सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते नक्षत्र पौधे

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर  ३ जनवरी ;अभी तक;  भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों द्वारा वैदिक परंपरा के अनुसार पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पेड़ पौधों की पूजा अर्चना पर विशेष बल प्रदान किया गया है l पीपल के संदर्भ में तो यह भी कहा गया है,
“मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।
पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।”
                       पेड़ पौधे औषधि के रूप में लाभकारी होने के साथ साथ सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र भी होते हैं है l भारतीय संस्कृति में नक्षत्रो और पेड़-पौधों का गहरा रिश्ता माना गया और प्राचीन आचार्यों द्वारा 27 नक्षत्रों की पहचान की गई थी प्रत्येक नक्षत्र के निर्धारित वृक्ष होते है और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नक्षत्रों का प्रभाव हमारे स्वास्थ्य एवं भविष्य पर पड़ता है। इन्हें नियंत्रित करने के लिए कुछ विशेष पौधों का रोपण,पोषण व सरंक्षण लाभदायक माना गया है जैसे  (अश्विनी नक्षत्र) कुचला, (भरणि नक्षत्र) आंवला , (कृतिका नक्षत्र) गूलर , (रोहिणी नक्षत्र) जामुन ,  ( मृगशिरा नक्षत्र) खैर, (आर्द्रा नक्षत्र) शीशम,  (पुनर्वसु नक्षत्र) बांस, (पुष्य नक्षत्र) पीपल,  (आश्लेषा नक्षत्र) नागकेसर,  (मघा नक्षत्र) बरगद,  (पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र) पलाश,  (उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र) पाकड़,  (हस्त नक्षत्र) रीठा,  (चित्रा नक्षत्र) बेल,  (स्वाति नक्षत्र) अर्जुन,  (बिसाखा नक्षत्र) केवङा,  (अनुराधा नक्षत्र) मौलश्री,  (ज्येष्ठा नक्षत्र) चीड़,  (मूल नक्षत्र) शाल,  (पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र) अशोक,  (उत्तरासाढ़ा नक्षत्र) कटहल,  (श्रवण नक्षत्र) आक ,  (धनिष्ठा नक्षत्र) शमी,  (शतभिषक नक्षत्र) कदंब,  (पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र) आम,  (उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र) नीम, (रेवती नक्षत्र) महुआ के पेड़
                     नक्षत्र संबंधी परेशानियां हो तो संबंधित नक्षत्र के वृक्ष पर जल अर्पण करके पूजा की जाती है यहां पूजा से तात्पर्य कर्मकांड से नहीं बल्कि पूजन से मतलब पौधा रोपण, जल अर्पण, पोषण और संरक्षण से है, हमें अपने नक्षत्र संबंधित वृक्षों को बगीचों,घर के आसपास धार्मिक स्थलों पर रोपित करना चाहिए ताकि ग्रह शांति के लिए यज्ञ कार्यों के लिए लोगों को सही एवं शुद्ध सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सके l
मान्यता अनुसार विभिन्न नक्षत्रों की स्थिति का हमारे ऊपर अनुकूल और प्रतिकूल दोनों तरह के प्रभाव होते हैं प्रतिकूल प्रभावों के निवारण हेतु एंव निरोगी काया, संपन्न और खुशहाल जीवन के लिए संबंधित नक्षत्र का पौधा रोपित और सिंचित करके उस नक्षत्र के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है l
सामान्यतः ग्रह नक्षत्रों के विकार को दूर करने के लिए रत्न इत्यादि पहनने की सलाह दी जाती है परंतु कीमती रत्न खरीदना सभी के लिए संभव नहीं होता है अतः ज्योतिष में इन वृक्षों की जड़ पहनने एवं पूजन करने की सलाह दी जाती है ताकि सकारात्मक परिणाम मिले और नक्षत्रों के कुप्रभाव से मुक्ति मिल सके साथ ही अपने जीवन में निरंतर उन्नति एवं प्रगति कर सके l प्रकृति के सानिध्य में सभी को मानसिक शांति का अनुभव भी प्राप्त होता है इसलिए  लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और शहरों में नक्षत्र वाटिका रोपित की गयी हैं जहां पर लोग प्रातः भ्रमण के लिए जाते हैं यदि हम अपने नक्षत्र से संबंधित पौधे का रोपण,पोषण करे तो नक्षत्र के प्रतिकूल प्रभाव से बच सकेंगे और वृक्षारोपण भी बढ़ेगा और इस तरह पर्यावरण संरक्षण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध वातावरण उपलब्ध हो सकेगा ।