सही समय पर उपचार से सुमित का बैल लंपी से हुआ स्वस्थ

10:07 pm or September 18, 2022

आशुतोष पुरोहित

खरगोन 18 सितम्बर 22 अभीतक /सोनिपुरा के सुमित अलकेश पाटीदार की अपने बैल के प्रति संवेदनशीलता ने लंपी से ग्रसित लक्षणों वाले बैल को बचा लिया। सुमित ने आज से 10 दिन पहले  अपने बैल की पीठ व अन्य स्थान पर गठानें देखी थी। उन्होंने सबसे पहले बैल को क्वारंटिन करना उचित समझा। इसके बाद सुमित की बेचौनी बढ़ती गई। हर घंटे अपने बैल के पास जाकर निगरानी करता रहा। बैल ने चारा पानी छोड़ दिया और हालात खराब होने लगी। दूसरे दिन सुमित ने पशु चिकित्सक ड़ॉ. पटेल को बुलाकर उपचार प्रारम्भ किया। चार दिनों के नियमित उपचार और देखरेख के बाद सुमित का बैल आज स्वस्थ्य हो गया है। अब फिर से भरपूर मात्रा में चारा पानी लेने लगा है। ड़ॉ. एच सी पटेल ने बताया कि सुमित का बैल लंपी की प्रारम्भिक स्थिति में था। लक्षण लंपी के ही थे। बैल को अलग अलग तरह से उपचार किया गया। शुरू दिन से इंजेक्शन हाईटेक 10 एमएल, इंजेक्शन इंटोसेफ 3 जीएम 2 दिन, इंजेक्शन मेगलूडीन 20 एमएल 2 दिन, इंजेक्शन आइसोक्लूड 10 एमएल 2 दिन, इंजेक्शन बेलामिल 10 एमएल 2 दिन और बोलम कोलम्बी 2-2 दो दिनों तक दी गई।
लंपी का ईलाज संभव ला-ईलाज बीमारी नहीं
ड़ॉ. पटेल ने बताया कि पशुपालक घबराए नहीं नियमित देखरेख और उपचार से यह स्कीन डिसीस जल्द ठीक हो सकती है। लंपी के लक्षण दिखने पर पशुपालक सबसे पहले उस प्पशु को अन्य मवेशियों से अलग कर दें। इसके पश्चात नजदीकी डॉक्टर या विभाग द्वारा जारी किए गए सुझाव पर अमल करें। अब तक जिले में कुल 360 पशुओं को उपचार के बाद ठीक किया गया है। लंपी में सुधार के पूरी-पूरी उम्मीद है। लंपी पशुओं में कोई ला-इलाज बीमारी नहीं है। इस बीमारी में सुधार का प्रतिशत काफी अच्छा है। जिले में अब तक कुल 5100 पशुओं को टीकाकरण भी किया गया है। रविवार की स्थिति में 119 पशुओं का उपचार डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है।