शिक्षिका श्रीमती ललिता सिसोदिया ने ग्रामीणों की मदद से बनाए 8000 से अधिक सिड्सबाल

5:46 pm or July 19, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १९ जुलाई ;अभी तक;  कहते हैं कि जल जंगल जीव जननी जनक पंचमेश को जो सम्मान प्रदान करता उसे ईश्वर का सदैव आशीर्वाद मिलता है और उसका जीवन आनंद मय रहता हैं। हमारे भगवान देवाधिदेव महादेव कि बात करें तो बाबा भोलेनाथ भी प्रकृति के संरक्षक हैं। उन्होंने नंदी (बैल) नाग आदि जीव जंतुओं को साथ रखकर कर जंगल में निवास किया। बाबा भोलेनाथ पर्यावरण संरक्षण वाले देव होने तथा उनको श्रावण मास बहुत प्रिय है। ऐसे में बाबा शिव भोलेनाथ कि भक्त जीवों पर दया भाव रखते हुए पर्यावरण का संरक्षण कर श्रावण मास में पूजा अभिषेक करते हैं। उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
                         सनातन धर्म एवं शिक्षा संस्कार के इस भाव को लेकर जिले की आदर्श शिक्षिका श्रीमती ललिता सिसौदिया ने जंगल में झाड़ियों एवं गड्ढों में सिडबाल फेके साथ ही उन्होंने आक्याबिका की गौशाला में पौधे लगाते हुए संदेश दिया कि अगर पेड़ पौधे ही नहीं रहेंगे तो पृथ्वी का संतुलन कैसे बनेगा, कैसे मानसूनी हवाएं आएंगी और कैसे हमें ऑक्सीजन मिलेगी। पेड़ पौधे से ही तो मनुष्य का जीवन है, पेड़ पौधों की राह तोत भरी ठंडी हवाओ से मनुष्यों को शांति एवं राहत मिलती हैं। साथ ही पेड़ पौधे पर्यावरण की रक्षा करते हैं तथा अनेकों अनेक प्रकार के प्रदूषण को रोकने में सहायक होते हैं। पेड़ पौधे से मिलने वाली ऑक्सीजन एवं राहत भरी हवाओं से मनुष्य के शरीर में एनर्जी एवं इम्यूनिटी का संचार होता है, जो कि कोरोना जैसी भयानक बीमारी से बचाने में सहायक होती है हाल ही में आप देख चुके हो कि पेड़ पौधों का हमारे जीवन में कितना महत्व है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वे कम से कम 5 पौधे लगाएं एवं आजीवन उनकी रक्षा करें एवं उन्हें बड़ा होने तक उनकी देखभाल  करें उन्हें समय समय पर खाद एवं पानी दे यही मनुष्य जीवन के सहायक है। तथा यही हमारे स्वास्थ्य का भी रहस्य है पेड़ पौधे से ही भूमि का कटाव रुकता है अनावश्यक एवं अत्यधिक बारिश के कारण जो पानी बहकर जाता है उससे व्यर्थ ही भूमि कट कट कर कम होती जा रही है यही प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का नतीजा है इसलिए प्रकृति का दोहन रोकिए पेड़ पौधों की संख्या बढ़ाए  इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को हम पेड़ पौधों के रूप में एक उपहार दे सकें।
इस अवसर पर श्री बापूलाल पाटीदार, श्री भागिरथ पाटीदार, श्रीमती मानकुंवर सरवानिया, कृष्णपाल सिंह सरवानिया एवं शांति बाई आदी उपस्थित रहे।