‘सवा सेर को सेर, सेर को पौना करती है बात जरा सी, बड़ो-बड़ो को बौना करती है’’- ऋषि कुमार मिश्र

10:36 pm or July 26, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर २६ जुलाई ;अभी तक;  अखिल भारतीय साहित्य परिषद की इंदौर मालवा प्रान्त इकाई ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्यक्रमों को लेकर मध्यप्रदेश में ऊपरी पायदान पर है। इकाई की गुरु पूर्णिमा निमित्त रिमझिम काव्य गोष्ठी इसकी सक्रियता का उदाहरण  है। गुरूपूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था इसलिये इसे व्यासपूर्णिमा भी कहा जाता है। वेदव्यासजी ने वेदों की रचना कर सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन किया है। इस रूप में वे सारी मानवता के गुरू हैैं और जो गुरू सिखाता है उनकी छोटी से छोटी बात भी हमारे लिये ग्रहण करने योग्य होती है क्योंकि छोटी सी सीख हमें बड़ा नहीं बनाती है और छोटी सी सीख घटने पर बौना भी बनाती है।
उक्त  विचार अ.भा. साहित्य परिषद केन्द्रीय महामंत्री ऋषि कुमार मिश्र ने गूगल मीट पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद मालवा प्रान्त इंदौर श्री त्रिपुरीलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित ऑनलाइन रिमझिम काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि  के रूप में व्यक्त किये। आपने अपनी कविता से और अधिक स्पष्ट किया कि-
‘‘सवा सेर को सेर, सेर को पौना करती है
बात जरा सी, बड़ों-बड़ांे को बौना करती है’’
इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ नंदकिशोर राठौर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। गोष्ठी में मनोहर मधुकर जावरा ने ‘‘रिमझिम पानी बरसे ठण्डी चले बयार‘‘ गीत प्रस्तुत कर रिमझिम काव्य गोष्ठी के नाम अनुरूप सार्थकता रचना पाठ किया। प्रमोद पंचोली बड़नगर ने ‘‘डाल रखे थे कपड़े छत पर, शुरू हुई बरसात‘‘  रचना से बरसात का चित्रण किया। अरूणेश्वरी देवी उज्जैन  ने ‘‘शिव तेरे लिये जोगन बन गई, साथ तेरा मिला है दुल्हन बन गई‘‘ रचना के सावन एवं शिव की झांकी प्रस्तुत  की।
सत्यनारायण मंगल ने मालवी रचना ‘‘अनाज का भाव घणा चढ़ग्या हाय घणी महंगाई है‘‘ से मालवी की मिठास से महंगाई का निरूपण किया। विनोदसिंह गुर्जर महू ने ‘‘नाच उठी धरती झूमा आकाश, आया आया सावन त्यौहार‘‘ रचना से सावन के त्यौहारों को रेखांकित किया विशेषकर ‘‘झूले‘‘ के संदर्भ में ‘‘रस्सी कहे मुझे भर है स्वीकार‘‘ रचना ने सावन के झूलों को जीवंत किया।
दिलीप शर्मा देवास ने ‘‘काशी में शिव रहते, ये दुनिया वाले कहते‘‘ रचना से काशी एवं शिव की महिमा को जीवन्त किया। श्रीमती बिन्दू महू ने ‘‘जब तक होगी सांसे तन में, घुसपैठ नहीं होगी वतन में‘‘ रचना से कारगिल दिवस को याद करने की प्रेरणा दी। पवन जोशी महू ने ‘‘घन घनन घनन, पवन सनन सनन‘‘ मुक्तक से बादलों के मनोदृश्य की अभिव्यक्ति की। गगन खरे महू ने ‘‘अपने घर को मंदिर बनाकर देखो‘‘ रचना से घर की शुचिता की ओर इशारा किया।
सपना साहू ने गुरू के सम्मान में गीत ‘‘मै चौक पुराऊं, मंगल गाऊं, गुरूवर के स्वागत में‘‘ गाकर गुरू वंदना की। प्रवीण कुमार झाबुआ ने ‘‘जीवन जल बरसा रही, वर्षा ऋतु मनमोहिनी‘‘ रचना से बरसात की अगवानी की। रेखा वर्मा झाबुआ ने ‘‘तितली की छुअन सी जिन्दगी‘‘ रचना से जीवन के अनकहे पहलु को उजागर किया। शिशिर सोनी सनावद ने ‘‘गुरू ज्ञान की खान है‘‘ रचना पढ़ी। भेरूसिंह चौहान झाबुआ ने ‘‘गुरू की महिमा सबसे  न्यारी‘‘ रचना पढ़कर गुरू भक्ति का एहसास कराया। किशोर सनावद ने रचना ‘‘नजर मुझ पे जबसे गुरू ने डाली, तबसे घर में छाई है दीवाली‘‘ पढ़कर गुरू की महिमा का बखान किया।
विनिता खण्डेलवाल इंदौर ने ‘‘गुरूदेव ऐसी झंकार दे गये‘‘ रचना से गुरूकृपा का बखान किया। निशा उपाध्याय बड़वानी ने भी ‘‘गुरू का दर्शन‘‘ रचना में गुरू के व्यक्तित्व को प्रदर्शित किया।
श्री त्रिपुरारीलाल शर्मा इंदौर ने ‘‘गुरू इतनी कृपा करना, प्रभु से मिला देना‘‘ रचना पढ़कर अपना अध्यक्षीय उद्बोधन आशु कवि के रूप में आज कविता पढ़ने वाले सभी कवियों की रचनाओं को  रेखांकित करते हुए दिया। सभी कवि की रचनाओं को कवियों की विशेषता को जोड़कर किया गया संबोधन सभी कवियों का मन मोह गया।
कार्य़म का सफल संचालन हास्य कवि नरेन्द्र भावसार मंदसौर ने किया। साथ में अपनी रचना ‘‘आज मेघा घिर आये तो फिर नैना भर आए‘‘ सुनाकर अपने जीवन साथी को भावांजलि दी तो कार्यक्रम का आभार महासचिव नन्दकिशोर राठौर मंदसौर ने माना। साथ ही अपनी कविता ‘‘सावन आया भादो जाए प्रियतम मेरे तुम न आए‘‘ से एक स्त्री मन की विरह वेदना को दर्द भरे स्वर में प्रस्तुत किया।
आनलाइन कवि गोष्ठी रात्रि 8 बजे से आरंभ होकर रात्रि 11 बजे तक अपने वक्ता एवं श्रोताओं के मध्य संचालित हुई।