सेवा भाव का जज्बा, बेजुबानों को खाना खिला रही हिमांशी

2:20 pm or January 5, 2022
मोहम्मद सईद
शहडोल, 5 जनवरी ; अभी तक ;  कोरोना काल में जब लोगों ने एक दूसरे से दूरी बना ली तब शहडोल में रहने वाली 25 वर्षीय हिमांशी पटेल ने सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को खाना खिला कर उनसे करीबी रिश्ता बना लिया। सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को खाना खिलाने का हिमांशी का यह सिलसिला लॉक डाउन से शुरू हुआ जो अभी तक अनवरत जारी है। हिमांशी लगभग 50 कुत्तों को रोजाना खाना खिला कर उनकी भूख मिटा रही हैं। इतना ही नहीं हिमांशी कुत्तों के बीमार पड़ने पर उनकी दवा का भी इंतजाम करती हैं।
चावल, ब्रेड व बिस्कुट लेकर निकलती हैं
                 शहडोल के वार्ड नंबर 16 पटेल नगर की निवासी हिमांशी पटेल ने बताया कि घर में पालतू कुत्ता होने के कारण कुत्तों से लगाव तो बचपन से ही था। लेकिन लॉक डाउन के दौरान उन्होंने देखा कि सड़क पर कई ऐसे कुत्ते हैं जिन्हें भोजन नहीं मिल रहा है। बस उसके बाद से उन्होंने इन कुत्तों को भोजन कराने की ठान ली। उन्होंने बताया कि शुरू में वे अपने घर से बिस्किट लेकर स्कूटी से निकलती थी। लेकिन उन्होंने देखा कि कुछ कुत्ते बिस्किट नहीं खाते और बिस्किट से उनकी भूख भी नहीं मिटती। इसके बाद हिमांशी अपनी स्कूटी में ब्रेड, दूध और पेडिग्री भी ले जाने लगीं। हिमांशी  ने बताया कि इस वक्त वे रोजाना 6 किलो चावल घर से पका कर ले जाती हैं। यह खर्च वह अपने पॉकेट मनी से उठाती हैं। उनके इस जुनून और लगन को देखते हुए शहर की रीवा होटल के संचालक उन्हें प्रतिदिन आधा सैकड़ा रोटी देते हैं जिसे वे कुत्तों को खिलाती हैं। उनके इस सेवा कार्य में परिवार के सदस्यों के साथ ही कई परिचित भी आर्थिक मदद कर रहे हैं।
                  हिमांशी नियमित शाम 5 बजे घर से निकलती हैं और शहर के प्रमुख मार्गों में दिखने वाले कुत्तों को भोजन कराकर रात लगभग साढ़े 7 बजे घर पहुंचती हैं। सेवाभाव का आलम यह है कि देर हो जाने पर कुत्ते उस रास्ते पर निहारते इस तरह बैठे रहते हैं मानो वे हिमांशी का इंतजार कर रहे हो। सर्दी से इन कुत्तों को बचाने के लिए हिमांशी ने बाजार से लेकर उन्हें विंटर कोर्ट (स्वेटर) भी पहनाया है। हिमांशी ने कुत्तों को रिफ्लेक्टर कॉलर बेल्ट भी पहनाया है, ताकि सड़क में बैठे होने के कारण वे वाहन चालकों को दूर से दिखाई दे सके।
शुरू में लोगों को फालतू काम नजर आया
                  हिमांशी बताती हैं कि शुरू में जब वह कुत्तों को भोजन देने पहुंचती थी तो आस पास मौजूद लोग चर्चा करते सुनाई देते थे, कि यह फालतू का काम ना जाने किस लिए कर रही है। लेकिन धीरे-धीरे कुछ समय बीतने के बाद अब वही लोग इस काम को सराहने लगे।
                    हिमांशी ने अपने इस काम को और मजबूत बनाने के लिए फीडिग हंगरी सोल्स (जिसका अर्थ है-भूखी जीवात्माओं को खाना खिलाना) के नाम से फेसबुक में एक पेज भी बनाया हुआ है। इस पेज में वे अपनी सारी गतिविधियों को साझा करती हैं।
                हिमांशी के पिता वी एन पटेल पीएचई विभाग शहडोल में सब इंजीनियर हैं, जबकि माता हाउस वाइफ है। हिमांशी ने बताया कि इस सेवा भाव में उनके परिजनों का बराबर सहयोग मिलता है। हिमांशी बताते हैं कि कोरोना काल के कारण शुरू में पापा तो इस काम के लिए मना करते थे, लेकिन मम्मी बराबर उनका हौसला बढ़ाती रही। बी एस सी स्नातक कर चुकी हिमांशी अब पी एस सी परीक्षा की तैयारी में जुटी है।
पालतू कुत्तों को सड़क पर ना छोड़े
                 अपने अनुभव को साझा करते हुए हिमांशी ने बताया कि कई जगह उन्हें यह भी देखने को मिला कि लोग अपने पालतू कुत्तों को सड़क पर छोड़ दिए जिसे अब वह भोजन दे रही हैं। हिमांशी का कहना है कि पालतू कुत्तों को इस तरह सड़क पर छोड़ना उचित नहीं है। लोगों को चाहिए कि वे घर के बाहर ही कुत्तों को छोड़कर उनके लिए खाने का प्रबंध कर दें ताकि वह सड़क पर सुरक्षित रह सके।