सूर्यग्रहण एवं चन्द्रग्रहण के दिवस दान पुण्य तप श्रेष्ठ है- संत शंभूलाल

6:26 pm or November 9, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर ९ नवंबर ;अभी तक;  श्री  प्रेमप्रकाश आश्रम के 13वें वार्षिक महोत्सव के पंच दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत 8 नवम्बर मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा चन्द्र ग्रहण समाप्ति के पश्चात शाम को 6.30 बजे संत श्री शंभूलालजी प्रेमप्रकाशी ने श्रीमंदिर के पट खोलकर भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, सतगुरु   टेऊँराम जी महाराज की मूर्तियों को गंगाजल व दूध से अभिषेक कर सत्संग हाल में संगत पर अमृतरूपी बुंदों का छिड़काव किया।
                        इस आशय की जानकारी सेवा मण्डली के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शिवानी ने बताया कि महोत्सव के तीसरे दिवस सत्संग में संत श्री शंभूलाल प्रेमप्रकाशी ने अपने मुखारविन्द से चंद्रग्रहण व सूर्यग्रहण की महिमा को अत्यन्त ही सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि कुछ दिनों पूर्व सूर्यग्रहण एवं आज कार्तिक पूर्णिमा का चंद्रग्रहण आये है, वो आज से 5300-5400 वर्ष पूर्व जब भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लिया था तब यह योग उत्पन्न हुआ था। चन्द्रग्रहण के दिवस स्नान का महत्व प्रयागराज में है और सूर्यग्रहण के दिवस स्नान का महत्व गया में है।
सूर्यग्रहण व चन्द्रग्रहण के दिन सकिर्तन, दान, पुण्य, तप, नाम स्मरण 10 करोड़ दान से भी श्रेष्ठ है। ग्रहण काल में किया गया दान अक्षुण्य है अर्थात कभी नाश न होने वाला है। श्री प्रेमप्रकाश गं्रथ में भी आचार्य सतगुरू टेऊँरामजी महाराज ने ग्रहण काल में समय का महात्म्य समझाया है। जो प्राणी भजन से प्रीत लगाता है, उसका इस भव सागर में बेड़ा पार हो जाता है।
आभार प्रदर्शन श्रीमती पुष्पा लक्ष्मणदास पमनानी ने प्रकट किया।
10 नवम्बर को पधारेंगे संत मंडल के साथ स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज
श्री शिवानी ने बताया कि गुरूवार, 10 नवंबर को पंचम पीठाधीश्वर स्वामी भगतप्रकाशजी महाराज संत मण्डल के साथ सुबह 8.30 बजे दशपुर नगरी में मंगल प्रवेश करंेगे। उनकी अगवानी संतश्री शंभूलालजी प्रेमप्रकाशी के सानिध्य में डॉ. पमनानी हॉस्पिटल से स्वागत सत्कार के साथ शोभायात्रा निकलेगी। जो श्री प्रेमप्रकाश आश्रम पहुचेंगे। यहां सत्संग, ध्वजा बंधन व हवन की पूर्णाहुति होगी। सिन्धी समाज व सनातन धर्मी सपरिवार पधारे।