श्री प्रेमप्रकाश आश्रम में नववर्ष 2022 का प्रारंभ सत्संग के माध्यम से  हे जीव कर्म कर फल की चिन्ता मत कर- महर्षि सर्वानन्द महाराज

8:37 pm or January 1, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर एक जनवरी ;अभी तक;  सत्संग एवं नाम की स्मृति में आपका मन लगे व नया वर्ष मनुष्य के जीवन में अपार खुशियां लेकर आये ऐसी प्रार्थना एवं आशीर्वचनों का संदेश श्री प्रेमप्रकाश पंथ के पंचम पिठाध्वेश्वर ने सतगुरू स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज द्वारा देवभूमि हरिद्वार से प्राप्त का ऑनलाईन अमृत वचनों की बरखा के साथ द्वितीय पिठाध्वेश्वर महर्षि सतगुरू स्वामी सर्वानन्दजी महाराज के मुखारविंद के सत्संग का वीडियो प्रवचन सुनकर संगत मंत्र मुक्त हो गई।
               इस आशय की जानकारी देते हुए प्रेमप्रकाश सेवा मण्डली के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शिवानी ने बताया कि स्वामी सर्वानन्दजी ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सद्कर्म करना चाहिए लेकिन वो अनावश्यक कार्यों में लगा रहता है। मनुष्य का बचपन खेल में चला जाता है। युवावस्था में बुरी आदतों में चला जाता है। आपने कहा कि अगर आप मान सम्मान चाहते है तो पहले मान सम्मान देना सीखो, अगर जीना चाहते हो तो मरना सीखो। आपको अपने जीवन में निष्ठा भाव रखकर मेरा-मेरा सबकुछ मेरा कहने को त्यागों। मन को धर्मभाव में लगाकर सद्गुरू का नाम स्मरण करो। उससे आपको आत्मशान्ति प्राप्त होगी। त्याग व त्याग की भावना रखो, उसमें आपका उद्धार है। मेरा-मेरा सब मेरे की भावना को त्यागकर ईश्वर व गुरू के चरणों में समर्पण करो। कर्म करो, फल की चिन्ता मत करो। चौरासी के चक्कर को त्यागकर अपने मानव जीवन को सफल करने के लिये कर्म करो।
                   आज अंग्रेजी नये वर्ष संयोग से गुरू सतगुरू स्वामी टेऊँरामजी महाराज का अवतार दिवस होने से गुरू प्रार्थना व जन्मसाखी का पाठ किया गया।
                  श्रीमती दिव्या-नारायण शिवानी एवं रेखा-हरिश उत्तवानी द्वारा रखे गये। श्री प्रेमप्रकाश ग्रंथ के पूर्ण होने पर दादी पुष्पा पमनानी ने अपने श्रीमुख से ग्रन्थ के अन्तिम अध्याय में शांति के दोहों का उच्चारण कर पाठ सम्पन्न किया। प्रारंभ में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, भगवान श्री झूलेलाल, सतगुरू टेऊँरामजी महाराज, सतगुरू सर्वानन्दजी महाराज, सतगुरू शांतिप्रकाशजी महाराज, सतगुरू हरिदासरामजी महाराज की महाआरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
              इस  पावन अवसर पर दृष्टानन्द नैनवानी, पं. विनोद शर्मा, राम कोटवानी, प्रमोद ककनानी, मोहनदास फतनानी, नन्दू आडवानी, वासु सेवानी, मनोहरलाल नैनवानी, हरिश उत्तवानी, दयाराम जैसवानी, सुरेश बाबानी, प्रितम खैमानी, पुरूषोत्तम खैमानी, किशन लालवानी, भगवानदास आसवानी, राजकुमार लालवानी, चन्दीराम चन्दानी, सुन्दरदास आसवानी, दिनेश सेवानी, दिनेश रामचन्दानी, नरेश फतनानी आदि ने श्री प्रेमप्रकाश ग्रन्थ साहिब पर भोग का चादर (रूमाल) चढ़ाकर गुरू दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।
                 खुशनुमा व धार्मिक भावनाओं के साथ महिलाओं व पुरूषों ने श्रद्धा व समर्पण भावना के साथ गुरू दरबार में शीश झूकाकर मत्था टेका तो वहीं छोटों ने बड़ो की चरणवन्दना के साथ गले मिलकर नववर्ष की बधाई दी जिस पर बड़ों ने आशीर्वाद दिया। अंत में आभार प्रदर्शन दयाराम जैसवानी ने प्रकट किया।