रहते है। तब वेदव्यास जी अपनी दुविधा महाऋषि नारद को बताई तब नारदमुनि ने उन्हें जगदम्बिका की आराधाना करने को कहा।

धर्मसभा में संत श्री ने श्रीमद देवी भगवती महापुराण का कई वृतांतों का श्रवण श्रोताओं को करवाया वहीं बताया कि अकारण सोये हुए व्यक्ति को जगाने में ब्रम्हहत्या का दोष लगता है किसी को भी अकारण नहीं निंद से नहीं जगाना चाहिए।  आज संत श्री द्वारा मधुकेवट राक्षस की उत्पत्ति कैसे हुई और नारायण भगवान ने किस प्रकार उनका वध किया यह वृत्तांत आज वाचन किया जायेगा। धर्मसभा के अंत मंे भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारी गई जिसके पश्चात् प्रसादी का वितरण किया गया।
धर्मसभा में जगदीश चंद्र सेठिया, कारूलाल सोनी, पं.शिवनारायण शर्मा, आरसी पंवार, आरसी पांडे, कन्हैयालाल राईसिंघानी, शंकरलाल सोनी, घनश्याम भावसार, नवीनशंकर शास्त्री, प्रद्युमन शर्मा, मदनकुमार गेहलोत आदि उपस्थित थे।