सूदखोरो व चिटफांड कम्पनियों के उंची दर के ब्याज से राहत के लिये थाना स्तर पर शुरू किये विशेष अभियान

मयंक शर्मा

खंडवा १३ नवंबर ;अभी तक; सूदखोरों द्वारा जरूरतमंद लोगों का जमकर शोषण करनेवालो के खिलाफ सख्त रवैया लेकर पुलिस मैदान में उतर गयी है। बुधवार से प्रतिदिन जिले मेें प्रत्येक थाना स्तर पर दापेहर 12 बजे से हशहवा इायााााोजित किये जा रहे है।ू सूउखोरा व चिट फंड कम्पनियो के कथित आंतक के कारण कई लोग आत्मधाती कदम उठा चुके है। चार साल की निद्रा भंग कर सूदखोरों के खिलाफ अब फिर से पुलिस सक्रिय हुई है। कोरोना काल में शहर में ऐसी आधा दर्जन घटनाएं सामने आ चुकी है, इनमें सिंधी कॉलोनी के किराना व्यवसाई रामनगर का टेंट व्यवसाई सहित कई व्यापारी और आम लोग आर्थिक संकट से जूझते हुए आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। वही अभी भी कई लोग परेशानियों का सामना करने को विवश है।

                 पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने बताया कि जिले में चिटफंड और सूदखोरों के विरूद्ध प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष शिविर आयोजित किए गए है। उन्होंने बताया कि यह शिविर जिले के सभी पुलिस थानों में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित होंगे। पीडित शिविर में उपस्थित होकर अपनी समस्या का निराकरण करवा सकेगें।
               कोरोना की वजह से इस वर्ष व्यापार- व्यवसाय लंबे समय तक प्रभावित होने से कई व्यापारियों और परिवारों को रोजगार के संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई कारोबार और उद्योग धंधे चैपट हो गए हैं। ऐसी स्थिति में जीवन यापन और परिवार का गुजर-बसर लोगों के लिए चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए कई लोगों द्वारा सूदखोरों से रुपए उधार लेने तथा कई हितग्राही अपनी बैंक की किस्त आदि का समय पर भुगतान नहीं कर पाने से परेशान होकर आत्महत्या जैसे कदम उठा चुके हैं।
                   पुलिस सूत्रों की माने तो  10 से 30 फीसदी उंची ब्याज दर वह भी प्रतिमाह के मान से वसूली के कारण अक्सर यह बात सामने आई है कि इनके चुगंल से कर्जदार कभी मुक्त नहीं हो पाता है। एक बार सूदखोर से कर्ज लेने के बाद कई बार तो मूलधन की तुलना में कई गुना से भी अधिक राशि जमा करने के बाद भी े कर्ज का बोझ कम नही होता है। कई सूदखोरों द्वारा कर्ज देते समय दस्तावेजी कार्रवाई के साथ कर्जदार से उसके एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक/चेकबुक तक ले ली जाती है। इसकी मदद से नौकरी पेशा लोगों की तनख्वाह खाते में आने पर स्वयं ही राशि का आहरण कर लेते हैं।
चार साल पहले पुलिस महानिरीक्षक इंदौर के निर्देश पर यहां की गयी कार्रवाही में  कई रसूखदार और सफेदपोश सूदखोर बेनकाब हुए थे । कार्रवाई के बाद कुछ हद तक ऐसे कारोबार पर लगाम लगी थी। जानकारों की माने तो अभियान से पीछे हटते ही ऐसे मामलों में पुलिस थानों में कई बार सुनवाई नहीं होने से सूदखोरों का मनोबल बढ़ गया  है। अब पुनः  पुलिस द्वारा इस दिशा में उठाया गया कदम और आयोजित शिविर में सूदखोरों से परेशान लोगों  के कदम राहत के लिये  शिविर तक पहुंच रहे हे।
एसपी ने बताया कि पुलिस ने सामाजिक सरोकार अंतर्गत ऐसे मामलों की अलग से जांच कर लोगों को राहत देने की योजना है। जन समस्याओं और सरकारी योजनाओं के संबन्ध में लगने वाले शिविर की तरह ही पुलिस थानों में पंडाल लगाकर आर्थिक शोषण से पीड़ितों की सुनवाई की जाएगी।उचित निराकरण का प्रयास किया जायेगा।

 


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