संत श्री जयमलजी मसा आदिठाणा 6 के स्वाध्याय भवन में रहे प्रवचन

महावीर अग्रवाल
मंदसौर  ३० दिसंबर ;अभी तक;  संत श्री जयमलमुनिजी महाराज आदिठाणा 6 इंदौर से विहार मंदसौर पधारे है। श्री जयमुनिजी मसा की स्थिरता नई आबादी शास्त्री काॅलोनी स्थित जैन दिवाकर स्वाघ्याय भवन में है। संत दिनांक 1 जनवरी तक यही विराजेगे उनके प्रवचन प्रतिदिन प्रात 9ण्30से 10ण्30 बजे तक हो रहे है। गुरूवार को अपने धमर्सभा में कहा कि अतित की चिंता छोडे तथा भविष्य पर चचार् करे पुरूषाथर् के बल पर हम भविष्य को अच्छा पर चचार् करे पुरूषाथर् के बल पर हम भविष्य को अच्छा बन सकते है। आपने कहा कि दूसरो की आलोचना करने में से अपना समय व्यथर् नही करना चाहिए तथा अपना समय धमर् आराधना में लगना चाहिए। धमर् के कायर् में जब युवा जुटते है तो धमर् की प्रभावना बढती ही है। आपने कहा कि दुख का कारण पाप कमर् ही है। इसलिये जीवन में पापकमर् से बचे।
                श्री आदिशमुनिजी ने कहा कि सभी मानव सुख चाहते है मोक्ष की कामना धन वैभव कमाने का उददेश्य भी सुख ही है। मानव सुख की तालाश में भटकता है। सुख की आस में कई कमर् करता है। क्या हमें सुख मिला यह विचार करे। धमर् की शरण में बिना सुख नही है। जितनी दौडभाग हम धन के लिये करते है उसमें थोडी कम भी यिद हम धमर् के लिये करेगे तो सुखी रहेगे। स्वगर् की कामना में दुखी रहने से अच्छा है हम अपने को पृथ्वी लोक पर ही सुखी बनाने का प्रयास करे। आपने कहा कि क्रोध मानव जीवन का सबसे बडा कयास है। हम उसे जितने का प्रयास करे का्रेध जब अपने पर कोई दूसरा कता है तो वुरा लगता है तो हम करेगे तो तो वही बुरा होगा। धमर्सभा का संचालन अशोक उकावत ने किया।