सतगुरू भगतप्रकाश जी महाराज एवं सन्त मण्डल का पलक पावड़े बिछाकर किया गया वन्दन

6:08 pm or November 10, 2022
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर १० नवंबर ;अभी तक;  भगवान श्री पशुपतिनाथ की पावन धार्मिक नगरी मंदसौर में मंगलमूर्ति 1008 आचार्य सद्गुरू स्वामी सद्गुरू स्वामी टेऊँरामजी महाराज द्वारा स्थापित धर्मपीठ ‘‘श्री प्रेमप्रकाश पंथ’’ के पंचम पिठाध्वेश्वर गादिनशिन मंडलाध्यक्ष सद्गुरू स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज श्री प्रेमप्रकाश आश्रम के 13वें वार्षिकोत्सव में गुरूवार 10 नवम्बर वदी 2 बीज पावन गुरूवार जो संयोग से सद्गुरू स्वामी सर्वानन्द महाराज का पावन अवतार दिवस है को संत मण्डल के संत शिरोमणी श्री मनोहरलालजी जयपुर कोटा, संत हरिओमलालजी ग्वालियर, संत शंभूलालजी ब्यावर, संत लालुरामजी (इंदौर), संत ढालुराम जयपुर, संत कमल जयपुर, भगत हरदास, भगत माणकलाल  खेरतल, दीपककुमार नईदिल्ली के साथ भवानीमण्डी से सड़क मार्ग से होकर नगर में श्री प्रेमप्रकाश आश्रम पधारे तो संत श्री शंभूलालजी के साथ सेवामण्डली के अध्यक्ष पुरूषोत्तम शिवानी, महिला मण्डली की अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा पमनानी के साथ बड़ी संख्या में गुरू भक्त जो दुबई (यूएई), इन्दौर, रतलाम, जावरा, नीमच, भीलवाड़ा, पिपलियामंडी व स्थानीय प्रेमियों ने सनातन धर्म व ऊँ श्री सतनाम साक्षी के जयकारों के साथ पमनानी हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर से शोभायात्रा में बड़ी संख्या में अनुयायी, सिंधी समाजजन शामिल हुए और महिला, पुरूष व बच्चे मालवा अंचल के सुप्रसिद्ध ढोल की थाप पर सद्गुरू के आगमन पर खुशी से फूले नहीं समा नहीं थे और भक्ति नृत्य कर अपने गुरूदेव के प्रति सच्ची श्रद्धा अर्पित की। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत वंदन व अभिनंदन किया गया।
                                   वहीं विशेष रूप से जुनेफा स्कूल के संचालक दीप सर, स्टॉफ परिवार व स्कूल के नन्हें मुन्ने बच्चों ने स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज का पुष्प से स्वागत कर तिलक लगाया तो आश्रम की नन्हीं बालिकाओं ने भी प्रवेश द्वार पर चंदन तिलक लगाकर स्वागत कियां
                            समूचा वातावरण बाबा टेऊँराम महाराज की भक्ति को समर्पित हो गया। सिंधी समाज व सनातन धर्मियों में अपार हर्ष उत्साह देखा गया। विशाल शोभायात्रा का जैसे ही श्री प्रेमप्रकाश आश्रम में पर्दापण हुआ तो उपस्थित गुरूदेव के स्वरूप संगत का हृदय आनंद से सराबोर हो रहा था। अपने प्यारे गुरूदेव के दर्शनों से मुख कमल पुष्प के भांति खिल उठे तथा गुरूदेव के दर्शन मात्र से कमल नयनों से प्यारे गुरूदेव के दीदार से अपने आपको धन्य महसूस किया।
                                    साई टेऊँराम महाराज की दरबार श्री प्रेमप्रकाश आश्रम तो पूरे क्षेत्र को जैसे नई नवेली दुल्हन की तरह सजाया-संवारा गया। तो वहीं दरबार साहिब के खुले प्रांगण में सत्संग पण्डाल बनाकर साई टेऊँरामजी महाराज का जन्म स्थल को खण्डू ग्राम नाम दिया गया जो भक्ति व उमंगमय वातावरण में उपस्थित जनसमूह संगत की ओर जैसे ही प्यारे गुरूदेव सद्गुरू स्वामी भगतप्रकाश महाराज संत मण्डली ने अपनी मनमोहक मुस्कान के साथ निहारा तो सब प्रेमियों की आंखे खुशी के मारे नम हो गई व भाव विभोर हो गये।
सतगुरू स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी भजन के माध्यम से कहा कि
‘‘मानुष जन्म अमोलक आहे, भोगन विषयन
मेंन विनाये कह लालद्यड़ खाला ही
न लाहे बढ़ गुण गोविन्द
जा नगाए, प्रेम प्रभुआ सा पईज त पावे बढ़
कहे टेऊँ कर वक्त सजायो
गफलत में न करू अजायो
मैं न कर अजायो
कार सच्ची का कमाईन कमार वठ
गुण गोविन्द जा गाई तमा वठ
प्रेम प्रभु ऊजा पाईन पाएवठ
गुण गोविन्द जा गाईन गाए वठ
अर्थात मनुष्य को निष्काम कि कामनाओं से मुक्त जीवन जीना चाहिए। जीवन में बंधन नहीं होना चाहिये। यह पंच मूलक शरीर 84 लाख योनियों में श्रेष्ठ है।
कार्यक्रम का संचालन संत श्री शंभूलालजी प्रेमप्रकाशी ने किया।
हवन यज्ञ की पूर्णाहूति
वार्षिक महोत्सव के पावन अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान के रूप में संपूर्ण विधी विधान व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मालवा अंचल के विद्वान पं. श्री उमेश जोशी शास्त्री के आचार्यत्व में हवन किया गया जिसकी पूर्णाहूति सतगुरू स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज व संत मण्डल के संतों व यज्ञ के लाभार्थी श्रीमती दिव्या नारायण शिवानी, रेखा हरिश उत्तवानी, लाजवंती राजकुमार लालवानी एवं श्रीमती गोधावरी मनोहरलाल जेठवानी (सलाम) ने हवन कुण्ड की अग्नि में अर्पित कर विधि पूर्ण की।
ध्वज वन्दना
सतगुरू स्वामी भगतप्रकाश महाराज ने श्री प्रेमप्रकाश ध्वजा वंदना  की पूजा अर्चना कर प्रसिद्ध भजन ‘‘साई टेऊँराम तुहजो झण्डो झूले’’ हिन्द सिन्ध में तुहजी हाक बुदी थऊ से उपस्थित अनुयायी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संत मण्डल एवं संगत का आभार प्रदर्शन संत श्री शंभूलालजी प्रेमप्रकाशी ने माना।
सत्संग समागम का समापन होगा 11 नवम्बर को
सेवा मण्डली के अध्यक्ष पुरूषोत्तम शिवानी ने बतलाया कि सत्संग समागम के अंतर्गत सुबह 8 बजे भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, सतगुरू टेऊँरामजी महाराज व सतगुरूओं के विग्रहों को पोषाक पहनाकर गुरू महाराज अभिषेक करेंगे। प्रातः 10 से 12.30 बजे तक सत्संग प्रवचन एवं श्री प्रेमप्रकाश ग्रंथ व श्रीमद् भागवत गीता के पाठों का भोग व शाम को 5 से 7.30 बजे तक धर्मपीठ के रहे द्वितीय पिठाध्वेश्वर महर्षि सतगुरू स्वामी सर्वानन्द का पावन 126वां जन्मोत्सव, 56 भोग प्रसादी, 126 दीपों की महाआरती के साथ पल्लव पाकर गुरू महाराज इस पंच दिवसीय 13वें वार्षिक महोत्सव का समापन करेंगे।