सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति मण्डला में आस्था की लगी डुबकियां ,भरे मेला हुये पुराण बटे लड्डू खिचड़ी

9:13 pm or January 14, 2021
सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति मण्डला में आस्था की लगी डुबकियां ,भरे मेला हुये पुराण बटे लड्डू खिचड़ी
मण्डला से सलिल राय
मंडला १४ जनवरी ;अभी तक; मध्यप्रदेश के मण्डला में आज गुरुवार को पौराणिक सनातनी परम्परा के महापर्व मकर संक्रांति पर्व पर पुण्य सलिला माँ नर्मदा की सहायक नदियों के जलीय संगम जल तटों में प्रत्यक्ष सूर्य देव और हर हर नर्मदे के जय घोष सुबह से सुनाई दिये मकर संक्रांति पर जहाँ तिल लड्डुओं के भोग लगे वही संक्रांति की खिचड़ी बनाने की परम्परा आज भी अपनी प्राथमिकता लिये रही वही मकर संक्रांति की बधाईयो में मोबाईल में संदेशों का अनवरत सिलसिला बीती रात से चलता रहा।
                      सूर्य देव के उत्तरायण के समय की अलग जोतिषविदों की समय गरणा से लोग अपनी सुविधानुसार अर्की स्नान यहाँ हुये मण्डला के महाराजपुर संगम स्थल पर श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पुण्य स्नान की डुबकी लगाई इस स्नान के लिए बीती रात से ही दूरदराज से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था रपटा घाट में इन श्रद्धालुओं को रात व्यतीत करनी थी पर अफ़सोस यह था कि यहाँ कड़की सर्द रात में न तो यहाँ संचालित आरती समितियों ने अलाव की लकड़ी की व्यवस्था नही की नही ही नगर पालिका परिषद ने भी अलाव की अनदेखी की हैं।
               मंडला जिले के अनेक स्थानों में मकर संक्रांति पर्व में मेले भरे संगम घाट में नगरीय प्रशासन पुलिस और जिला प्रशासन ने पवित्र स्नान के लिए सुरक्षित सुरक्षा देखी गई यहाँ परम्परागत मेला भी लगा।
सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति मण्डला में आस्था की लगी डुबकियां ,भरे मेला हुये पुराण बटे लड्डू खिचड़ी

सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति मण्डला में आस्था की लगी डुबकियां ,भरे मेला हुये पुराण बटे लड्डू खिचड़ी

अब मकर संक्रांति महापर्व में बात मण्डला से डिंडोरी मार्ग के देवगांव संगम यहाँ माँ नर्मदा और बुढनेर नदियों के जलीय जल संगम के साथ प्रकृति ने अनुपम रचना की हैं यहाँ स्थानीय मान्यताओं में यहाँ पौराणिक गाथाओं का गुणगान श्रद्धा जनित करता हैं जमदाग्नि ऋषि के साथ परसुराम और कामधेनु गाय की गाथा के द्रष्टान्त सुनाई देते तो यहाँ के शिवलिंग भी अपने आप मे एक अलग दर्शन देते है।कहावतों की माने तो यहाँ देश के गुलामी काल मे पिंडारी लुटेरों ने देवगांव संगम में स्थित शिव लिंग में उस समयकाल में इतनी चमक थी जिसे यह समझ गया कि इस शिवलिंग में कोई बेशकीमती हीरा है इसकी चर्चा जब फैली तब किदवंती व्यख्यान में बताया गया कि पिंडारी लुटेरे इस शिवलिंग को लूटने यहाँ आये और जैसे जैसे इस शिवलिंग को खोदने का प्रयास किये यह शिवलिंग जमीन में नीचे धसता गया हार तक के लुटेरे यहां से वापस चले गये इस दिव्य शिवलिंग में आज भी जल अर्पित करने गजब की चमक देखी जा सकती हैं वही इस स्थल में मेल फीमेल पीपल और कामधेनु के पग चिन्ह को मान्यता हैं।इसका प्रसारण बर्ष 1983 में आकाशवाणी में मण्डला जिले की तस्वीर के शीर्षक से प्रसारण भी किया गया था इस मौके में भी मौजूद रहा।

                      देवगांव संगम में आज जब कुछ नही बहुत यानी बड़ी संख्या में वनांचलों से वनवासी यहाँ हर साल के संक्रांति पर्व में आये इन्हें संक्रांति पर्व क्यों मनाया जाता यह नही बता पा रहे पर इनकी श्रद्धा और आस्था कोई नही बदल सकता इन्हें संक्रांति स्नान की डुबकी लगाने की परंपरा का परम्परागत निर्वहन करना है वह आज भी किया गया हाथों में नारियल अगरबत्तियां और फिर जल तट में पूजन के बाद भोजन प्रसादी बनने की दृश्याबली श्रद्धा भावना के दर्शन करा रही थी।यहाँ शांत सौम्य परिवेश में मेला भी लगा देवगांव रहवासी सुशील झरिया ने बताया इस बार गतबर्ष की तुलना में अधिक संख्या लोग आये वही स्थानीय समिति ने खिचड़ी बना वितरण किया।
                        इधर देवगांव संगम के समीप मनोट त्यागी आश्रम में धर्म अनुरागी पुरणवेत्ता पंडित कथा वाचक रामगोपाल नीलू महाराज के द्वारा माँ नर्मदा पुराण बीते 8 जनवरी से 15 जनवरी को किया जा रहा हैं इसका आयोजन समाजसेवी पुष्पा ज्योतिष की प्रवाहिनी समिति ने इसका आयोजन किया हैं।पुराण वाचक नीलू महाराज की एक अलग जनजागरण की विचारधारा भी धर्म ग्रन्थो के वाचन के साथ सदैव देखी जाती वह इस माँ नर्मदा पुराण में बड़ी संख्या सुन रहे ग्रामीणों को महाराज जी जहां अमृत रूपी माँ नर्मदा की कथा से श्रोताओं को अपनी धर्ममयी शब्दाबली धर्म आस्था का व्यख्यान करते वही माँ नर्मदा के अमृत जल को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सबको जोड़ते वही जल प्रवाह तट में वन भूमि के छरण को रोकने के लिये पेड़ो की हरित चुनरी ओढ़ाए रखने का अलख जागरण कर रहें है।साथ ही पूजा पद्धतियों में उपयोग होने वाली सामग्री को माँ नर्मदा के जल में विसर्जन की समझाईस भी दे रहें।

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