शिक्षा विभाग में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक,  सरकार को झटका

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर १९ नवंबर ;अभी तक;  स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण दिये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण देने पर रोक लगा दी है। युगलपीठ ने अपने आदेश में 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण देने के निर्देश जारी किये है।

राजस्थान निवासी याचिकाकर्ता प्रवल प्रताप सिंह सहित अन्य 11 की तरफ से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने आधा दर्जन याचिकाओं में प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने पर रोक लगा रखी है। हाईकोर्ट ने रोक हटाने के आवेदन को खारिज करते हुए याचिकों पर अंतिम सुनवाई निर्धारित की है। इसके बावजूद भी प्रदेश सरकार द्वारा उच्च माध्यमिक शिक्षक पद के चयन में 27 ओबीसी आरक्षण तथा 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया गया है।

याचिकाकर्ता की तरफ कहा गया था कि सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता के अभिमत का हवाला देते हुए एक सर्कुलर जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट ने जिन प्रकरणों में रोक लगा रखी है उनके अलावा अन्य विभाग में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू किया जा सकता है। इस सर्कुलर के आधार पर लोक शिक्षण आयुक्त ने उच्च माध्यमिक शिक्षक पद के चयन में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू कर अंतिम चयन सूची जारी कर दी है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि इंदिरा साहनी व मराठा आरक्षण संबंधित याचिकाओं में सर्वोच्च न्यायालय का स्पस्ष्ट आदेश है कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत तथा ईडब्ल्यूएस आरक्षण 10 प्रतिशत लागू किये जाने के कारण कुल आरक्षण 73 प्रतिशत हो जायेगा। इसके अलावा जातिगत आरक्षण का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। सरकार द्वारा पूर्व में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर लगी रोक को हटाने के लिए आवेदन दायर किया था। हाईकोर्ट ने सरकार के आवेदन को खारिज करते हुए याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के निर्देश दिये थे।
याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने अन्य याचिका के साथ उक्त याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए 6 दिसम्बर को प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है।