सर्वपितृ अमावस्या को शिवना घाट पर किया तर्पण, नान्दी श्राद्ध व हवन

8:54 pm or September 17, 2020
सर्वपितृ अमावस्या को शिवना घाट पर किया तर्पण, नान्दी श्राद्ध व हवन
महावीर अग्रवाल
मंदसौर १७ सितम्बर ;अभी तक;  श्राद्ध पक्ष में पिंडदान व तर्पण का महत्व होता है।
                शिवना नदी के घाट पर विशु अग्रवाल मित्र मंडल द्वारा पंडित राकेश भट्ट के सानिध्य में पिछले 15 वर्षों से 16 दिवसीय श्राद्ध व तर्पण क्रिया की जाती है व सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध,तर्पण व प्रायश्चित हवन किया जाता है।अमावस्या के दिन सर्वप्रथम पिंड पूजन किया गया ,व नदी में तर्पण किया गया उसके बाद नान्दी श्राद्ध किया गया व उसके बाद प्रायश्चित हवन किया गया। पंडित राकेश भट्ट ने बताया कि पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है. यहां श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने से है. श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों को  16 दिनों  तक तर्पण किया जाता  है. इस अवधि को पितृ पक्ष अर्थात श्राद्ध पक्ष कहते हैं. हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है.
               वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य का प्रवेश कन्या राशि में होता है तो उसी दौरान पितृ पक्ष मनाया जाता है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान को सर्वोत्तम माना गया है।विश्व मोहन अग्रवाल ने बताया कि मान्यता है कि इस समय पूर्वज पृथ्वी पर होते हैं, इसलिए पितृपक्ष में उनका श्राद्ध करने से वे अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं|हिन्दू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानि पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए. माना जाता है जिनके पूर्वज प्रसन्न होते हैं उनके जीवन में किसी प्रकार के कष्ट नहीं होते हैं।

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