सुंदर मकान बनाने के लिए रिश्तेदारों से भी लिया पैसा

आशुतोष पुरोहित

खरगोन १४  सितंबर ;अभी तक;  जिले के दुर्गम पहाड़ी अंचल झिरन्या विकासखंड के अंबाडोचर गांव की बेवा रेशमाबाई की खुशी का ठिकाना नही रहा। जब उन्होंने अपने हाथों से अपने पक्के मकान का फीता कांटा। आज से पांच वर्ष पूर्व उनके पति तीन बच्चों के साथ अकेला छोड़ गए थे। अपने बच्चो का पालन पोषण रेशमा बाई मजदूरी और खेती कर किया, लेकिन पक्के मकान का सपना पूरा नही कर पाई। इसी बीच उन्हें वर्ष 2019-2020 में पीएम आवास योजना के तहत स्वीकृति मिली। फिर क्या था मां अपने तीन बेटों के साथ मकान बनाने में जुट गए। एक बेटा गांव के फाल्ये में ही छोटी सी किराना दुकान संचालित कर अपने परिवार का पोषण कर लेता है।

शनिवार को गृह प्रवेशम कार्यक्रम के माध्यम से वृहद स्तर पर आवास मकानों में गृह प्रवेश का कार्यक्रम आयोजित हुआ। झिरन्या जनपद सीईओ महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार जब रेशमा बाई ने फीता कांटा तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। उनकी आंसुओ में पक्के मकान की खुशी साफ देखी। उनके मकान में गृह प्रवेश पर गांव और फाल्यें तथा उनके रिश्तेदारों ने बधाई देते हुए खूब गीत गाएं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल कार्यक्रम के माध्यम से गृह प्रवेश कराया। इस दौरान झिरन्या जनपद में शनिवार को 380 हितग्राहियो का पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है।

सुंदर और उपयोगी बनाने के लिए रिश्तेदारों से लिए उधार

रेशमा बाई को जब पता चला कि मकान बनाने के लिए सरकार से राशि मिलेगी, तो उनकी इच्छा हुई कि एक बार अच्छा सा मकान बना ले। इसके लिए उन्होंने अपने रिश्तेदारों से भी सहयोग मांगा। रिश्तेदारों से कुछ रुपए लेकर अपने घर में डायनिग हॉल सहित एक बेडरूम और सुंदर किचन के साथ घर मे टाइल्स और पंखे भी लगाए है।

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