सजा के दौरान जेल में किया कार्य,नहीं दिया पारिश्रमिक

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर ६ अप्रैल ;अभी तक;  सजा के दौरान केन्द्रीय जेल में किये गये कार्य की मानदेय राषि नहीं दिये जाने के खिलाफ जिला न्यायालय में प्रतिवाद दायर किया गया था। प्रतिवाद में दोषी जेल अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने की गयी है। जेएमएफसी विजय कुमार पांडे ने प्रतिवाद की सुनवाई करते हुए तीन बिन्दुओं पर पुलिस से प्रतिवेदन मांगा है। प्रकरण पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गयी है।
आनंद नगर जबलपुर निवासी अजीत कुमार आनंद की तरफ से दायर किये गये प्रतिवेतन में कहा गया था कि जिला न्यायालय ने उसे 25 आम्र्स एक्ट के तहत 11 अक्टूबर 2018 को एक साल की सजा तथा 500 रूपये के अर्थदण्ड की सजा से दण्डित किया था। जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई को अपील खारिज करते हुए सजा की पुष्टि की थी। जिसे बाद से केन्द्रीय जेल जबलपुर भेज दिया गया था। आदेष के विरूध्द उसके उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिविजन दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 20 सितम्बर 19 को जमानत का लाभ प्रदान किया था।

प्रतिवाद में कहा गया था कि कारावास अवधि की जेल बंदी हिस्टी टिकिट के दस्तावेज उसने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त किये है। जिसमें जेल के अंदर उससे कार्य करवाये जाना उल्लेखित किया गया है। जमानत पर रिहा होने के बाद जेल के अंदर किये गये 75 दिनों के कार्य के मानदेय के लिए 24 सितम्बर 2019 को जिला दण्डाधिकारी तथा  श्रम आयुक्त के समक्ष आवेदन किया था। इसके अलावा पारिश्रमिक राषि जारी करने के लिए जेल महानिदेषक,जेल एव सुधारात्मक सेवाएं भोपाल एव केन्द्रीय जेल जबलपुर के अधिकारियों से पत्राचार किया गया।
पारिश्रमिक राषि नहीं मिलने पर उसने जेल अधिकारियों पर गबन का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक तथा सिविल लाईन थाने में लिखित षिकायत दी थी। इसके अलावा पुलिस महानिरिक्षक को वैधानिक कार्यवाही करने पत्र लिखा था। पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किये जाने पर उक्त प्रतिवाद दायर किया गया है।

प्रतिवाद की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने संबंधित अधिकारी को निर्देषित किया है कि आवेदक ने इस संबंध में लिखित व मौखिक से सूचित किया है या नहीं, घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज की गयी है तथा एफआईआर दर्ज की गयी है तो किस अपराध के तहत की गयी है,इस संबंध में प्रतिवेदन पेष करें। प्रतिवादी की तरफ से अधिवक्ता सलीम अहमद,अधिवक्ता विजय तिवारी तथा अधिवक्ता राजेष कनौजिया ने पैरवी की।

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