श्रीमद् भागवत कथा में शंकराचार्य श्री ज्ञानानंदजी तीर्थ का हुआ आगमन, व्यसनों से दूर रहने तथा प्रकृति से जुड़ने की दी सिख

महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर  २७ दिसंबर ;अभी तक;  श्री माहेश्वरी धर्मशाला में  रविवार से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भानपुरा पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य श्री ज्ञानानंदजी तीर्थ का आगमन हुआ। शंकराचार्यजी ने श्रीमद् भागवत पौथी का पूजन कर व्यासपीठ पर विराजित डॉ. देवेन्द्र शास्त्री का स्वागत कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
                        श्रीमद् भागवत कथा में शंकराचार्यजी ने कहा कि ज्ञान व भक्ति दोनांे ईश्वर की प्राप्ति के साधन है। श्रीमद् भागवत ज्ञान व भक्ति दोनों को प्रदान करेने वाला अमृत हैजो भी इसका रसपान करता है उसे ईश्वर की शरण मिलती है। आपने कहा कि जो पदार्थ सेवन करने व गृहण करने योग्य है उसे ग्रहण करे जो पदार्थ छोड़ने योग्य है उसका त्याग करे। तभी जीवन में खुशहाली आयेगी। आपने शराब एंव अन्य व्यसनों के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शराब का सेवन स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डालता है इसलिये इसका सेवन कदापि नहीं करे। आपे कहा कि जब से हम प्रकृति से दूर हुवे है हमारी स्वास्थ्य समस्यायें बढ़ी है। मिटटी, लकड़ी एवं ताम्बे पीतल के बर्तनों से घर रहता था ेकि इनका स्थान अब स्टील के बर्तनो ने ले लिया है। इसके कारण भी स्वास्थ्य समस्यायें बढ़ी है। आपने कहा कि शरीर के बाहरी आवरण को स्वस्थ करने की बजाय अंदर की पवित्रता को साफ रखे। अर्थात शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे। आयोजन समिति व यजमान परिवार द्वारा शंकराचार्य का स्वागत किया गया तथा उन्हें बालाजी का चित्र भेंट किया गया।