सर्वार्थ सिद्धि योग व सोमवती अमावस्या योग में शनि जयंती सोमवार को कई शुभ संयोग

11:02 pm or May 28, 2022

प्रहलाद कछवाहा

मंडला २८ मई ;अभी तक;   सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवती अमावस्या पर सोमवार का दिन होने से भगवान शिव की पूजा अर्चना करके कमजोर चंद्रमा को बलवान किया जा सकता है। इस वर्ष ये अमावस्या 30 मई सोमवार को मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म में इस अमावस्या का विशेष महत्व है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी। इस खास दिन की बात यह है कि सोमवार को ही शनि जयंती है, जिसके कारण यह सोमवती अमावस्या और विशेष और शुभ है। इस दिन भक्तों द्वारा विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। सोमवार कोई सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अन्य कई शुभ योग बन रहे है, जिसके कारण यह दिन का महत्व कई गुणा बढ़ गया।

                       पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि सोमवार 30 मई को ज्येष्ठ मास की अमावस्या है। इस तिथि पर शनि देव की जयंती मनाई जाती है। इस बार ज्येष्ठ माह की अमावस्या सोमवार को होने से इसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या पर शनि की विशेष पूजा के साथ ही शिव पूजा और पितरों के लिए दान-पुण्य करना चाहिए। कई क्षेत्रों में इसी तिथि में वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। कई क्षेत्रों में ये व्रत शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है।  सोमवती अमावस्या को कृत्तिका नक्षत्र रहेगा। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में शनि जन्मोत्सव मनाया जाएगा। शनि देव स्वयं की कुंभ राशि में रहेंगे, इस वजह से शनि जयंती का महत्व और अधिक रहेगा। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके  पितरों के नाम पर दान-पुण्य करना चाहिए।

शुभ संयोग से बढ़ गया महत्व :

बता दे कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर इस वर्ष ग्रह-नक्षत्रों के कई शुभ योग बन रहे है। 30 मई को सोमवती अमावस्या पर सुकर्मा योग बन रहा है। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य, केदार सहित कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। वर्ष 2022 की आखिरी सोमवती अमावस्या भी 30 मई को है, इस दिन सुकर्मा व धृति योग का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। सोमवार को एक ही दिन में 3 पर्व एक साथ होने के कारण इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री का व्रत करेंगी। इसके साथ ही इस शनि जयंती पर शनि देव की पूजा की जाएगी। इसी दिन सोमवती अमावस्या होने से तीर्थ स्थान, दान-पुण्य आदि की परंपरा है। इस दिन कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं जो इसका महत्व और अधिक बढ़ा देता है।

बकौरी शनि मंदिर मेंं जल रही अखंड ज्योत : होंगे विविध आयोजन :

फूलसागर के पास ग्राम बकोरी की पहाड़ी में सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाली प्रसिद्ध नक्खी माई का दरबार कई वर्षो पुराना है। यहां विराजमान नक्खी माई सदियों से विराजमान है। यहां देश के विभिन्न कोनों से हजारों श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर नवरात्र में कलश-ज्वारे रखते हैं। नक्खीमाई के प्रसिद्ध मंदिर परिसर में देवदरा मंडला निवासी, हायर सेकेंडरी स्कूल बबलिया के प्राचार्य डीके सिंगौर के परिवार द्वारा भव्य शनि मंदिर का निर्माण कराया गया। जहां नवग्रहों सहित दक्षिणमुखी हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना की गई है। यहां स्थापित शनि मंदिर में महाराष्ट्र के शनि-सिंगनापुर से प्राण-प्रतिष्ठित शनिदेव शिला की स्थापना की गई। काले ग्रेनाइट पत्थरों से नवनिर्मित मंदिर मेंं विराजमान नवग्रहों की मूर्ति एवं हाथी-शेरों की मूर्ति मंदिर को भव्यता प्रदान कर रही है। शनि मंदिर को देखकर हर दर्शनार्थी प्रशंसा हो रहे है और उसे अद्वितीय बता रहे है। भगवान शनि देव मंदिर निर्माण से पहाड़ी में स्थित माँ नक्खी माई का स्थान की सुंदरता पर चार चाँद लग गया है। बता दे कि शनि मंदिर की स्थापना 20 फरवरी 2022 को की गई थी। मंदिर निर्माण के बाद मूर्ति स्थापना के लिए भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसके बाद शनि देव मंदिर में अखंड ज्योत जलाई गई है। इस अखंड ज्योत की देख रेख स्थानीय भक्त द्वारा की जा रही है।  शनि मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को महाआरती का आयोजन भी किया जा रहा है। यह महाआरती स्थानीय समेत अन्य भक्तों द्वारा प्रति मंगलवार को की जाती है।

सोमवार को होंगे विविध आयोजन :

शिक्षक डीके सिंगौर ने बताया कि सोमवती अमावस्या और शनि जयंती के साथ और अन्य शुभ संयोग बन रहे है। जिसके कारण शनि जयंती और विशेष हो गई है। इस दिन के लिए बकौरी ग्राम में स्थित शनि मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की तैयार की जा रही है। सोमवार को शनि जयंती के अवसर पर नक्खी माई मंदिर परिसर बकौरी में भगवान शनि देव नवग्रह मंदिर में हवन पूजन, महाआरती एवं प्रसादी वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिसमें हवन, पूजन, महाआरती एवं प्रसादी वितरण दोपहर एक बजे से प्रारंभ किया जाएगा। शाम 7 बजे से भजन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिसमें मंडला की भजन मंडली देवदरा द्वारा सुंदरकांड पाठ का संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी। जिसके बाद रााि 8.30 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा।