श्री माहेश्वरी धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में प्रभु श्री कृष्ण का जन्म वृतान्त श्रवण कर भाव विभोर हुए धर्मालुजन, प्रभु श्री कृष्ण के जन्म पर धर्मालुजनों ने किया नृत्य

8:07 pm or December 29, 2021
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर २९ दिसंबर ;अभी तक;  दिनांक 26 दिसम्बर से श्री माहेश्वरी धर्मशाला मंदसौर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री महेशचन्द्र शर्मा व श्री अशोक शर्मा परिवार के द्वारा श्री नारायण भक्ति संघ के सहयोग से किया जा रहा है। श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस बुधवार को भागवताचार्य, ज्योतिषाचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री धारियाखेड़ी ने धर्मालुजनों को श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण का जन्म वृतान्त श्रवण कराया। आपने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण के जन्म के पूर्व पूरे आर्यावृत्त की स्थिति दयनीय थी। मथुरा नरेश कंस व उसके ससुर मगध नरेश जरासंघ के कारण पूरे आर्यावृत्त के साधु संत ब्राह्मणों एवं स्त्रियों की स्थिति दयनीय थी। कंस ने अपने पिता उग्रसेनजी को राजगद्दी से हटाकर कारागार में डाल दिया था। कंस, जरासंघ एवं उसके सहयोगी राजा प्रजा पर बहुत अधिक अत्याचार करते थे। पुरा आर्यावृत्त इनके कारण भयभीत था। स्त्रियों का सम्मान घट गया था। साधु संतों के यज्ञ में बाधायें डाली जाने लगेी थी। विद्वान एवं व्यापारी आर्यावृत्त से पलायन करने पर मजबूर हो गये थे। ऐस विकट समय में प्रभु श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागृह में माता देवकी व वासुदेव के यहां हुआ। उनके जन्म लेते ही बंद पड़े। कारागृह के दरवाजे खुल गये और वासुदेव ने नन्हें बालक कृष्ण को मथुरा के समीप बहने वाली यमुदा नदी पारकर  उसे ब्रज भूमि पर निवास करने वाले अपने मित्र नंद व यशोदा के यहां पहुंचाया।
डॉ. देवेन्द्र शास्त्री ने श्रीमद् भागवत कथा में बताये गये भगवान श्री कृष्ण के जन्म वृतान्त का श्रवण कराया। पूरे कथा पाण्डाल में हर्ष व उत्साह का ऐसा वातावरण निर्मित हो गया कि धर्मालुजन भावविभोर होकर नृत्य करने लगे। श्रीमद् भागवत में बताये गये श्री कृष्ण के वृतान्त को सुन्दर स्वरूप देने के लिये कृष्ण जैसे बाल गोपाल नन्हें बालक को कथा पाण्डाल में लाया गया। पूरे कथा पाण्डाल में कृष्ण के जयकारे गुंज उठे। धर्मालुजनों ने भावविभोर होकर नन्हें बालक कृष्ण का स्वागत किया। धर्मालुजनों के समक्ष जैसे ही कृष्ण जन्म का वृतान्त पूर्ण हुआ, धर्मालुजन भाव विभोर होकर कृष्ण की भक्ति में नृत्य करने लगे। जनप्रतिनिधिगण, आयोजन समिति पदाधिकारी व यजमान परिवार के सदस्यों ने कृष्ण जन्मोत्सव पर जमकर नृत्य किया और कृष्ण जन्म की खुशियां मनाया। कथा पाण्डाल में जैसे ही भगवान कृष्ण के  पिता वासुदेव ने बाल स्वरूप में कृष्ण को अपने टोकरी में बिठाकर कथा पाण्डाल में प्रवेश किया। कृष्ण रूपी बालक के दर्शन की होड़ लग गयी। डॉ. शास्त्रीजी ने भी कृष्णरूपी बालक को गोद में लेकर कृष्ण भक्ति में अपने को समर्पित किया। इसके बाद उन्होंने जन्मोत्सव पर सभी धर्मालुजनों पर मिष्ठान व अन्य पदार्थ उछालकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
कृष्ण के भजनों से गुंज उठा पाण्डाल- आचार्य डॉ. शास्त्री ने संगीतमय भागवत कथा श्रवण कराते हुए कई सुमधुर भक्ति गीत (भजनों) की भी प्रस्तुती दी। नंद के आनंद भयो- जय कन्हैयालाल की एवं अन्य कई भक्ति गीतों को श्रवरण कर धर्मालुजन कथा पाण्डाल में भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। डॉ. शास्त्री ने कृष्ण की भक्ति के ऐसे ऐसे भजन गाये कि पूरा कथा पाण्डाल कृष्णमय हो गया।
जब जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है ईश्वर भक्तों की रक्षा के लिये जन्म लेते है- आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में भगवान विष्णु के कई अवतारों की कथाये है भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर जब जब अपने भक्तों को संकट में देखा है उनकी रक्षा के लिये उन्होनंे जन्म लिया है। प्रभु राम, प्रभु नरसिंह एवं कई अवतारों की कथायें सर्वविदित है। भगवान विष्णु  ने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिये नरसिंह अवतार लेकर असुरों का संहार किया। राम अवतार लेकर लंका नरेश रावण को पराजित किया। वामन अवतार लेकर दो पग में पुरी सृष्टि नाप ली।