श्रीराम कथा का हुआ समापन, कथा समापन पर श्री सुयश रामायण मण्डल ने पं दशरथभाईजी सहित कई व्यक्तियों का किया सम्मान

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ८ जनवरी ;अभी तक;  शनिवार को संजय गांधी उघान नई आबादी में सात दिवसीय श्रीराम कथा का समापन हुआ। कथा समापन के अवसर पर व्यासपीठ पर विराजित होकर सात दिवस तक श्रीराम कथा का रसपान कराने वाले पं श्री दशरथभाईजी का सम्मान किया गया। श्री सुयश रामायण मण्डल जनता काॅलोनी के सदस्यो ने पं श्री दशरथ भाईजी का शाल श्रीफल भेटकर सम्मान किया। 18 वषोर् से श्री सुयश रामायण मण्डल जनता काॅलोनी के द्वारा प्रतिवषर् दिसम्बर जनवरी माह में भागवत या राम कथा का आयोजन जनसहयोग से किया जाता है। इसी परम्परा के अनुरूप इस वषर् भी दिनांक 2 जनवरी से दिनांक 8 जनवरी तक सात दिवसीय श्रीराम कथा आयोजित की हुई। कथा के समापन के अवसर पर पं दशरथभाईजी ने साथ ही संगीतमय श्रीराम कथा के संगीत कायर् करने वाले संगीतकारो एवं सात दिवसीय कथा में प्रतिदिन देवी देवताओ की पूजा अचर्ना का कायर्करने वाले ब्राहमणो का भी सम्मान किया गया।
श्रीरामकथा के अंतिम दिवस शानिवार को पं श्री दशरथभाईजी ने राम सीता व लक्ष्मणजी के वन गमन केवट प्रसंग रामजी व भरत मिलाप सीता जी का हरण राम सुग्रीव मित्रता हनुमान द्वारा लंका दहन राम रावण संग्राम राम की लंका विजय एवं अयोध्या आगमन की कथा श्रवण करायी। रामकथा के अंतिम दिवस कथा श्रवण करने वाले बडी संख्या में धमार्लुजन संजय गांधी पहुचे। दोपहर 12ण्30 से सांय 5ण्30 तक पं दशरथभाईजी  ने सीता स्वयंर के बाद कीपुरी कथा श्रवण करायी। आपने कथा में कहा कि कैकयी ने राजा दशरथ से रामजी का वनवास व भरत का राज्यभिषेक की मांग की पुरी अयोध्या नगरी के विश्वास को खण्डित कर दिया । अपनी दासी मंथरा के कहने पर कैकयी ने जो कमर् किया उसके बाद कैकयी को कभी अयोध्यावासियो ने सम्मान नही दिया अथार्त जो भी सत्री हट करके कोई अनुचित कायर् करा लेती है तो वह पुरे परिवार व समाज में प्रतिष्ठा गंवा देती है। राम जो अपनी माता कौशल्या के समान माता कैकयी को सम्मान देते थे उसने केवल स्वाथर्की खातिर जो कमर् किया वह रघुकुल की प्रतिष्ठा की धुमिल करने वाला कृत्य था।
राम ने केवटए शबरी सभी को सम्मान दिया. रामकथा में पं दशरथभाईजी भाईजी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का पुरा जीवन आदशोर् की प्रतिमुतिर् है। उन्होने नाव चलाने वाले नाविक केवट को गले लगाया । वन में रहने वाली शबरी का आतिथ्य स्वीकार कर उसके झुठे बैर खाये। रामजी ने वन गमन में ऐसे वगर् में जुडने का कायर् किया जो कि अपेक्षित था। जाति एवं कमर् में जो लोग साधारण थे उन्हे भी महत्व दिया। रामजी का जीवन चरित्र हमे सिख देता है कि हम किसी को छोटा नही समझे।
मित्रता निभाना रामजी से सिखे. पं दशरथभाईजी ने कहा कि सीता हरण के बाद रामजी ने लंका पर विजय पाने के लिये सुग्रीव जो कि वानो के समूह से बहिकृत हो चुका था उसे उसका सम्मान लोटाया उसे उसके भाई बली के आंतक से मुक्त किया।उसी प्रकार लंका से निकाले के बाद विभिषण से सच्ची मित्रता की ओर लंका विजय के बाद उसे लंका राजा बनाया। रामजी से मित्रता निभाने का गुण सभी को सिखना चाहिए।
भाई हो तो लक्ष्मण एवं भरत जैसे. पं दशरथभाईजी ने कहा कि केवल राम ही नही रामजी के दोनो भाई भरत व लक्ष्मण का चरित्र भी प्रेरणादायी है। लक्ष्मण ने अपने भाई रामजी की सेवा के लिये 14 वषर् का वनवास लिया। भरतजी ने राज्य मिलने पर भी उस राज्य को अपना राज्य को अपना नही मानकर भाई की अमानत माना और 14 वषर् तक उनके प्रतिनिधी के रूप में आयोध्या पर राज किया। राम के दोनो भाई भरत व लक्ष्मण का चरित्र सभी भाईयो के लिये प्रेरणादायी है।
स्त्रियो सीताजी से प्रेरणा ले. पं दशरथभाईजी ने कहा कि 14 वषर् तक अपने पति की सेवा के लिये वन में रहना सीता ने स्वीकार किया। वन के कठोर कष्ठोको सहन किया। लंका में भी सीता ने निभिर्क होकर रावण के अनुचित प्रस्तावो को अस्वीकार किया। सीता को उसके माता पिता के द्वारा बिदाई के समय सिख दी गयी थी उसका उसने जीवन भर पालन किया। सीता जी का चरित्र प्रेरणादायी है।
हनुमान से सिखे समपर्ण भावना. रामकथा को सुदरकाण्ड की कथा सुनाते हुए आपने कहा कि रामकथा में हनुमानजी का चरित्र ऐसा पात्र है जिससे सीाी को प्रेरणा लेना चाहिए। हनुमान ने लंका विजय में महत्वपूणर् योगदान दिया। माता सीता की खोज की ओर सीता को राजी का संदेश दिया। लक्ष्मणजी के धायल होने पर संजीवनी लेकर आये । हनुमान ने राम रावण संग्राम में अदभुत वीरता दिखायी। उसके बावजुद भी
इन्होने लिया पौथी का लाभ. कथा समापन के अवसर पर भाजपा किसान मोचार् राष्टीय उपाध्यक्ष बंशीलाल गुजर्र, पूवर् भाजपा जिलाध्यक्ष मानसिंह माच्छोपुरिया, कारूलाल सोनी ने भी रामकथा श्रवण कर पं दशरथभाई जी का स्वागत किया व आशीवार्द प्राप्त किया। रामकथा के अंतिम दिवस शनिवार को कथा प्रारंभ के अवसर पर पत्रकारगण उमेश नेक्स, अनिल जोशी, रमेश माली , अजयसिंह तोमर ,शेख जफर शेख, ओकारसिंह, धमेर्न्द्रसिंह रानेरा, गौरव मुजावदिया, राजेन्द्र देवडा, पुष्पकर दईया , मम्मा शाह आदि ने पौथी पूजन का लाभ लिया। इस अवसर भेरूलाल शमार्, दिलीप कुमार सोनी नाहरगढ वाले, सुमित फरक्या ,जगदीश फरक्या पिपलियामण्डी, समाजसेवी रमेशचंद्र चंद्रे, ललित भारद्वाज, महेश नागर आदि ने भी पौथी पूजन में सहभागीता की। इस अवसर पर हरीकथा आयोजन समिति के नाहरूभाई मेव ,सत्यनारायण छपरवाल ,मनोहर लालवानी गोपी अग्रवालए ,नरेन्द्र अग्रवाल, राजेन्द्र चाष्टा, रमाशंकर शमार्ए ,किशन लालवानी आदि ने भी पौथी पूजन कर पं दशरथभाई जी से आशीवार्द प्राप्त किया।