सामाजिक संगठनों की असामाजिक गतिविधियों में शामिल हो रहे है शासकीय कर्मी

मयंक भार्गव

बैतूल १३ सितम्बर ;अभी तक;  सामाजिक उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार की उपलब्ध, कुरीतियों एवं शोषण से मुक्ति दिलाने के नाम पर सक्रिय कुछ असामाजिक एवं राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के संकेत मिल रहे है। हालांकि इसके कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। परंतु जिले के सुदूर ग्रामीण पर्वतीय वनांचलों में कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा जो गतिविधियां संचालित की जा रही है उसकी एक नजीर गत दिनों भीमपुर ब्लॉक के रम्भा ग्राम में हुए बलवा- तोडफ़ोड़ कांड में सामने आयी। रम्भा बलवा तोडफ़ोड़ कांड में पुलिस ने जिन आरोपियों को नामजद किया था उनमें चार शासकीय कर्मी भी शामिल है।
सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर शासकीय कर्मियों के असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का खुलासा होते ही शासन- प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। रम्भा बलवा तोडफ़ोड़ कांड में नामजद आरोपी शिक्षक एवं लिपिक को बैतूल कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो बलवा तोडफ़ोड़ कांड के फरार आरोपियों में एक पंचायत सचिव सहित एक अन्य शासकीय कर्मी भी शामिल है। जिनकी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।
आरोपी शिक्षक-लिपिक को किया निलंबित
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रम्भा ग्राम एक सामाजिक संगठन के उकसावे पर भीड़ द्वारा मकानों, दुकानों में तोडफ़ोड़ कर दहशत फैलाने के मामले में 17 आरोपियों को नामजद किया गया था। जिसमें से दर्जन भर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जबकि दो आरोपियों को अग्रिम जमानत मिली है जबकि तीन आरोपी अभी फरार है। फरार आरोपियों में एक पंचायत सचिव सहित एक शासकीय कर्मी बताया जा चुका है।
रम्भा बलवाकांड में नामजद आरोपियों में दो शासकीय कर्मी माध्यमिक शिक्षक पूना सिंह डिकारे एवं लिपिक खुशराज दहीकर भी शामिल थे। हालांकि उक्त दोनों आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। परंतु आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद कलेक्टर अमनबीर सिंह बैस ने माध्यमिक शिक्षक पूना सिंह डिकारे एवं लिपिक खुशराज दहीकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
सामाजिक संगठनों को फंडिंग करने की चर्चा
बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंडों भीमपुर, भैंसदेही, आठनेर, शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा सामाजिक उत्थान, शोषण कुरीतियों से मुक्ति एवं जागरूकता की आड़ में शासन- प्रशासन विरोधी एवं असामाजिक गतिविधियों का संचालन कर ग्रामीणों को बरगलाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ऐसे सामाजिक संगठनों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित की जा रही गतिविधियों में कुछ शासकीय विभागों के अधिकारी कर्मचारी न सिर्फ शामिल हो रहे है बल्कि गतिविधियां संचालित करने एवं विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बाकायदा फंडिंग भी कर रहे है। बताया जाता है कि शासकीय मुलाजिमों से मिल रही इमदाद से कुछ सामाजिक संगठन पोषित पल्लवित होकर ग्रामीणों को बरगलाकर शासन प्रशासन विरोधी एवं असामाजिक गतिविधियों को हवा दे रहे है।
रम्भा कांड के बाद प्रशासन अलर्ट
रम्भा बलवा तोडफ़ोड़ कांड में सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं के साथ शासकीय कर्मियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन एवं पुलिस द्वारा गोपनीय रूप से शासन प्रशासन विरोधी गतिविधि संचालित करने वाले संगठनों के साथ जुगलबंदी करने तथा फंडिंग करने वाले सरकारी मुलाजिमों की जानकारी जुटाई जा रही है। ठोस प्रमाण मिलने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक एवं वैधानिक कार्यवाही भी हो सकती है।