सीएम शिवराज की धार्मिक पन्ना यात्रा, सपरिवार पहुच कर छः मंदिरों में किये दर्शन

6:11 pm or October 21, 2021
सीएम शिवराज की धार्मिक पन्ना यात्रा, सपरिवार पहुच कर छः मंदिरों में किये दर्शन
हमारे संवाददाता
पन्ना 21 अक्टूबर ; अभी तक ; – मंदिरों की नगरी और हीरे को लेकर विश्व भर में पहचान बनाने वाले मध्यप्रदेश के पन्ना नगर का शरदोत्सव इस बार कुछ खास रहा। प्रदेश के कल्याण की कामना के लिए राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  सपरिवार यहां पहुंचे और ऐतिहासिक भगवान जुगल किशोर मंदिर एवं  प्राणनाथ मंदिर सहित छः मंदिरों के दर्शन किये।इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भगवान जुगल किशोर मंदिर में दर्शन कर भाव-विभोर हो गए… और श्रद्धालुओं के बीच बैठ गए और मंजीरा बजा कर भजन गया।
               यहां भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा ने झीका बजाकर उनके स्वर में स्वर मिलाया…। श्री चौहान ने शरद पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर भगवान जुगल किशोर ओर प्राणनाथ मंदिर सहित छः मंदिरों के पत्नी साधना सिंह के साथ दर्शन किये। मुख्यमंत्री की सपरिवार धार्मिक यात्रा भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर से शुरू होकर ऐतिहासिक बलदाऊ मंदिर, गोविंद स्वामी मंदिर,रामजानकी मंदिर प्राचीन जुगल किशोर मंदिर से होते हुए प्राणनाथ मंदिर में समाप्त हुई।
विभिन्न ओर कार्यक्रमों में शामिल हुए।
              इस दौरान मुख्यमंत्री श्री चौहान की धर्मपत्नि श्रीमती साधना सिंह और प्रदेश शासन के खनिज साधन व श्रम मंत्री श्री ब्रृजेन्द्र प्रताप सिंह एवं क्षेत्रीय सांसद ओर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी उपस्थित रहे।
                मंदिरों की पवित्र नगरी पन्ना के भगवान जगदीश स्वामी मंदिर से मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपनी धार्मिक यात्रा प्रारंभ की। जहां पर उन्होंने सपत्निक भगवान श्री जगदीश स्वामी के दर्शन कर पूजन किए और प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पन्ना शहर का जगदीश मंदिर प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। मंदिर के चारों ओर 26 छोटे-छोटे मंदिर हैं।बताया जाता है कि पन्ना के तत्कालीन महाराजा किशोर सिंह भगवान जगदीश स्वामी के अनन्य भक्त थे। जब उन्होंने जगन्नाथ पुरी की यात्रा की तो भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में उन्हें मंदिर निर्माण कराने का आदेश दिया। तब महाराजा, जगदीश स्वामी मंदिर में विराजमान जगदीश स्वामी, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रह को उड़ीसा महाराज से प्राप्त कर चार माह में पैदल चलकर पन्ना लाए थे।
               धार्मिक यात्रा पर भगवान श्री जुगलकिशोर सरकार की नगरी पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान श्री जगदीश मंदिर के दर्शन के बाद भगवान बलदेव जी के मंदिर पहुंचे। बुन्‍देली परंपरा से निर्मित मंदिर मंे विराजित भगवान श्री बलदेव की प्रतिमा का मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सपत्निक पूजन अर्चन किया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इस दौरान प्रदेश शासन के खनिज साधन व श्रम मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा भी उपस्थित रहे।
                सीएम की धर्म यात्रा में दूसरा दर्शन पन्ना भगवान बलदाउ जी के किये। नगर का बलदेव मंदिर देश के विशिष्ट मंदिरों में से है। इसको देखने दूर-दूर से प्रतिवर्ष हजारों यात्री आते हैं। महाराजा रूद्र प्रताप पन्ना राज्य के दसवें नरेश थे। उन्हें स्थापत्य कला में विशेष अभिरूचि थी। उन्होंने ही इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर निर्माण का कार्य संवत 1933 से प्रारंभ होकर संवत 1936 में पूर्ण हुआ था। मंदिर पूर्व एवं पश्चिम की स्थापत्य कला का अपूर्व संगम है। प्रवेश द्वार में सोपान निर्मित है जो प्राचीन शैली के अनुरूप है। स्तंभ निर्माण शैली भी प्राचीनता की द्योतक है तथा मौर्य युगीन स्तंभों की स्मृति ताजा कर देती है।भगवान श्री कृष्ण की सोलह कलाओं के प्रतीक मंदिर निर्माण में स्पष्ट रूप ये परिलक्षित होते हैं। 16 स्तंभों पर विशाल मंडप, 16 झरोखे 116 गुंबद इनमें से प्रमुख हैं। मंदिर में प्रवेश हेतु 16 सोपान सीढ़ी भी निर्मित है। मंदिर का शिखर स्वर्ण कलश से सुशोभित है। मंदिर के विशाल गर्भग्रह में भगवान श्री बलदेव जी की शालीनतामयी प्रतिमा प्रतिष्ठित है। मंदिर के ऊपर केन्द्रीय गुंबद में कला की समन्वयात्मक शैली परिलक्षित है। सपाट छाप एवं बुंदेली परंपरागत निर्मित है। यह मंदिर राज्य की पुरातात्विक धरोहर में सम्मिलित कर लिया गया है। माना जाता है कि श्री बलदेवजी का मंदिर वृंदावन (दाऊपुरी) के अलावा मात्र पन्ना में ही है।
     मख्यमंत्री के धर्म यात्रा में तीसरा दर्शन नगर के गोविंद जी मंदिर में भगवान गोविंद जी के हुए। वहीं चौथा दर्शन नगर के मध्य स्थित राम जानकी मंदिर में भगवान राम और जानकी के साथ लक्ष्मण के दर्शन किये।
श्री रामजानकी मंदिर नगर के प्रमुख मंदिरों में से है। यह नगर के उत्तरी भाग में अजयगढ़ चौराहे के पास मुख्य सड़क पर स्थित है। मंदिर का निर्माण महाराज लोकपाल सिंह की महारानी सुजान कुँवर द्वारा संवत् 1952 में कराया गया था। इसके गर्भ में भगवान राम माता सीता एवं लखनलाल जी की विग्रह प्रति स्थापित है। मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा संवत 1955 में महाराजा यादवेन्द्र सिंह जू देव द्वारा कराई गई थी।मंदिर की दीवारों पर रामभक्त स्व. लल्लू लाल जी जड़िया द्वारा रामायण की समस्त चौपाइयाँ उकेर कर मंदिर के भव्य स्वरूप को द्विगुणित किया गया है। श्री रामचरित मानस के आधार पर झाँकी प्रस्तुत करते अनेक बड़े चित्र भी दीवालों पर लगाए गए हैं।मंदिर में रामभक्त हनुमान जी की भी ध्यानाव स्थित प्रतिमा दर्शनीय है। यहाँ पर वर्ष भर धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। श्री राम नवमी के अवसर पर श्री राम मेला एवं प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाता है।
 मुख्यमंत्री के धर्मयात्रा में पांचवा दर्शन भगवान जुगल किशोर महाराज के हुए। मंदिरों की नगरी पन्ना की धार्मिक यात्रा के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भगवान जुगलकिशोर के दर्शन को सपरिवार पहुंचे। पूजन अर्चन के साथ ही मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भक्तों के साथ भगवान जुगलकिशोर के जयकारे लगाए। उन्होंने मंदिर में सपत्निक भगवान जुगलकिशोर की पूजा अर्चना कर भगवान से प्रदेश के विकास व खुशहाली की कामना की। इस दौरान प्रदेश शासन के खनिज साधन व श्रम मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा भी उपस्थित रहे।
             यहां उन्होंने मजीरा बजा कर श्रद्धालुओं के बीच मजीरा बजाकर भजन भी गया।जुगल किशोर जी मंदिर का निर्माण पन्ना के चौथे बुंदेला राजा, राजा हिंदूपत सिंह ने 1758 से 1778 के दौरान कराया था। मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति के माथे में हीरा लगा हुआ है और राधा जी की मूर्ति चंदन की लकड़ी की बनी हुई है। बताया जाता है कि इस मंदिर के गर्भगृह में रखी गई मूर्ति को ओरछा के रास्ते वृंदावन से लाया गया था और प्रतिमाओं को राम राज्य की मूर्ति के साथ ओरछा में स्थापित करने की योजना थी, लेकिन ओरछा के महाराज ने कृष्ण जी की मूर्ति पन्ना के महाराज को भेंट की थी।भगवान के आभूषण और पोशाक बुंदेलखंडी शैली को दर्शाते हैं। मंदिर में बुंदेला मंदिरों की सभी स्थापत्य विशेषताएं हैं, जिसमें एक नट मंडप, भोग मंडप और प्रदक्षणा मार्ग शामिल हैं। मंदिर में देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में सालभर दर्शनों का पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने छठा ओर आखरी दर्शन प्राणनाथ मंदिर पहुचकर प्राणनाथ के दर्शन किये। शरद पूर्णिमा के अवसर पर पन्ना में देर रात कार्यक्रम में शामिल होते हुए महारास में भागीदारी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज शरद महोत्सव में पन्ना आकर इस तीर्थ स्थल के दर्शन और एक आध्यात्मिक संत के जीवन और उनके कार्यों को जानने का अवसर मिला है। यह मेरे लिये सौभाग्य का विषय है।
 मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्राणनाथ प्यारे की जय के उद्धघोष के साथ संबोधन प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण दुनिया एक परिवार है। प्राणनाथ जी की हम सभी पर कृपा है। कहा भी गया है सियाराम में सब जग जानी। इस भावना के अनुसार हम सभी प्राणनाथ प्यारे के प्रिय हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के अलावा खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, सांसद श्री व्ही.डी. शर्मा, जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
            मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्राणनाथ जी गुजरात से मध्यप्रदेश आए। उनके आगमन से यह धरा पावन हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि सर्वे भवन्तु सुखिनरू, सर्वे सन्तु निरामया। सभी सुखी हों, सभी निरोग हों और सभी का कल्याण हो। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल का भी मार्गदर्शन किया। सत्रहवीं सदी में उन्हें पराक्रम के लिये प्रोत्साहित किया। छत्रसाल जी के लिये कहावत है- ‘‘छत्ता तेरे राज में, धक-धक धरती होय, जित-जित घोड़ा मुख करे, तित-तित फत्ते होय’’। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पन्ना प्रणामी पंथ का पवित्र धाम है। यहाँ श्री गुम्बट जी मंदिर के प्रांगण को ब्रह्र चबूतरा (रास मण्डल) कहा जाता है। यही श्री प्राणनाथ जी ने परम स्नेही सुन्दरसाथ को श्री राज जी-श्यामा जी की अलौकिक अखण्ड रासलीला, जागिनी रास का दर्शन करवाया था। इसलिये इसे जागिनी लीला भी कहा जाता है। तबसे अंतर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव प्रतिवर्ष होता है। निजानंद संप्रदाय में प्रेम की बड़ी महिमा है। यहाँ प्रेम ही सब कुछ है। शरद पूर्णिमा में श्री कृष्ण ने प्रेम को ही प्रतिष्ठा प्रदान की। पाँच दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव पूरी भक्ति, प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है।
           इस मौके पर पन्ना विधायक एवं प्रदेश के खनिज मंत्री  बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री परिवार सहित इस पावन नगरी में पधारे हैं। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्राणनाथ महाराज छत्रसाल के आध्यात्मिक गुरू थे। श्री सिंह ने छत्रसाल जयंती पर संस्कृति विभाग द्वारा कार्यक्रम का सुझाव भी दिया।
            वहीं सांसद श्री व्ही. डी शर्मा ने कहा कि प्राणनाथ जी के मंदिर में शरद महोत्सव में हिस्सा लेना सौभाग्य का क्षण हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ पन्ना आकर स्थानीय नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से शरद महोत्सव की शुभकामनाएँ देने का अवसर मिला है।