संतरे की खेती पर सरकार के प्रयासों को लेकर सांसद गुप्ता ने लोकसभा में किया प्रश्न

महावीर अग्रवाल

मंदसौर २४ सितम्बर ;अभी तक; सांसद सुधीर गुप्ता ने लोकसभा में संतरे की खेती पर सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को लेकर ध्यानाकर्षण किया। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि देश में संतरा उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं। देश में संतरे के उत्पादन में गिरावट आ रही है यदि ऐसा है तो इसके क्या कारण है। सरकार द्वारा संतरा उत्पादक राज्यों में संतरे की अधिक उपज और भंडारण के लिए कोई तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की है यदि ऐसा है तो उसका ब्यूरो क्या है। साथ ही सरकार ने देश में संतरे के उत्पादक किसानों के लिए अभी तक क्या प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं और इसकी खेती करने वाले शीर्ष राज्यों तथा वहां पर होने वाली नारंगी खेती के अंतर्गत शामिल भूमि क्षेत्र का ब्यूरो क्या है।

प्रश्न के जवाब में कृषि किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि संतरा उत्पादन में शामिल प्रमुख राज्यों में मध्यप्रदेश, पंजाब महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा शामिल है जहां कुल भूमि 2019-20 के अनुसार देश में 4.79  लाख हेक्टेयर में संतरे की खेती की जाती है। देश में संतरे की खेती में कोई गिरावट नहीं आई है। अखिल भारतीय उत्पादन के अनुसार 2017-18 में 51, 2018.19 में 62.43 एवं 2019-20 में 63.97 लाखटन की पैदावार हुई है । उन्होंने बताया कि केंद्र प्रायोजित योजना समेकित बागवानी विकास मिशन को फल सब्जी और मूल फसलों, मशरूम, मसाले, फूल सुगंधित पौधंे, नारियल, काजू और कोकोआ को कवर करने वाले बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए वर्ष 2014-15 से कार्य किया जा रहा है।

एमडीएच के तहत सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया है। मिशन के तहत फल और सब्जियां सहित बागवानी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता सुधार की परिकल्पना है और इसके तहत सहायता प्रदान की जाती है। इस मिशन के अंतर्गत फसलोंपरांत प्रबंधन सहित बागवानी के विकास से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को करने के लिए सहायता भी प्रदान की जाती है। पैक हाउस, प्री कूलिंग यूनिट शीत भंडारण, मोबाइल प्री कॉलिंग यूनिट, पकाने वाले चेंबर, वाष्पीकरण सौर ऊर्जा सीट चेंबर, कम लागत प्याज भंडारण ढांचा की स्थापना सहित फसलों प्रबंधन के साथ के लिए परियोजना की पूंजीगत लागत के 35 प्रतिशत की दर से  सामान्य क्षेत्रों के लिए और 50 प्रतिशत की दर से पहाड़ी और जनजाति क्षेत्रों के लिए सब्सिडी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्यमों के लिए उपलब्ध है।

इसी के साथ ही आईसीएआर केंद्रीय सीट्स अनुसंधान संस्थान नागपुर ने जानकारी दी है कि इसमें विभिन्न प्रोद्योगिकी आधारित कार्यक्रमों के विस्तार/स्थानांतरण के अंतर्गत पूरे देश में ज्यादा से ज्यादा 42,634 सीट्स उत्पादकों और 2494 अधिकारियों को अब तक प्रशिक्षित किया है। पिछले 5 वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर और हिमालय क्षेत्र के लिए प्रगति मिशन के अंतर्गत केंद्र ने कुल 20 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के 8 राज्य कवर है। जहां संबंधित राज्य सरकार के अधिकारियों और फील्ड कार्यकर्ताओं को रोगमुक्त रोपण सामग्री का उत्पादन और सीट्स पुनरुद्धार पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

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