सहायक उपनिरीक्षक को 04 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000/- रूपए अर्थदण्ड से दण्डित कर जेल भेजा 

7:39 pm or June 1, 2022
अरुण त्रिपाठी
रतलाम ,01 जून एक जून ;अभी तक;  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार गुप्ता ने पुलिस थाना सैलाना जिला रतलाम में सहायक उपनिरीक्षक रहे लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत उम्र 61 वर्ष को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 13(1) डी में दोषसिद्ध पाते हुऐ 04 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 1000/- रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित कर जेल भेज दिया।
                             भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष लोक अभियोजक सीमा शर्मा ने बताया कि 20 दिसंबर 2014 को आवेदक गोपाल पिता नाथुलाल शर्मा उम्र 29 वर्ष निवासी नामली जिला रतलाम ने लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में उपस्थित होकर लेखी शिकायत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था | इसके मुताबिक थाना सैलाना के अपराध प्रकरण में उपनिरीक्षक ओमप्रकाश दुबे ने उसे, उसके पिता नाथुलाल और भाई महेश को दिनांक 18 दिसंबर 2014 को गिरफ्तार कर थाने में बिठा लिया था और जमानत पर छोडने के लिए दुबे और एएसआई लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत ने 6,000/- रूपए रिश्वत की मांग की थी| रूपयों की व्यवस्था नही होने के कारण पूर्व परिचित एएसआई लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत से बात की,तो लक्ष्मणसिंह ने दुबे से बात करके 4,000/- रूपए रिश्वत की राशि बाद में देने का तय करके जमानत करवा दी। इसके बाद दिनांक 19 दिसंबर 2014 को लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत से मिल कर उन्हें बताया कि रूपयों की व्यवस्था नही हो पा रही,तो लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत फिर से थाने में बंद करने की धमकी देने लगा।
                          लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत मांगने की पुष्टि की जाने के लिए आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत और गोपाल शर्मा के मध्य हुई रिश्वत संबंधी बातचीत की रिकॉर्डिंग कराई। तत्पश्चात 21 दिसंबर 2014 को आवेदक गोपाल ने पुलिस थाना परिसर सैलाना में जाकर आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत को 3500/- रूपए रिश्वत दी और लोकायुक्त पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया| विवेचना में आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत द्वारा अपराध किया जाना पाए जाने पर अभियोग पत्र विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और उपनिरीक्षक ओ.पी. दुबे के विरूद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य ना होने से उनका नाम पृथक किया गया। प्रकरण में विचारण उपरांत विशेष न्यायालय रतलाम द्वारा आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत को दोषसिद्ध किया गया।