सुश्री मनीषा कोटडिया बनी मनप्रिय श्री जी म.सा.,  आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने जैन भागवती दीक्षा महोत्सव में दिलायी दीक्षा

7:39 pm or November 19, 2020
सुश्री मनीषा कोटडिया बनी मनप्रिय श्री जी म.सा.,  आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने जैन भागवती दीक्षा महोत्सव में दिलायी दीक्षा
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १९ नवंबर ;अभी तक; कल गुरूवार को दशरथ नगर स्थित नवकार भवन के समीप स्थित स्थान पर ऊंटी (तमिलनाडू) की निवासी सुश्री मनीषा कोटडिया की जैन भागवती दीक्षा हुई। आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के सम्मुख जैन भागवती दीक्षा दिलायी। लगभग साढ़े तीन घण्टे चले इस दीक्षा समारोह में देशभर से आये श्री साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ के पदाधिकारीगण मंदसौर श्री संघ से जुड़े परिवारों के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिकगण उपस्थित थे।
                  कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सभी ने इस दीक्षा महोत्सव में भागीदारी की तथा दीक्षार्थी बहन सुश्री मनीषा कोटड़िया को संयम जीवन के पथ पर अग्रसर होने पर अनुमोदना की। ज्ञान पंचमी व लाभ पंचमी पर्व के शुभ अवसर पर आयोजित इस जैन भागवती दीक्षा में आचार्य श्री के साथ पाठ पर श्री नवीनप्रज्ञजी म.सा., श्री जागृतमुनिजी म.सा., श्री अभिनवमुनिश्री म.सा., श्री दिव्यम मुनिजी म.सा. आदि ठाणा 5 व महासती श्री अनोखा कुंवरजी म.सा., श्री सूर्यकांताजी म.सा. आदि ठाणा 11 विराजित थे। साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाओं की पावन उपस्थिति में 24 वर्षीय सुश्री मनीषा कोटड़िया ने जैन भागवती दीक्षा अंगीकार की। आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने जैसे ही जैन भागवती दीक्षा की विधि पूर्ण करायी। पूरा पाण्डाल जयकारों से गुंज उठा। सभी ने दीक्षार्थी मनीषा कोटड़िया को संयम जीवन पथ पर अग्रसर होने पर शुभ आकांक्षा व्यक्त की।
                 आचार्य श्री ने दीक्षा महोत्सव ने नवदीक्षित साध्वी का श्री मनप्रियाश्रीजी म.सा. के रूप में नामकरण किया। नामकरण के उपरांत नवदीक्षित साध्वी ने दीक्षा महोत्सव में उपस्थित धर्मालुजनों को साध्वी के रूप में मांगलिक श्रवण करायी। इसके पूर्व प्रातःकाल दीक्षार्थी बहन की केश लोच व अन्य धार्मिक क्रियाये महासती श्री अनोखाकुंवरजी म.सा. व श्री सूर्यकांता श्रीजी म.सा. की पावन निश्रा में हुई। इस दो दिवसीय दीक्षा महोेत्सव में मुख्य लाभार्थी होने का लाभ स्व. श्री विनोद जैन कच्छारा, श्रीमती किरण जैन, श्री सुशील जैन कच्छारा, श्रीमती सरोज जैन परिवार व श्री अशोक चौरड़िया व श्रीमती मंजु चौरड़िया परिवार (इन्दौर) ने लिया। मंदसौर श्री संघ ने लाभार्थी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
                     आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने दीक्षा महोत्सव में उपस्थित धर्मालुजनों को अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि जो सौभाग्यशाली होते है उन्हें ही संयम लेने का अवसर मिलता है। आज के समय में भोग व भौतिकता का बोलबाला है। ऐसे में कोई व्यक्ति संयम लेता है तो वह प्रेरणादायी है जो भी इस दीक्षा महोत्सव में आये है उन्होनंे संयम की अनुमोदना करके अपने पुण्य को बढ़ाने का काम किया है। आपने कहा संयम जीवन के पथ पर बढ़ने वालों को कई कसौटियों का सामना करना पड़ता है। संयम कोई खेल नहीं बल्कि धर्म के पथ पर पुरा जीवन समर्पित करने का नाम ही संयम जीवन है। संयम जीवन स्वीकार करने वालों को तत्व ज्ञान, सेवाभाव, अनुशासन जैसी कसौटियों से प्रतिदिन गुजरना पड़ता है। दीक्षार्थी मनीषा कोटड़िया ने संयम जीवन स्वीकार करके अपने जीवन को कसौटियो पर परखने का जो निर्णय लिया है वह प्रेरणादायी है। आपने कहा कि जो व्यक्ति दीक्षा लेताा है उसे इस जगत के ही नहीं स्वर्ग के भी देवता नमस्कार करते है। उसका गुणावाद करते है। आपने कहा कि संसार मृत्यु का तो दीक्षा अमरता का मार्ग है। पाप रूलाता है, धर्म हंसाता है, पूण्य खुशी देता है, धर्म संतुष्टी देता है। जब व्यक्ति को संतुष्टी हो जाती है तो खुशी तो उसे अपने आप प्राप्त हो जाती है। आपने यह भी कहा कि धर्म में संकिर्णता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए जो भी साधु-साध्वी चाहे वे किसी भी धर्म या पंथ के हो वे सांसारिक व्यक्तियों से श्रेष्ठ है, इसलिये उन सभी को नमस्कार करना, उनका आदर करना, हमारा कर्तव्य होना चाहिये। साधु-साध्वियों की सेवा में पंथ को आड़े नहीं आने दे किसी भी पंथ का साधु या साध्वी हो उसकी सेवा को अपना कर्तव्य माने किसी का भी अनादर नहीं करे क्योंकि जैन धर्म बैर भाव नहीं मैत्री भाव सिखाता है।
                   धर्मसभा में श्री नवीनप्रज्ञजी म.सा. ने अपने विचार रखे। धर्मसभा में ऊँटी तमिलनाडू से आये विशाल कोटड़िया ने भी अपने विचारों से सभी को अवगत कराते हुए आचार्य श्री के तप व संयम जीवन की अनुमोदना की। मंदसौर श्री संघ अध्यक्ष श्री गजराज जैन ने दीक्षा महोत्सव में सहयोग करने वाले  सभी धर्मालुजनों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा स्व. श्री विनोद जैन कच्छारा का भी स्मरण किया जो कि श्री संघ के प्रति पूरे जीवन समर्पित रहे। संचालन विरेन्द्र जैन सीए ने किया।
                   तीन मुमुक्षुओं के परिवारजनों ने आज्ञा पत्र भेंट किए- मनीषा कोटड़िया की दीक्षा महोत्सव में तीन अन्य मुमुक्षु युवतियां भी आई। आगामी समय में इन तीनों मुमुक्षु युवतियों की दीक्षायें सम्पन्न हो, इसके लिये तीनों मुमुक्षु के परिवारजनों ने केन्द्रिय श्री संघ को अपने परिवार के आज्ञा पत्र सौंपे। केन्द्रीय श्री संघ ने आचार्य श्री को यह आज्ञा पत्र सौंपकर समय में जहां भी शुभ मोहरत व अनुकूलता हो वहां तीनों मुमुक्षु युवतियों को दीक्षा प्रदान करने की विनती की। इन तीनों मुमुक्षु मंे देवगढ़ छत्तीसगढ़ की श्रद्धा सुराना, इरोड तमिलनाडु की अदिती कोटड़िया व चित्रा सालेचा शामिल है। तीनों मुमुक्षु ने दीक्षा महोत्सव में अपने प्रेरणादायी उद्बोधन के माध्यम से संयम जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला और आचार्य श्री शीघ्र ही दीक्षा देने की विनती की।
                  मंदसौर श्री संघ ने मुमुक्षु, दीक्षार्थी बहनों का बहुमान किया- दीक्षा महोत्सव में श्री साधु शांतक्रांति जैन श्रावक संघ अध्यक्ष गजराज जैन, संरक्षक कोमल बाफना, महामंत्री विरेन्द्र जैन सी.ए., विमल पामेचा, कोषाध्यक्ष लोकेन्द्र जैन गोटावाला, सहमंत्री कमल मेहता, उपाध्यक्षगण कांतिलाल रातड़िया, भंवरलाल जैन नगरीवाला, प्रकाशचन्द्र जैन गरोठ वाला, मणीलाल जैन नगरीवाला, अनिल डूंगरवाल, युवा संघ अध्यक्ष अजय जैन गरोठ वाला, महिला मण्डल अध्यक्ष अंजना कोचट्टा, बहु मण्डल अध्यक्ष प्रमिला कोचट्टा आदि ने तीनों मुमुक्षु एवं दीक्षार्थी मनीषा कोटड़िया एवं उनके परिवारजनों को बहुमान किया।
ये हुए दीक्षा महोत्सव में शामिल- दीक्षा महोत्सव में केन्द्रीय श्री संघ अध्यक्ष प्रकाशचन्द्र श्रीमाल रायपुर, महामंत्री नरेन्द्र कोठारी, प्रतापगढ़ के राकेश जैन, प्रेमराज सोनावत, विशाल कोटडिया, प्रदेश के पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाहटा, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातड़िया, समाजसेवी सागरमल जैन गरोठ वाला, भंवरलाल पामेचा, हस्तीमल जैन (मुन्ना भैया), बाबूलाल जैन नगरीवाला, कमल कोठारी, गजेन्द्र हिंगड़, कुशल डोसी, दिलीप रांका, द्वारका सेठिया, शिखर कासमा, मोतीलाल मेहता, अशोक उकावत, सुरेश तलेरा, अशोक मारू, पारस जैन, विकास जैन, राकेश कोचट्टा, कोमलसिंह दुग्गड़ सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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