सोमवार को 5 बैक कर्मियो सहित 7 लोगो पर दर्ज होगा प्रकरण।

मयंक शर्मा 

खंडवा,26 सितम्बर , अभीतक । जिले में तीन सहकारी बैंक में गडबडियों के बाद ताले डल चुके है तो एक और जिला सहकारी केन्द्रीय बेक भी पिछलग्गू होने की तैयारी में है। भूमि विकास बैंक खंडवा  राज्य व्यापी कार्रवाही मेें  बंद का गोता लगा गयी है। दीनदयाल नागरिक सहकारी बैक में लाखों रूपया जमाकर्ताओं को डूबने के साथ ताले डल गये है।यही स्थिति सिटीजन बैक की रही। अब जिला सहकारी बैंक के अधीन काय्ररत सोसाटियों नित्य नयें गुल खिला रही है।
ताजे तौर पर सेवा साख सहकारी समिति जसवाड़ी में किसानों के फर्जी खाते खोलकर गबन किया गया है। मामले में जांच  रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन बैंक शाखा प्रबंधक वीपी दीक्षित ने समिति प्रबंधक द्वारा लाए गए दस्तावेजों के आधार पर फर्जी किसानों के खाते खोले थे। जिसमें सुपरवाइजर आरसी दमाड़े, कैशियर राकेश यादव, कैशियर प्रतिमा शुक्ला, अकाउंटेंट अंजली वर्मा व समिति प्रबंधक  दीपक पाराशर के दोनो  बेटे सिद्धांत व आदर्श पाराशर दोषी पाए गए हैं।
रिपोर्ट मिलने के बाद जिला सहकारी केन्द्रीय बैक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एके हरसौला ने बताया जिला सहकारी बैंक की दो सदस्यीय जांच टीम ने गबन की रिपोर्ट हमें सौंपी है। जिसमें तत्कालीन समिति प्रबंधक, उसके दो बेटों, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सुपरवाइजर, अकाउंटेंट व दो कैशियर की संलिप्तर्ता है।
  उन्होने कहा कि बैंक प्रबंधक ने वर्तमान शाखा प्रबंधक को थाने में शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।जांच रपट में  14 लाख रुपए का गबन करना पाया गया है। समिति की प्रबंधक की मौत हो जाने पर बैंक शाखा द्वारा बचे 7 लोगों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उधर लंबित मामलों में कार्रवाही लुप्त हो गयी है। इन मामलो में प्रबंधन मोन है।  खंडवा की रामेश्वर सेवा सहकारी साख समिति के नाम से जिला सहकारी बैंक द्वारा 9.90 करोड़ रुपए का चेक भारतीय स्टेट बैंक की बांबे बाजार शाखा एवं सिविल लाइंस शाखा में जमा किया गया था। दोनों चेक आसाम के गुवाहाटी की एसबीआई शाखा से वहां की संस्था द्वारा जारी किए गए थे। नकली होने की शंका के चलते चेक रोक दिए गए थे। मामले में सोसायटी उप प्रबंधक सहित कुछ लोगों की जांच भी हुई थी, लेकिन उंची सांठ गाठ के चलते  मामले को दबा दिया गया। संबंधितों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसी तरह दगड़खेड़ी साख सेवा समिति में फर्जी लोन वितरण मामले में जांच पिछले चार साल से अटकी पडी है।। जिम्मेदार समिति प्रबंधक वीरेंद्र शेखावत, रमेश साकल्ले सेवानिवृत्त हो गए। मामले में अब तक एफआईआर भी नहीं हुई।