सुवासरा सीट पर 13 में से चार चुनावो में रही एक हजार से कम मतों की हार-जीत

महावीर अग्रवाल
मंदसौर २ नवंबर ;अभी तक; मंदसौर जिले की सुवासरा विधानसभा सीट के 15 वी विधानसभा के लिए आज 3 नवंबर 2020 को होने जा रहे उपचुनाव के चुनावी प्रचार की रंगत ने आम चुनाव की रंगत को भी पीछे छोड़ दिया हो तो कोई आश्चर्य नहीं इस सीट के अब तक के हुए 13 चुनाव के नतीजों से यह तो सामने ही की चार बार केवल 1000 मतों से जीत हार रही इसी तारतम्य 2018 के चुनाव में कांग्रेसका उम्मीदवार इस सीट से मात्र 350 मतों के अंतर से जीते इस सीट पर कांग्रेसमें भाजपा दोनों राजनीतिक दलों ने ऐसा धमाकेदार चुनाव प्रचार किया की इनकी नेताओं के चुनाव प्रचार के दौरान इकट्ठा हुई भीड़ ने चुनाव को विश्लेषकों के गणित को गड़बड़ा दिया है एक बार संसद के चुनाव के समय एक अवसर पर कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में हुई सभा में इकट्ठा हुई भीड़ का अनुमान परिणाम आने के बाद कुछ और ही निकला भीड़ को देख भीड़ की संख्या के अनुसार परिणाम का गणित विश्लेषक लगा रहे थे लेकिन परिणाम उल्टा ही निकला ऐसा ही कुछ सुवासरा विधानसभा सीट पर अभी लग रहा है कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों के नेताओं की चुनाव प्रचार की सभाओं में भीड़ ने विश्लेषकों के चुनाव पूर्व के गणित को मतगणना के बाद ही पता लगने तक इंतजार करने को मजबूर कर दिया हो तो कोई आश्चर्य नहीं
                 सुवासरा विधानसभा सीट पर 1972 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार ने जनसंघ के उम्मीदवार को 416 मतों से चुनाव जीतकर शिकस्त दी 1980 के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार ने कांग्रेसियों उम्मीदवार को 335 मतों से हराया था 1985 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार ने भाजपा के उम्मीदवार को 1305 मतों से हराया था तथा 2018 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हरदीप सिंह डंग में भाजपा के उम्मीदवार राधेश्याम पाटीदार को 350 मतों से हराया था इस सीट पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हरदीप सिंह डंग ने पंच सरपंच से लेकर के 6 में से 5 चुनाव जीते जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार राकेश पाटीदार एक बार पंच का चुनाव जीता था हरदीप सिंह डंग का यह सातवा चुनाव है कांग्रेस के उम्मीदवार राकेश पाटीदार मंडी का चुनाव भी लड़े लेकिन वे हारे थे सुवासरा विधानसभा सीट से वह ऐसे समय कांग्रेस के उम्मीदवार बने हैं जबकि उनके सम्मुख दो प्रमुख दावेदार ओम सिंह भाटी व पीरुलाल डबकरा थे इस सीट पर एक प्रमुख बात यह भी अब तक के चुनाव परिणाम से सामने है कि जितने भी उम्मीदवार मैदान में भाग्य आजमाने को खड़े होते हैं मतदाता हर एक की मत पेटी को खाली नहीं रहने देते हैं।
                 जिले की सुवासरा विधानसभा सीट के उप चुनाव की रंगत ने भी एक उदाहरण बना दिया है। पहली बार इस सीट के इस चुनाव मे जो धुंवाधार चुनाव प्रचार मतदाताओं ने देखा वैसा तो शायद ही कभी देखा होगा। जो चुनावी विश्लेषक नेताओ की चुनावी सभाओं में भीड़ देख कर चुनाव परिणाम का अनुमान लगाते रहे होंगे उनके चुनाव पूर्व के अनुमान भी डगमगा गए होंगे। कारण उसका एक मात्र है कि बीजेपी व कांग्रेस दोनो प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओ की चुनावी सभाओं में भीड़ का दृश्य ऐसा रहा कि अनुमान पीछे रह गए।
              सुवासरा विधानसभा सीट पर उप चुनाव हरदीपसिंह डंग के कांग्रेस से स्तीफा देकर बीजेपी में जाने के कारण हो रहे है। इस सीट पर उपचुनाव में ऐसा दृश्य पहली बार सामने आया जब 2018 के चुनाव में जो कांग्रेस से उम्मीदवार था वह 2020 के उसके कारण हो रहे उप चुनाव में बीजेपी का उम्मीदवार है । इस चुनाव में बीजेपी का एक तरफ से चुनावी अनुभव का उम्मीदवार है तो दूसरी और कांग्रेस का वह नया उम्मीदवार है जिसके सम्मुख कांग्रेस के ही दो दमदार उम्मीदवार थे। स्थिति दोनो और समान हो तो आश्चर्य नही । राजी – नाराजी दोनो और के निष्ठावान कार्यकर्ताओं में रही हो और उसे दूर करने के दोनो दल के नेताओं ने प्रयास कर कम करने के कदम उठाए होतो कोई नई बात नही लेकिन यह उन दलों के प्रमुख नेताओं को ही मालूम हैकि उन्होंने क्या कदम उठाए।
                   जैसा कि हर चुनाव के पूर्व चुनाव परिणामों को जानने को इच्छुक जनता अनुमानों से तो खैर संतुष्ट नही होती लेकिन यह एक प्रवर्ति सी बन गई है और फिर निगाह तो वही टिकती है परिणामो तक। सुवासरा सीट के उप चुनाव में प्रचार तो खूब घमासान हुआ। प्रचार के अंतिम दिन तक बीजेपी व कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मतदाताओं ने भी दोनो प्रमुख राजनीतिक दलों को पूरा सम्मान दिया ।दोनो दलों में भीड़ खूब इकट्ठा हुई। इस भीड़ को देखकर परिणामों के अनुमान लगाने वाले राजनीतिक विश्लेषक असमंजस में पड़ गए होतो कोई आश्चर्य नही। जो लोग प्रचार में जोर किस का है से चुनाव परिणाम का अनुमान लगाते उनके सम्मुख भी भीड़ के दृश्य ने सब कुछ सोचने को विवश कर दिया होगा। भीड़ से जोर वाला राजनीतिक दल आगे माना जा सकता था लेकिन इस बार भीड़ ने वह दृश्य नही दिया।
                जी हां चर्चा जरूर नुकीली -कटीली है। सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में हर।गांव में मतदाताओं की रंगत ही कुछ और रही। का कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ की पहली हुई सभा में इकट्ठा हुई भीड़ ने कांग्रेस के जोर को प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इस भीड़ के दृश्य से बीजेपी के नेताओं की नींद उड़ गई हो तो आश्चर्य नही। इसके बाद कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए बीजेपी के उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार की बागडोर मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने सभाली और उन्होंने अपनी पहली चुनावी सभा सेलेकर जब वे पांचवीं बार प्रचार के लिए आए तब तक चुनावी प्रचार में जुटने वाली भीड़ के दृश्य ने फिजा ही बदल डाली। जाड़े का मौसम शुरू होने के पूर्व नेताओं ने ऐसा धुंआधार प्रचार किया किया की गर्मी पहले ही आ गई।
                सुवासरा सीट के उप चुनाव प्रचार में इकट्ठा हुई भीड़ नेदोनो बीजेपी कांग्रेस दलों के पूर्वानुमान पर विराम लगा दिया हो तो कोई आश्चर्य नही । भीड़ ने दोनो दलों के नेताओं को खूब देखा और सुना। खूब स्नेह दिया । मजबूत प्रजातन्त्र का एहसास भी दोनो दलों को मतदाताओं ने करा दिया जिसकी एक बानगी यह चुनाव हो सकता है।
                          यहां एक उदाहरण संसद के हुए एक चुनाव के अवसर का बहुत ही स्पष्ट और प्रामाणिक है। उस समय एक चुनावी सभा मे कोई एक लाख से अधिक भीड़ का अनुमान विश्लेषक लगा रहे थे और इतने ही मतों से हार जीत का फैसला हुआ। इससे स्पष्ट है इस चुनाव में भीड़ से अनुमान नही लगा सकते और फिर भीड़ ने दोनो दलों को संतुष्ट किया तो अब अनुमान तो परिणाम ही बता पाएंगे।
यह बात भी स्पष्ट है कि अब यह भी नही कह सकते कि ऊंट किस करवट बैठेगा। कारण की परिणाम तो मतदाता अपने मताधिकार का 3 नवम्बर 2020 को कर के मत पेटियों में बंद हो जाएगा । परिणाम 10 नवम्बर को पता चलेगा।
मतदाताओं ने नेताओं को सुनने व देखने के बाद अपना जो मन बनाया है वह 3नवम्बर को मतदान के बाद  मत पेटियों में बंद हो जाएगा। इस सीट पर 2,60,266 मतदाताओं में से 1,33,306 पुरूष व 1,26956 महिला मतदाता है । इसके अलावा 5 थर्ड झेंडर मतदाता है। पुरूष व महिला मतदाताओं में कोई बहुत ज्यादा अंतर नही है। बस 6350 मतों का अंतर है । आज इस सीट के मतदाता अपने मतदान के द्वारा उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे जिसका परिणाम 10 नवम्बर को पता चल सकेगा। जो नए मतदाता जुड़े है वे किसे देगे सम्मान यह भी परिणाम से पता चलेगा। इस चुनाव में भीड़ ने तो किसी भी राजनीतिक दल को पूर्वानुमान से दूर रखा । भीड़ ने दोनो दलों को खूब सम्मान दिया तो परिणाम ज्यादा अंतर का रहेगा या पिछली बार की तरह कम अंतर का होगा यह परिणाम को लेकर आकर्षण रहेगा। स

Related Articles

Post your comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *